Sovereign Gold Bond Tax Rules: सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) से जुड़े टैक्स छूट की व्यवस्था में बड़ा बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। आमतौर पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को टैक्स फ्री इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट माना जाता है, लेकिन सदन में प्रस्तावित नए बदलाव ने इस नजरिए को बदल दिया है।कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gain Tax) से मिलने वाली छूट अब हर किसी को नहीं मिलेगी। SGB के नियमों में यह बदलाव का सीधा असर निवेशकों के जेब पर पड़ेगा। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
अब केवल ऑरिजिनल इश्यू पर मिलेगी छूट
बजट दस्तावेज के मुताबिक, कैपिटल गेन छूट का फायदा केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगा, जिन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से बॉन्ड जारी किए जाते समय सीधे आवेदन किया था। इसका मतलब है कि अगर आपने ओरिजिनल इश्यू के दौरान बॉन्ड खरीदा है और उसे मैच्योरिटी (8 साल) तक अपने पास रखा है, तभी आपको मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।इस बदलाव का उन लोगों पर सीधा असर पड़ेगा, जो स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से दूसरों से बॉन्ड खरीदते थे।
सेकेंड्री मार्केट से क्यों बॉन्ड खरीदते थे निवेशक?
बता दें कि बहुत सारे निवेशक सस्ते के चक्कर में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को स्टॉक एक्सचेंज के खरीदते है और उन्हें यहां भी कैटिल गेन टैक्स में छूट का लाभ मिलता था। लेकिन बजट 2026 के नए प्रस्ताव ने बॉन्ड खरीदारी के इस माध्यम को पूरी तरह बंद कर दिया है। सरकार का कहना है कि अगर आपने किसी और से बॉन्ड को ट्रांसफर करवाया है या स्टॉक एक्सचेंज के जरिए खरीदा है, तो उसे ऑरिजनल सब्सक्रिप्शन नहीं माना जाएगा।
SGB के फ्री-रिडेम्पशन पर भी देना होगा टैक्स
सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के फ्री-रिडेम्पशन पर टैक्स में मिलने वाली छूट को भी टैक्स के दायरे में ला दिया है। नए प्रस्ताव के तहत अगर कोई निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी से पहले भुनाना चाहता है, तो उसे भी टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, SGB पर हर साल मिलने वाले 2.5% की ब्याज पर पहले से ही टैक्स लगता है।