
कल्पना कीजिए अपने BHIM ऐप पर दो मिनट में पेंशन खाता खुल जाए, और अगर आप कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के सदस्य हैं तो अपना पूरा जमा पैसा नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में शिफ्ट कर सकें। यह कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि भारत के पेंशन क्षेत्र में इसी दिशा में बड़ा काम चल रहा है।
नैशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) भीम सर्विसेज पेंशन फंड रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के साथ मिलकर भीम ऐप के जरिए एनपीएस डिस्ट्रीब्यूशन की तैयारी कर रही है। वहीं ईपीएफ से एनपीएस पोर्टेबिलिटी का विचार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। एचडीएफसी पेंशन के एमडी और सीईओ श्रीराम अय्यर इसे 'पेंशन उद्योग का गेम-चेंजरट बता रहे हैं।
NPCI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनपीसीआई भीम सर्विसेज, पीएफआरडीए के साथ मिलकर भीम ऐप के जरिए एनपीएस खाता खोलने की सुविधा देने की तैयारी में है। इसकी खासियत यह होगी कि भीम अकाउंट से जुड़े बैंक की पहले से मौजूद KYC का उपयोग किया जाएगा और एनपीएस अकाउंट खोलने के लिए अलग से कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं होगी। यह कदम पेंशन खाता खोलने को उतना ही आसान बना देगा जितना यूपीआई से पैसे भेजना होता है।
एनपीएस में योगदान पहले से ही भीएम, फोनपे जैसे यूपीआई ऐप्स के जरिए भारत कनेक्ट पैलेटफॉर्म के माध्यम से किया जा सकता है, लेकिन यह सुविधा केवल मौजूदा एनपीएस सदस्यों के लिए थी। नई पहल में नया खाता खोलने की प्रक्रिया को भी डिजिटल और त्वरित बनाया जाएगा।
भारत में संगठित क्षेत्र के अधिकांश कर्मचारी ईपीएफ में अनिवार्य रूप से जुड़े हैं, जबकि एनपीएस एक बाजार-आधारित पेंशन योजना है जो ज्यादा लचीलापन और संभावित रूप से बेहतर दीर्घकालिक रिटर्न देती है। अभी तक इन दोनों के बीच जमा राशि को सीधे शिफ्ट करने की कोई सरल व्यवस्था नहीं है। इसके लिए ईपीएफ एक्ट में संशोधन करना होगा।
HDFC पेंशन के सीईओ श्रीराम अय्यर के अनुसार, यदि ईपीएफ के सदस्यों को एनपीएस चुनने का विकल्प मिले या वे अपना EPF कॉर्पस NPS में ट्रांसफर कर सकें, तो यह पेंशन उद्योग को एक नए स्तर पर ले जाएगा। उनका मानना है कि इससे न केवल निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को फायदा होगा, बल्कि पेंशन फंड मैनेजर्स के लिए भी एक बड़ा अवसर खुलेगा।
एनपीएस अक्टूबर 2025 से मल्टि स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) लागू हो चुका है। इसके तहत निजी क्षेत्र के कर्मचारी और अपना रोजगार कर रहे लोग अब अपने पेंशन खाते में 100% तक इक्विटी में निवेश कर सकते हैं जबकि पहले यह सीमा 75% थी। इसका मतलब है कि युवा निवेशक लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ पेंशन बना सकते हैं।
इसके अलावा, एनपीएस खाता अब 60 साल की बजाय 85 साल की उम्र तक चालू रखा जा सकता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी निवेशित रहने का यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतर है जो रिटायरमेंट के बाद भी अपने पैसे को बाजार में बढ़ाते देखना चाहते हैं। साथ ही, 60% या 80% एकमुश्त राशि को जीवन-चरण-आधारित परिसंपत्ति मॉडल के तहत निवेशित रखा जा सकता है जिसमें 60 वर्ष की आयु पर 35% इक्विटी एक्सपोजर से शुरू होकर धीरे-धीरे यह 10% तक घटता है।
देश के सबसे बड़े निजी पेंशन फंड मैनेजर HDFC पेंशन फंड मैनेजमेंट की विकास यात्रा इन सुधारों की ताकत को दर्शाती है। मार्च 2022 में जहां कंपनी का AUM 28,414 करोड़ रुपये था, वह अब 1.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ग्राहक आधार भी 10 लाख से बढ़कर 30 लाख हो गया है। अगले तीन से चार वर्षों में कंपनी इसे 1 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
गिग वर्कर्स को पेंशन के दायरे में लाने की दिशा में कंपनी ने पहल शुरू कर दी है। अब तक 1.5 लाख जोमैटो डिलीवरी पार्टनर्स को एनपीएस से जोड़ा जा चुका है। पीओपी (Point of Presence) वितरण चैनल के जरिए कंपनी 5,000 कॉर्पोरेट्स को सेवा दे रही है और हर महीने लगभग 120 नए कॉर्पोरेट्स जोड़ रही है।
अगर आप EPF के सदस्य हैं तो अभी पोर्टेबिलिटी का इंतजार कीजिए क्योंकि यह अभी भी नीतिगत विचार के स्तर पर है और EPF अधिनियम में संशोधन की जरूरत होगी। लेकिन जब यह लागू होगा, तो आपके पास विकल्प होगा कि क्या आप EPF की सुनिश्चित ब्याज दर (फिलहाल 8.25%) के साथ बने रहना चाहते हैं, या NPS की बाजार-आधारित उच्च-रिटर्न संभावना वाली व्यवस्था में जाना चाहते हैं।
BHIM ऐप से NPS खाता खुलने की सुविधा जब पूरी तरह लागू होगी, तो उन करोड़ों लोगों के लिए पेंशन योजना तक पहुंच आसान हो जाएगी जो अभी तक बैंक या एजेंट के चक्कर लगाने से बचते रहे हैं। असंगठित क्षेत्र के कामगारों, छोटे व्यापारियों और गिग वर्कर्स के लिए यह एक बड़ा अवसर बन सकता है।
भारत में पेंशन को वास्तव में जन-जन तक पहुंचाने के लिए तकनीक और नीति दोनों एक साथ काम कर रही हैं। BHIM से खाता खुलना और EPF-NPS पोर्टेबिलिटी, ये दोनों मिलकर उस ढांचे को मजबूत करेंगे जहां हर नौकरीपेशा, हर गिग वर्कर, हर छोटा कारोबारी अपने बुढ़ापे के लिए सोच सके। लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब जागरूकता और वितरण नेटवर्क की खाई भर जाएगी जो अभी भी इस उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती है।
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