Home Loan Reduction: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वर्ष 2025 में कई बार रेपो रेट में कटौती की है। सामान्य तौर पर इसका सीधा असर होम लोन ईएमआई पर पड़ना चाहिए। लेकिन हकीकत ये है कि अभी तक केवल कुछ ही बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) ने अपनी ब्याज दरों को घटाया है।
इसी वजह से रेपो रेट में कमी का पूरा लाभ देशवासियों तक नहीं पहुंच रहा है। हालांकि बैंकों का हाल देखते हुए RBI सभी बैंकों अपने ब्याज दरों को कम करने का आदेश दिया है। अगर इसके बावजूद भी आपकी लोन कंपनी या बैंक आपके होम लोन की ब्याज दरों में कमी नहीं कर रहे हैं, तो आपके पास कुछ विकल्प हैं।
क्या करें अगर दरें कम न हों?
- अपने बैंक या NBFC को लिखित में पूछें कि आखिर आपके लोन की ब्याज दरें क्यों नहीं घटाई गईं? आपके इस सवाल का बैंक या NBFC को जवाब देना होगा। अगर 30 दिन में जवाब न मिले, तो बैंकिंग लोकपाल या शिकायत अधिकारी के पास मामला ले जाएं।
- इसके अलावा आप बैंक को बताएं कि दूसरी जगह आपको कम ब्याज दर मिल रही है। अक्सर बैंक ग्राहक खोने से बचाने के लिए दरें घटा देते हैं। अगर उसके बाद भी बैंक आपकी नहीं सुनता है और दरें कम नहीं करता,तो उसे लोन किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करवा लें।
- इसके अलावा अगर आप नए ग्राहक हैं और बैंक अभी भी पुराने रेट पर लोन दे रहा है, तो आप अन्य किसी बैंक से लोन पास करवा सकते हैं।
बैंक क्यों नहीं घटाते हैं ब्याज दरें?
बैंक और NBFC दोनों अलग-अलग बेंचमार्क दरों जैसे MCLR, BPLR या RLLR से लोन जोड़ते हैं। इनकी वजह से ब्याज दरें घटने में देरी होती है। इसके अलावा, कई बार बैंक मार्जिन बढ़ा देते हैं। इस वजह से भी आपके लोन की ईएमआई कम नहीं होती है।