Budget 2026: अगर आप नौकरी करते हैं और अपने भविष्य के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) खाते में पैसा जमा करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। केंद्रीय बजट में प्रोविडेंट फंड ट्रस्ट के लिए इनकम टैक्स नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है। इस बदलाव का EPFO ने स्वागत किया है और कहा कि यह नियमों में तालमेल और सामंजस्य बिठाकर स्टेकहोल्डर्स के हितों की रक्षा करने में बहुत मददगार होगा।
दरअसल, बजट में उन 'प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों' के नियमों में सुधार का प्रस्ताव रखा गया है जिन्हें इनकम टैक्स नियम के तहत छूट मिलती थी। अब इन ट्रस्टों को पूरी तरह से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के बराबर लाया जाएगा। अभी तक समस्या यह थी कि प्राइवेट पीएफ ट्रस्टों को टैक्स छूट मिलने की शर्तों में इनकम टैक्स कानून और पीएफ एक्ट (1952) की धारा 17 के बीच एक बड़ा अंतर था।
बजट 2026 में कनफ्यूजन हुआ दूर
श्रम मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि केंद्रीय बजट (2026-2027) ने मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड को नियंत्रित करने वाले इनकम टैक्स फ्रेमवर्क को कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम (Miscellaneous Provisions Act), 1952 और कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 के वैधानिक और प्रशासनिक प्रावधानों के साथ अलाइन किया है।
बता दें कि पहले इनकम टैक्स के नियम और कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 में काफी फर्क था। खासकर प्राइवेट PF ट्रस्ट्स के लिए टैक्स छूट की पात्रता, निवेश के तरीके और एम्प्लॉयर के योगदान की सीमा अलग-अलग थी। इस वजह से कंपनियों और कर्मचारियों को काफी उलझन होती थी और कई बार अनावश्यक कानूनी झंझट भी बढ़ जाते थे।
छूट के नियम अब एक जैसे होंगे
बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, बजट में अब नियम ये हैं कि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की स्केड्यूल XI के तहत मान्यता पाने वाले प्रोविडेंट फंड्स (PF ट्रस्ट्स) को केवल तभी मान्यता मिलेगी जब उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट हासिल कर ली हो। धारा 17 के तहत कंपनियां मासिक EPF रिटर्न फाइल करने और कर्मचारियों के खातों को मेंटेन करने से छूट मांग सकती हैं। इसका मतलब है कि अब टैक्स छूट और कानूनी छूट एक ही आधार पर मिलेगी, जिससे दोहरी व्यवस्था खत्म हो जाएगी।
निवेश की अनिवार्य सीमा खत्म
अब एम्प्लॉयर का PF में योगदान सालाना 7.5 लाख रुपये तक सीमित रहेगा। इस सीमा तक का योगदान टैक्स-फ्री होगा, लेकिन इससे ज्यादा होने पर अतिरिक्त राशि पर टैक्स लगेगा और उसे परक्विजिट माना जाएगा। पहले योगदान पर कुछ प्रतिशत वाली सीमाएं और एम्प्लॉयी-एम्प्लॉयर के बराबर योगदान की शर्तें थीं, जो अब हटा दी गई हैं।
इससे साफ हो गया है कि अब ईपीएफ से जुड़ी छूट कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 से ही नियमित होगी। साथ ही, निवेश मानदंडों और नियोक्ता अंशदान की सीमाओं को भी आयकर अधिनियम के अनुरूप कर दिया गया है।