
Investment Strategy: सोना-चांदी में जबर्दस्त रैली के बाद अभी स्थिरता आई है। उधर, शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव का दौर खत्म नहीं हो रहा है। शुक्रवार को भी सेंसेक्स में 800 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई। ऐसे में निवेशक करे तो क्या? क्या सोना-चांदी में निवेश करते रहें या अब सावधानी बरतने का वक्त आ गया है? शेयर बाजार कब तक स्थिर होगा और कब से वह मोटा रिटर्न देने की स्थिति में होगा? क्या शेयर बाजार में अब भी मोटी कमाई के मौके हैं?
हर निवेशक अभी ऐसे ही सवालों से जूझ रहा है। हमने निवेशकों का उलझन दूर करने के लिए डीएसपी म्यूचुअल फंड के एमडी और सीईओ कल्पेन पारेख से बात की है। आइए जानते हैं उनसे पूछे गए सवाल और उनके जवाब।
रॉल्फ डॉबेली ने कहा है कि 'दिमाग को खबरों की उतनी ही जरूरत है शरीर को जितनी चीनी की'। यह विशेषकर निवेश का फैसला लेने के संदर्भ में बहुत सटीक है। मैंने समय के साथ निवेश की अपनी गलतियों से सीखा।
एक वक्त था जब मैं हर चिल्ल-पों पर प्रतिक्रिया करता था। लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि जब तक कोई खबर हमारे पास पहुंचती है तब तक मौके खो गए होते हैं। आपके जानने तक बाजार सब जान चुका होता है। इसलिए खबरों पर प्रतिक्रिया करना बेकार है। बेहतर है कि प्रतिक्रिया देने की जगह अपने कौशल बढ़ाने और जॉब को सुरक्षित करने पर ध्यान दें।
निवेश, शांत मन से ध्यान लगाने जैसा है। यह कोई आसान बात नहीं है। अगर आप हल्का-फुल्का रिटर्न चाहते हैं तब खबरों के पीछे भागते रहिए। तब यही होगा कि चांदी के दाम बढ़ें तो खरीद लेंगे और घटे तो बेच लेंगे। लेकिन अगर मोटा रिटर्न चाहिए तब निवेश के गलत तरीकों को पहचानिए और उनसे दूर ही रहिए।
अच्छा निवेशक वही है जो अपने वित्तीय योजनाओं को जरूरतों के साथ मैच करता है। उसके पास निवेश करने का कितना समय है और कब उसे पैसे चाहिए होंगे, इन सब की साफ-साफ जानकारी जरूरी है। ऐसे जरूरी सवालों के जवाब जान लेने के बाद बारी आती है अच्छे एसेट क्लास के चुनाव की।
अगर आप एक वर्ष के लिए निवेश कर रहे हैं तो डेट या आर्बिट्राज फंड्स जैसे सुरक्षित एसेट क्लास में निवेश करें। अगर आपको कम से कम पांच वर्ष के बाद पैसे की जरूरत पड़ेगी तो हाइब्रिड फंड्स की तरफ बढ़ें। अगर आपके पास 10 से 20 वर्ष का समय है तब आपको शेयरों में निवेश करना चाहिए।
एसआईपी की विशेषता यह है कि आप आज के बाजार में खरीदारी नहीं कर रहे होते हैं, आप समय के साथ-साथ अपनी लागत को पर्याप्त और उचित बनाते रहते हैं। आज शेयर बाजार हाई है या लो, यह एसआईपी इन्वेस्टमेंट के लिए कोई मायने नहीं रखता है।
पिछले पांच वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने तेज छलांग लगाई, लेकिन पिछले एक वर्ष में हमने इसे सिकुड़ते देखा है। शेयर अब भी सस्ते नहीं हैं। भारत जैसे बाजार में 17-18 गुना के आसपास की प्राइस-टु-अर्निंग (पीई) उचित है, लेकिन यह अभी 21-22 गुना पर है। इस नजरिए से देखें तो हम आज भी उचित मूल्यांकन से डेढ़ वर्ष आगे हैं। बाजार महंगा है, इसलिए हमें अपने शेयरों में निवेश पर रिटर्न हल्का-फुल्का ही मिलेगा।
