Budget 2026: हेल्थ सेक्टर में बड़ी चुनौती, क्या बढ़ेगा बजट? जानिए एक्सपर्ट की राय

Budget 2026 Expectations: 1 फरवरी 2025 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी। इसके पहले हर सेक्टर की अपनी- अपनी उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। भारत में हेल्थ सेक्टर भी कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सरकार हेल्थ बजट में इजाफा कर सकती है?

Jitendra Singh( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट.कॉम)
अपडेटेड26 Jan 2026, 11:01 AM IST
Budget 2026 Expectations: भारत में हेल्थ सेक्टर पर सरकारी खर्च बहुत कम है।
Budget 2026 Expectations: भारत में हेल्थ सेक्टर पर सरकारी खर्च बहुत कम है। (Livemint)

Budget 2026 Expectations: केंद्रीय बजट 2026-27 अब बस कुछ दिनों में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को रविवार के दिन लोकसभा में इसे पेश करेंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक बड़ा रिकॉर्ड है। इससे पहले मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा 10 बार बजट पेश किया था। इस बार बजट में उनके सामने कई अहम चुनौतियां होंगी, जिनमें मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और आम लोगों को रियायती दरों पर इलाज मुहैया कराना है।

विकसित देशों की तुलना में भारत सहित अधिकांश विकासशील देशों में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च अभी भी काफी कम है, जबकि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद होती हैं। इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के सेक्रेटरी जनरल सुदर्शन जैन ने कहा कि फार्मा सेक्टर डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ, सप्लाई चेन में रुकावट और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसी ग्लोबल चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में भारत की कॉम्पिटिटिव बढ़त को बनाए रखने और मज़बूत करने के लिए रणनीतिक सपोर्ट की ज्यादा जरूरत है।

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भारत में हेल्थ पर कितना होता है खर्च?

विश्व बैंक की 2022 की रिपोर्ट में अन्य देशों के मुकाबले भरत में हेल्थ पर खर्च बहुत कम होता है। अमेरिका अपनी जीडीपी का लगभग 17 से 18 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करता है, जो प्रति व्यक्ति करीब 12 से 13 हजार डॉलर है। हालांकि, वहां सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर है और निजी क्षेत्र पर निर्भरता ज्यादा है। जापान अपनी जीडीपी का 10 से 11 प्रतिशत मेडिकल सेक्टर पर खर्च करता है, जहां प्रति व्यक्ति खर्च 4,500 से 5,000 डॉलर तक है और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं काफी मजबूत मानी जाती हैं।

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पिछले बजटों की बात करें डिजिटल हेल्थ, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, घरेलू उत्पादन और सस्ती दवाओं पर सरकार का फोकस बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जो पिछले वर्ष से लगभग 11 प्रतिशत अधिक था। इसमें आयुष्मान भारत के विस्तार, कैंसर की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट, नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन व एम्स जैसे संस्थानों के लिए अतिरिक्त फंड का ऐलान किया गया था।

दुनिया में किस देश में मेडिकल पर कितना खर्च?

रूस स्वास्थ्य पर अपनी जीडीपी का करीब 5 से 6 प्रतिशत खर्च करता है, जहां प्रति व्यक्ति खर्च 800 से 1,000 डॉलर के बीच है, लेकिन वहां सेवाओं की गुणवत्ता में असमानता देखने को मिलती है। चीन ने पिछले एक दशक में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से निवेश बढ़ाया है और वह जीडीपी का 6 से 7 प्रतिशत मेडिकल सेक्टर पर खर्च करता है, जिससे प्रति व्यक्ति खर्च 700 से 900 डॉलर तक पहुंच जाता है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

रेनबो चिल्ड्रन्स मेडिकेयर के फाउंडिंग चेयरमैन डॉ. रमेश कंचरला ने कहा कि भारत में बच्चों के स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि बजट में बाल कल्याण का हिस्सा बढ़कर 2.29% हो गया है, लेकिन GDP में इसका हिस्सा घटकर 0.33% रह गया है। उन्होंने कहा, "इतनी बड़ी बच्चों की आबादी वाले देश के लिए यह बिल्कुल नाकाफी है। भारत को एक लंबा लक्ष्य तय करना चाहिए कि बच्चों पर होने वाला खर्च GDP के 5% तक बढ़ाया जाए और उस निवेश का एक बड़ा हिस्सा सीधे बच्चों की हेल्थकेयर में लगाया जाए।"

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