ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व इंजीनियर निशांत अग्रवाल के मामले में एक बड़ी खबर सामने आई है। हाई कोर्ट ने निशांत अग्रवाल पर लगे सभी आरोपों को रद्द कर दिया है। अग्रवाल को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से जासूसी गतिविधियों के लिए आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था। इस पर नागपुर जिला न्यायालय ने 14 साल के कठोर कारावास की सजा के साथ 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने अब निशांत अग्रवाल को बरी कर दिया है।
हाई कोर्ट ने जासूसी, देशद्रोह और संवेदनशील जानकारी लीक करने जैसे सभी प्रमुख आरोपों को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने सिर्फ एक मामले में अग्रवाल को गुनहगार माना कि उन्होंने सरकारी गोपनीय दस्तावेजों को निजी डिवाइस में रखकर OS Act की धारा 3(1)(C) का उल्लंघन किया था। इसके लिए निशांत को 3 साल की सजा सुनाई गई है। चूंकि अग्रवाल 3 साल जेल में बंद रह चुके हैं, इसलिए हाई कोर्ट की तरफ से सुनाई गई सजा की यह अवधि भी पूरी हो गई है। यानी, निशांत अपनी सजा भुगत चुके हैं और अब तुरंत रिहा हो सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
2018 में इस मामले ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी क्योंकि यह ब्रह्मोस एयरोस्पेस से जुड़ा जासूसी का पहला मामला था। अग्रवाल दो फेसबुक अकाउंट नेहा शर्मा और पूजा रंजन के जरिए संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के संपर्क में थे। इस्लामाबाद से चलाए जा रहे इन अकाउंट्स के बारे में माना जाता है कि इन्हें पाकिस्तान के खुफिया एजेंट चला रहे थे। ब्रह्मोस मिसाइल की जानकारी लीक करने के आरोप में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र एटीएस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने 2018 में नागपुर के पास से गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद निशांत अग्रवाल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनके खिलाफ आईटी एक्ट और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच एजेंसियों ने दावा किया कि उनके कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच की गई और पाया गया कि संवेदनशील डेटा ट्रांसफर किया गया था।
जानिए कौन हैं निशांत अग्रवाल?
निशांत अग्रवाल ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), रोपड़ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद वह ब्रह्मोस एयरोस्पेस में इंजीनियर के तौर पर काम करने लगे। उनकी विशेषज्ञता की वजह से उन्हें बहुत कम समय में ब्रह्मोस एयरोस्पेस में कई जरूरी पदों पर पदोन्नत किया गया और वो मिसाइल परियोजनाओं पर काम करने वाली टीम का एक जरूरी सदस्य बन गए।