
Behavioral Gap in Investment: शेयर बाजार ने वर्ष 1991 के उदारीकरण के बाद से करीब 14% का चक्रवृद्धि रिटर्न दिया है, लेकिन यह सफर कभी भी आसान नहीं रहा है। हर साल, बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव आते हैं। निवेशकों के लिए असली चुनौती इन अस्थिरताओं के दौरान अनुशासित बने रहना है। दरअसल, भावनात्मक उतार-चढ़ाव ही वह मुख्य वजह है जिसके चलते निवेशक अक्सर ऊंचे दाम पर खरीदते हैं और कम दाम पर बेच देते हैं, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान होता है।
शेयर बाजार का ऊपर-नीचे होना एक सामान्य चक्र है, जिसे बदला नहीं जा सकता। निफ्टी आमतौर पर हर साल अपने शिखर से 10-20% तक गिरता है, वहीं मिड कैप में 15-20% और स्मॉल कैप में तो 25-30% तक की गिरावट आना आम बात है। भले ही दीर्घकालिक रिटर्न आकर्षक हों, लेकिन रास्ता ऊबड़-खाबड़ होता है। अगर आपने बाजार के शिखर पर पैसा लगाया है, तो गिरावट का भावनात्मक दर्द ज्यादा तीव्र हो सकता है। निफ्टी में करेक्शन होना असहज लगता है, जबकि स्मॉल-कैप में करेक्शन दर्दनाक हो सकता है।
निवेश की अधिकांश गलतियां ज्ञान की कमी से नहीं होतीं, बल्कि तब होती हैं जब निवेशक की भावनात्मक उथल-पुथल असहनीय हो जाती है और वह आवेग में गलत निर्णय ले लेता है। यही वजह है कि ऊंची खरीद और नीची बिक्री जैसा व्यवहार बहुत आम है। अस्थिरता के कारण होने वाली अशांति बाजार से नहीं, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव की हमारी अपनी व्याख्या से पैदा होती है। अगर हम हर गिरावट को खतरे के रूप में देखते हैं, तो हम भावनात्मक रूप से उस चक्र को और बड़ा कर देते हैं।
निवेश में भावनात्मक निर्णय लेने से बचने और अनुशासित रहने के लिए भावनाओं पर नियंत्रण जरूरी है। इसके लिए, आपको बार-बार भावनाओं में बहने से बचना होगा। यह गांठ बांध लीजिए कि अस्थिरता के आयाम जितने बड़े होंगे, स्थिर रहना उतना ही मुश्किल होगा। व्यवहार अंतर को कम करने के लिए दो चीजों का ध्यान रखना होगा।
1. अनुशासन के साथ मूल्यांकन की जागरूकता: सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) जैसे रुपये-लागत औसत (Rupee-Cost Averaging) तरीके बाजार के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है, लेकिन इक्विटी के लिए अनुशासन के साथ-साथ मूल्यांकन (Valuation) की समझ की एक अतिरिक्त परत जरूरी है। यदि आप बार-बार ओवरवैल्यूड सेक्टर्स या बिजनेस में एवरेजिंग करते हैं, तो मार्केट करेक्शन के दौरान आपका दिल बैठ जाएगा। अनुशासन आपको निवेशित रखता है, लेकिन वैल्यूएशन के प्रति जागरूकता आपको निवेशित रहते हुए सहज रखती है। जब ये दोनों एक साथ काम करते हैं, तो बिहैवियरल गैप खुद-ब-खुद कम हो जाता है।
2. बाजार को नहीं, खुद को शांत करें: निवेश की यात्रा को सुगम बनाने का मतलब बाजार को शांत करना नहीं, बल्कि खुद को शांत करना है। गिरावट की अनिवार्यता को स्वीकार करना और यह याद रखना कि अस्थिरता दीर्घकालिक रिटर्न के लिए एक प्रवेश शुल्क है, ये सब भावनात्मक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। जब तनाव कम होता है, तो आवेगपूर्ण कदम उठाने की इच्छा भी कम हो जाती है।
दो निवेशक एक ही गिरावट का अनुभव कर सकते हैं, लेकिन संभव है कि एक सहज रहे जबकि दूसरा आवेगपूर्ण कदम उठाने की मजबूरी महसूस करे। अंतर गिरावट में नहीं, बल्कि प्रतिक्रिया में निहित है। यदि हम इसे इक्विटी इन्वेस्टमेंट के एक सामान्य हिस्से के रूप में देखते हैं, तो उतार-चढ़ाव कम नाटकीय लगते हैं। यह बाजार नहीं बदला है, बल्कि बाजार के साथ हमारा संबंध बदल गया है।
मेट्रो स्टेशनों पर 'माइंड द गैप' वाक्यांश सुनाई देता है। निवेश में भी सलाह यही है- अंतर को कम करें क्योंकि व्यवहार के कारण आप जो भी पर्सेंटेज पॉइंट खोते हैं, वह एक ऐसा चक्रवृद्धि नुकसान है जिसकी आप कभी भरपाई नहीं पा पाएंगे।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निर्णय और उसके परिणाम के लिए तनिक भी उत्तरदायी नहीं है।
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