सोना-चांदी में निवेश का सर्वोत्तम समय दो-तीन वर्ष पहले था, जब ये दोनों मेटल सस्ते थे। हमने तीन वर्ष पहले सिल्वर फंड लॉन्च किया था जो अब 500 पर्सेंट बढ़ चुका है। लेकिन अब इसमें निवेश को लेकर उत्साहित होना गलती होगी। जो आज हर जुबां पर है, वह अगले कुछ वर्षों तक लाभ दे पाएगा, ऐसा बहुत कम ही होता है।
सबसे अच्छा रिटर्न उन चीजों में निवेश करने पर मिलता है जिसका हालिया रिटर्न खराब रहा हो और लोग जिसकी तरफ देख नहीं रहे हों। सोना-चांदी उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां वह चौतरफा चर्चा बटोर रहे हैं। इसका अक्सर यही मतलब होता है कि इनमें बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव आएंगे।
सोना-चांदी ऐसा निवेश है जो 10 साल तक कुछ भी फायदा नहीं दे सकता है और सबसे ऊंची कीमत से अचानक 70 पर्सेंट टूट भी सकता है। अगर आपने गोल्ड-सिल्वर में बिल्कुल भी निवेश नहीं किया है तो अब अपने कुल निवेश का 3 से 5 पर्सेंट एसआईपी के जरिए लगाएं।
अगर बाजार की खराब परिस्थितियों के कारण आपका पोर्टफोलियो को बड़ा नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई के लिए गोल्ड-सिल्वर में 10 पर्सेंट निवेश नहीं करने लगें। अगर आपको यह सब बहुत जटिल लगता है तो बेहतर है कि आप मल्टि-एसेट फंड में पैसे डालना शुरू करें जिसका मैनेजर हिसाब-किताब लगाकर सोने-चांदी में निवेश करेगा।
बाजार के संकुचन में ही मौके हैं। वर्ष 2008 से 2013 के बीच की अवधि में शेयर बाजार ने कुछ भी रिटर्न नहीं दिया, फिर भी SIP के जरिए निवेश करने वालों ने अनुशासन में रहकर 9-10 पर्सेंट की कमाई की। आज बॉन्ड यील्ड्स 7 पर्सेंट पर पहुंच गए जबकि महंगाई 4 पर्सेंट पर है, यानी 3 पर्सेंट का आपको वास्तविक लाभ मिल रहा है। आज भारतीय के साथ-साथ वैश्विक कंपनियों, बहुमूल्य धातुओं और फिक्स्ड इनकम वाले एसेट क्लासेज में मिलाजुलाकर निवेश करने का वक्त है।
पिछले पांच-छह वर्षों में बैंकिंग शेयरों ने भी अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, लेकिन अब उनका वैल्युएशन सुधर रहा है। ऐसे में एक अच्छा फंड मैनेजर बढ़िया रिटर्न देने वाले बैंकिंग शेयरों की पहचान कर लेगा।
मैं बार-बार पोर्टफोलियो से छेड़छाड़ नहीं करता। मैं तभी बदलाव करता हूं जब पोर्टफोलियो का कोई अंश बिल्कुल बवाल काट रहा हो। हाल में मैंने सोने के खदान से जुड़े 3 से 4 पर्सेंट तक शेयर घटाए हैं क्योंकि उनमें बहुत बड़ी तेजी आ गई। वैसे मेरे कोर पोर्टफोलियो का 65 पर्सेंट भारतीय और विदेशी कंपनियों के शेयर, 25 पर्सेंट बॉन्ड्स और करीब 12 पर्सेंट सोना होता है।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। इसमें दिए गए विचार और सुझाव एक्सपर्ट के हैं, मिंट हिंदी के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई फैसला लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि बाजार की स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और हालात अलग-अलग हो सकते हैं।
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