Bihar Health Schemes 2026: बिहार सरकार लोगों के स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन योजना में कैशलेस इलाज से लेकर, स्वास्थ्य से जुड़े कई कार्यक्रम और गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं को बेहतर इलाज की सुविधा देने के लिए भी कई स्कीम का संचालन हो रहा है। इनमें केंद्र सरकार की भी योजना शामिल हैं। अपने राज्य के 13 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को सरकार से द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही है। आइये जानते हैं बिहार में कितनी सरकारी योजनाएं चल रही हैं।
मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष / मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता योजना
बिहार सरकार की मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष योजना गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए शुरू की गई है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को ₹20 हजार से ₹5 लाख तक की वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाती है। इसमें कैंसर, हृदय रोग, किडनी ट्रांसप्लांट जैसी 14 असाध्य बीमारियां शामिल हैं। यह सहायता सीधे अस्पताल को दी जाती है। इससे मरीज पर बोझ नहीं पड़ता। बिहार के निवासी, जिनकी वार्षिक आय ₹2.50 लाख से कम है, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
जननी बाल सुरक्षा योजना
बिहार में जननी बाल सुरक्षा योजना चलाई जा रही है। इस योजना का मकसद मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। इस योजना के जरिए महिलाओं को अस्पतालों में डिलीवरी करने के लिए प्रेरित करना है। इसके लिए उन्हें आर्थिक सहायता भी दी जाती है। ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं को ₹14000 और आशा कार्यकर्ताओं को ₹600 दिए जाते हैं। वहीं शहरी इलाकों में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने पर ₹10000 और आशा कार्यकर्ताओं को ₹400 दिए जाते हैं।
मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना
यह आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के जैसे ही है लेकिन इस राज्य स्तर पर लागू किया गया है। इसमें ऐसे गरीब परिवार जो आयुष्मान योजना का लाभ नहीं ले सकते हैं वे इस योजना के जरिए ₹500000 तक का सालाना कैशलेस ट्रीटमेंट करवा सकते हैं। इसमे कई गंभीर बीमारियां जैसे हार्ट सर्जरी, कैंसर, न्यूरोसर्जरी और किडनी ट्रांसप्लांट आदि को शामिल किया गया है।
पात्र व्यक्ति आयुष्मान ऐप के जरिए या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए बिहार का मूल निवासी होना जरूरी है। इसके साथ ही लाभार्थी को राशन कार्ड, आधार कार्ड और इनकम सर्टिफिकेट भी जमा करना होता है।
मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य योजना
इस योजना का मकसद छात्राओं को मासिक धर्म से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधित, स्वच्छता आदि की जानकारी देना है। योजना के अंतर्गत कक्षा सातवीं से लेकर कक्षा 12वीं तक की सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राएं आती हैं। सरकार का मकसद मासिक धर्म की सही जानकारी देकर छात्राओं के स्कूल ड्रॉप को की संख्या कम करना है। सैनिटरी पैड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार सभी लाभार्थी छात्राओं के खातों में सालाना ₹300 भेजती है।