Best Mutual Funds: म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले ज्यादातर लोग सबसे पहले एक चीज चेक करते हैं- पिछले कुछ सालों का रिटर्न। भले ही पुराने रिटर्न आगे की कमाई की कोई गारंटी नहीं देते, लेकिन इससे एक आइडिया जरूर मिल जाता है कि फंड का परफॉर्मेंस कैसा रहा है और उसका मैनेजमेंट कितना मजबूत है। इसी वजह से मिड-कैप फंड्स हमेशा से निवेशकों की पसंद में रहे हैं क्योंकि ये ग्रोथ और रिस्क दोनों का बैलेंस बनाकर चलते हैं।
क्या होते हैं मिड-कैप फंड्स?
मिड-कैप फंड्स वे स्कीम्स होती हैं जो अपने पोर्टफोलियो का कम से कम 65% हिस्सा मिड-कैप कंपनियों में लगाती हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के मुताबिक मार्केट में कुल 31 मिड-कैप फंड्स मौजूद हैं और इनका कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब ₹4.54 लाख करोड़ है। यानी इस कैटेगरी में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
पिछले 5 सालों में धमाकेदार रिटर्न देने वाले मिड-कैप फंड्स
नए AMFI डेटा के हिसाब से कई मिड-कैप स्कीम्स ने पिछले पांच सालों में 25% से ज्यादा का सालाना रिटर्न दिया है।
25–30% CAGR का मतलब क्या है?
मान लीजिए आपने 5 साल पहले किसी मिड-कैप फंड में ₹1 लाख लगाए। अगर उस फंड ने हर साल औसतन 25% की रफ्तार (CAGR) से बढ़त दिखाई होती, तो आज आपकी रकम करीब ₹3,05,175 हो जाती। अब अगर यही रिटर्न 30% होता, तो निवेश बढ़कर लगभग ₹3.71 लाख तक पहुंच जाता। आसान भाषा में कहें तो लंबी अवधि में कम्पाउंडिंग अपना जादू दिखाती है और छोटी रकम भी समय के साथ काफी बढ़ सकती है।
सिर्फ रिटर्न देखकर निवेश न करें
बहुत से लोग सिर्फ भारी रिटर्न देखकर फंड में पैसा डाल देते हैं, लेकिन ये तरीका हमेशा सही नहीं होता। पैसा लगाने से पहले कुछ चीजें ध्यान में रखना जरूरी है, जैसे फंड हाउस की साख कैसी है, फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है, मार्केट का माहौल कैसा चल रहा है और आपका खुद का निवेश का समय कितने साल का है। ये सारी बातें मिलकर तय करती हैं कि आपका निवेश आगे चलकर कैसा प्रदर्शन करेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि मिंट के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करें।