Budget 2026: बजट से पहले इन शब्दों को जानें, पता चल जाएगा जेब कटेगी या भरेगी

Budget 2026: बजट भाषण सुनने के लिए वैसी भीड़ नहीं दिखती जैसे भारत-पाकिस्तान का मैच देखने के लिए उमड़ती है। इसका एक कारण ये भी है कि बजट में कई शब्द होते हैं, जो समझ में नहीं आते। ऐसे में हम आपको कुछ तकनीकी शब्दों के अर्थ बता रहे हैं। इससे आप भी बजट को आसानी से समझ सकते हैं।

Jitendra Singh
अपडेटेड1 Feb 2026, 08:57 AM IST
Budget 2026: बजट को समझना बेहद जरूरी है।
Budget 2026: बजट को समझना बेहद जरूरी है।

Budget 2026: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब कुछ ही देर में बजट 2026 पेश करने वाली हैं। देश में कई लोग बजट का इंतजार करते हैं। बजट भाषण सुनने के दौरान कई ऐसी चीजें होती हैं, जो समझ में नहीं आती हैं। बजट में इस्तेमाल होने वाले भारी भरकम शब्दों से बहुत से लोग उलझ जाते हैं। बजट को गहराई से समझने के लिए इसमें इस्तेमाल होने वाले शब्दों को समझना बेहद जरूरी है।

विनिवेश (Disinvestment)

अगर सरकार किसी पब्लिक सेक्टर अपनी हिस्सेदारी को निजी क्षेत्र में बेच देती है, तो उसे विनिवेश कहते हैं। सरकार अपनी हिस्सेदारी को शेयरों के जरिए बेचती है। यह हिस्सेदारी किसी एक व्यक्ति या किसी कंपनी को बेची जा सकती है।

बॉन्ड

जब केंद्र सरकार के पास पैसों की कमी हो जाती है, तो वो बाजार से पैसा जुटाने के लिए बांड जारी करती है। यह एक तरह का कर्ज होता है, जिसकी अदायगी पैसा मिलने के बाद सरकार द्वारा एक तय समय के अंदर की जाती है। बांड को कर्ज का सर्टिफिकेट भी कहते हैं।

यह भी पढ़ें | बजट 2026 से पूरी होगी करदाताओं की उम्मीद? इनकम टैक्स स्लैब, छूट और रिबेट पर नजर

बैलेंस ऑफ पेमेंट

केंद्र सरकार का राज्य सरकारों और विश्व के अन्य देशों में मौजूद सरकारों द्वारा जो भी वित्तीय लेनदेन होता है, उसे बजट भाषा में बैलेंस ऑफ पेमेंट कहा जाता है।

बैलेंस बजट

बैलेंस बजट तब होता है जब सरकार का खर्चा और कमाई दोनों ही बराबर होता है।

कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क)

जब किसी दूसरे देश से भारत में सामान आता है तो उस पर जो कर लगता है, उसे कस्टम ड्यूटी कहते हैं। इसे सीमा शुल्क भी कहा जाता है। यह शुल्क तब लगता है जैसे ही समुद्र या हवा के रास्ते भारत में सामान उतारा जाता है।

यह भी पढ़ें | आज पता चल जाएगा FM के बजट से किसे क्या मिलेगा

एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क)

एक्साइज ड्यूटी उन उत्पादों पर लगता है जो देश के भीतर लगते हैं। इसे उत्पाद शुल्क भी कहते हैं। यह शुल्क उत्पाद के बनने और उसकी खरीद पर लगता है। फिलहाल देश में दो प्रमुख उत्पाद हैं, जिनसे सरकार को सबसे ज्यादा कमाई होती है। पेट्रोल, डीजल और शराब इसके सबसे बढ़िया उदाहरण हैं।

राजकोषीय घाटा ( फिस्कल डिफिसेट)

सरकार की ओर से लिया जाने वाला अतिरिक्त कर्ज राजकोषीय घाटा कहलाता है। देखा जाए तो राजकोषीय घाटा घरेलू कर्ज पर बढ़ने वाला अतिरिक्त बोझ ही है। इससे सरकार आय और खर्च के अंतर को दूर करती है।

प्रत्यक्ष ककर (डायरेक्ट टैक्स)

प्रत्यक्ष कर वह कर होता है, जो व्यक्तियों और संगठनों की आमदनी पर लगाया जाता है, चाहे वह आमदनी किसी भी स्रोत से हुई हो। निवेश, वेतन, ब्याज, आयकर, कॉरपोरेट टैक्स आदि प्रत्यक्ष कर के तहत ही आते हैं।

अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स)

ग्राहकों द्वारा सामान खरीदने और सेवाओं का इस्तेमाल करने के दौरान उन पर लगाया जाने वाला टैक्स इनडायरेक्ट टैक्स कहलाता है। जीएसटी, कस्टम्स ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी आदि इनडायरेक्ट टैक्स के तहत ही आते हैं।

यह भी पढ़ें | 1 फरवरी को FM पेश करेंगी बजट, जानिए कब और कहां देखें लाइव

विकास दर (जीडीपी)

सकल घरेलू उत्पाद अर्थात जीडीपी एक वित्त वर्ष के दौरान देश के भीतर कुल वस्तुओं के उत्पादन और देश में दी जाने वाली सेवाओं का टोटल होता है।

शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट

36 महीने से कम समय के लिए रखे जाने वाले पूंजीगत एसेट्स को शार्ट टर्म कैपिटल असेट कहते हैं। वहीं शेयर, सिक्योरिटी और बांड आदि के मामले में यह अवधि 36 महीने की बजाय 12 महीने की है।

कैपिटल एसेट

जब कोई व्यक्ति बिजनेस या प्रोफेशनल किसी भी उद्देश्य से किसी चीज में निवेश करता है या खरीदारी करता है तो इस रकम से खरीदी गई प्रॉपर्टी कैपिटल एसेट कहलाती है। यह बांड, शेयर मार्केट और कच्चा माल में से कुछ भी हो सकता है।

कैपिटल गेन्स

पूंजीगत एसेट्स को बेचने या लेन-देने से होने वाला मुनाफा कैपिटल गेन्स कहलाता है।

कर निर्धारण साल (Assessment year)

यह कर निर्धारण साल होता है, जो किसी वित्तीय साल का अगला साल होता है। जैसे 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 अगर वित्तीय वर्ष है तो कर निर्धारण वर्ष 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक होगा।

आयकर छूट (Income Tax Exemption)

टैक्सपेयर्स की वह इनकम जो टैक्स के दायरे में नहीं आती। यानी जिस पर कोई टैक्स नहीं लगता।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़मनीBudget 2026: बजट से पहले इन शब्दों को जानें, पता चल जाएगा जेब कटेगी या भरेगी
More
बिजनेस न्यूज़मनीBudget 2026: बजट से पहले इन शब्दों को जानें, पता चल जाएगा जेब कटेगी या भरेगी