Bank FD vs Corporate FD: जब भी निवेश की बात आती है, तो ज्यादातर लोग सबसे पहले फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तरफ देखते हैं। लेकिन अब निवेश की दुनिया बदल रही है। पहले जहां लोग सिर्फ बैंक FD को ही सुरक्षित विकल्प मानते थे, वहीं अब कॉरपोरेट FD यानी कंपनियों की ओर से जारी की गई फिक्स्ड डिपॉजिट भी लोगों को लुभा रही है। फर्क क्या है दोनों में? और किसमें पैसा लगाना समझदारी है? चलिए समझते हैं।
बैंक FD
बैंक FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट एक ऐसा निवेश है जिसमें आप तय समय के लिए पैसा जमा करते हैं और बैंक आपको तय ब्याज देता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यह RBI और DICGC की निगरानी में आता है। अगर बैंक डिफॉल्ट भी करे, तो ₹5 लाख तक की राशि बीमित रहती है। बैंक FD की ब्याज दरें आमतौर पर 6% से 7.5% के बीच होती हैं। साथ ही अब यह पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है, यानी आप घर बैठे FD खोल सकते हैं और जरूरत पड़ने पर समय से पहले तोड़ भी सकते हैं, हालांकि पेनल्टी लगती है।
कॉरपोरेट FD
दूसरी तरफ, कॉरपोरेट FD निजी कंपनियों या NBFCs की ओर से जारी की जाती हैं। ये कंपनियां अपने बिजनेस के लिए फंड जुटाने के लिए निवेशकों से पैसा लेती हैं और बदले में बैंक FD से 1%–1.5% ज्यादा ब्याज देती हैं। इनकी ब्याज दरें 7.5% से 9% या उससे ज्यादा तक जा सकती हैं। लेकिन इसमें कोई बीमा सुरक्षा नहीं होती यानी अगर कंपनी डिफॉल्ट करती है, तो आपका पैसा फंस सकता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी की क्रेडिट रेटिंग (जैसे AAA, AA) जरूर जांचनी चाहिए, जो CRISIL, ICRA जैसी एजेंसियां देती हैं।
किसमें कितना फायदा?
बैंक FD और कॉरपोरेट FD दोनों के अपने फायदे हैं। बैंक FD सुरक्षित होती है, तय रिटर्न देती है और जल्दी जरूरत पड़ने पर तोड़ी भी जा सकती है। वहीं कॉरपोरेट FD में ब्याज ज्यादा मिलता है, मासिक या त्रैमासिक भुगतान का विकल्प होता है और टेन्योर भी लचीले होते हैं।
निवेश का फॉर्मूला क्या हो?
अगर आप सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, तो बैंक FD आपके लिए बेहतर है। लेकिन अगर आप थोड़ा रिस्क लेकर ज्यादा कमाना चाहते हैं, तो कॉरपोरेट FD पर विचार कर सकते हैं, बशर्ते कंपनी की रेटिंग और बैकग्राउंड मजबूत हो।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।