
Budget 2026 Expectations: इस बार के बजट में निवेशकों के लिए निवेश से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड ऑफ इंडिया (AMFI) ने यूनियन बजट FY 2026-27 के लिए 27 मांगें सरकार के सामने रखी हैं। इसमें नई टैक्स व्यवस्था के तहत ELSS में निवेश के लिए अलग डिडक्शन देने की मांग की गई है। डेट स्कीम के लिए लॉन्ग-टर्म इंडेक्सेशन बेनिफिट को फिर से शुरू करने की मांग की गई है। बता दें कि इसे बजट 2024 में वापस ले लिया गया था। MF स्कीम के तहत यूनिट्स की इंट्रा-स्कीम स्विचिंग के संबंध में टैक्स ट्रीटमेंट में समानता, और इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स की परिभाषा में बदलाव करके उसमें विदेशों में इक्विटी में निवेश करने वाले फंड ऑफ फंड्स को शामिल करना शामिल है।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, AMFI ने सरकार से मांग की है कि डेट म्यूचुअल फंड्स पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के साथ इंडेक्सेशन बेनिफिट को दोबारा शुरू किया जाए, जिसे बजट 2024 में हटा दिया गया था। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई निवेशक डेट फंड को 36 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड करता है तो उसे 12.5% टैक्स बिना इंडेक्सेशन या 20% टैक्स इंडेक्सेशन के साथ का ऑप्शन मिलना चाहिए।
AMFI का कहना है कि डेट फंड्स खासकर वरिष्ठ नागरिकों और रिटायर लोगों के लिए जरूरी इन्वेस्टमेंट ऑप्शन हैं, क्योंकि इनमें स्थिर रिटर्न और कम जोखिम होता है। इसके साथ ही मजबूत डेट मार्केट से सरकार और कंपनियों को फंड जुटाने में भी मदद मिलती है। AMFI ने मांग की है कि नए टैक्स रिजीम में भी ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) पर अलग से टैक्स डिडक्शन दिया जाए। इसका फायदा यह होगा कि ELSS एक आसान और सस्ता इन्वेस्टमेंट ऑप्शन बना रहेगा।
AMFI ने प्रस्ताव दिया है कि सभी म्यूचुअल फंड्स को म्यूचुअल फंड लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम (MFLRS) शुरू करने की मंजूरी दी जाए। इसमें मांग की गई है कि इसे NPS की तरह EEE टैक्स ट्रीटमेंट मिले। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के योगदान पर टैक्स छूट दी जाए। रिटायरमेंट के हिसाब से खास नियम तय किए जाएं। अभी टैक्स बेनिफिट सिर्फ NPS में मिलता है। AMFI का मानना है कि अगर म्यूचुअल फंड्स को भी यह सुविधा मिले, तो लोगों को रिटायरमेंट के लिए ज्यादा बचत करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
AMFI ने डेट लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (DLSS) शुरू करने की मांग की है, ताकि भारत के बॉन्ड मार्केट को मजबूत किया जा सके और निवेशकों को डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर अट्रैक्ट किया जा सके।
ELSS के नियम 3A में बदलाव की मांग की गई है, ताकि निवेश सिर्फ 500 रुपए के मल्टीपल में ही नहीं, बल्कि किसी भी अमाउंट में किया जा सके।
अभी इक्विटी (शेयर बाजार) से होने वाली 1.25 लाख रुपये तक की सालाना कमाई टैक्स फ्री है। AMFI का कहना है कि यह सीमा बहुत कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही, अगर कोई निवेशक 5 साल से ज्यादा समय तक म्यूचुअल फंड रखता है, तो उसे कैपिटल गेन्स टैक्स में अतिरिक्त राहत मिलनी चाहिए।
अभी जो 'फंड ऑफ फंड्स' 90% पैसा इक्विटी में लगाते हैं, उन पर भी डेट फंड की तरह टैक्स लगता है, जो नुकसानदेह है। AMFI ने मांग की है कि इन्हें भी 'इक्विटी फंड' माना जाए और उसी हिसाब से कम टैक्स लगाया जाए।
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