Budget 2026: सैलरी वालों से लेकर सीनियर सिटीजन तक… बजट 2026 पर टकटकी लगाए बैठा है हर कोई, क्या हैं उम्मीदें?

Budget 2026 Expectations: बजट 2026 से मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों को टैक्स स्लैब और डिडक्शन में राहत की उम्मीद है। शादीशुदा कपल्स के लिए संयुक्त टैक्सेशन, बुजुर्गों के लिए हेल्थ और सेविंग्स पर छूट, होमबायर्स और महिलाओं के लिए फायदे, एनआरआई और हाई अर्नर्स के लिए आसान नियम भी मांग में हैं।

Priya Shandilya
अपडेटेड28 Jan 2026, 10:11 PM IST
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट 2026 पेश करेंगी। (फाइल फोटो)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट 2026 पेश करेंगी। (फाइल फोटो)(HT)

Budget 2026 Expectations: 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट 2026-27 इस बार मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। पिछले साल नई टैक्स व्यवस्था में 12.75 लाख तक की आय टैक्स-फ्री कर दी गई थी। अब उम्मीद है कि इस बार टैक्स सिस्टम को और आसान और फायदेमंद बनाया जाएगा।

सैलरी वालों की सबसे बड़ी मांग

नौकरीपेशा वर्ग की सबसे पहली मांग बेसिक टैक्स-एक्सेम्प्शन लिमिट बढ़ाने को लेकर है, ताकि मध्यम वर्ग को सीधे फायदा मिल सके। इसके साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजूदा 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा करने की उम्मीद भी जोर पकड़ रही है। इससे सैलरी वालों को रोजमर्रा के खर्चों में सीधी बचत होगी। नई टैक्स व्यवस्था में जाने वाले टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि 30% वाला टैक्स स्लैब 30 लाख रुपये तक की आय पर लागू हो, ताकि सैलरी बढ़ने के बावजूद टैक्स का झटका न लगे।

पुरानी टैक्स व्यवस्था को लेकर असमंजस

पुरानी टैक्स व्यवस्था में रहने वाले लोग चाहते हैं कि सरकार इसके भविष्य को लेकर साफ संकेत दे। टैक्स एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर इसे अचानक खत्म किया गया, तो इंश्योरेंस, होम लोन और रिटायरमेंट प्लानिंग पर निर्भर लोगों को नुकसान हो सकता है। इसलिए धीरे-धीरे बदलाव या समानांतर राहत की उम्मीद की जा रही है।

शादीशुदा जोड़ों के लिए टैक्स में राहत का सवाल

कई सालों से जॉइंट टैक्सेशन (married couples के लिए संयुक्त टैक्स) की मांग उठती रही है। बजट 2026 से पहले यह मुद्दा फिर चर्चा में है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे सिंगल-इनकम और मिडिल-क्लास परिवारों का टैक्स बोझ कम हो सकता है, हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं माना जा रहा। फिर भी यह मांग बनी हुई है।

नई टैक्स व्यवस्था में कटौतियों को लेकर सबसे बड़ी मांग

कई टैक्सपेयर्स की यह भी मांग है कि नई टैक्स व्यवस्था में भी 80C, 80D और होम लोन ब्याज जैसी कटौतियों को किसी न किसी सीमित रूप में शामिल किया जाए। लोगों का कहना है कि कम टैक्स स्लैब जरूरी हैं, लेकिन अगर सेविंग्स, इंश्योरेंस और घर खरीदने पर कोई टैक्स फायदा न मिले, तो नई टैक्स व्यवस्था कई परिवारों के लिए अधूरी रह जाती है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि बजट 2026 में सरकार लोअर टैक्स रेट और बेसिक डिडक्शंस के बीच कोई बैलेंस बनाने की कोशिश करेगी।

LTCG टैक्स और निवेशकों की चिंता

इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को LTCG टैक्स में राहत की उम्मीद है। निवेशकों का मानना है कि इससे पोस्ट-टैक्स रिटर्न बेहतर होंगे और लॉन्ग-टर्म निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

रिटायरमेंट सेविंग्स पर नया फोकस

AMFI ने बजट 2026-27 में म्यूचुअल फंड-लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम लाने का सुझाव दिया है, जिसमें NPS जैसी टैक्स छूट मिले। मकसद है कि लोगों को रिटायरमेंट के लिए ज्यादा विकल्प मिलें और लॉन्ग-टर्म सेविंग्स मजबूत हों।

सीनियर सिटिजन्स क्या चाहते हैं?

वरिष्ठ नागरिक चाहते हैं कि टैक्स-फ्री इनकम लिमिट बढ़े, हेल्थ इंश्योरेंस पर ज्यादा छूट मिले और FD व स्मॉल सेविंग्स के ब्याज पर टैक्स राहत दी जाए। पेंशन और ब्याज आय वालों के लिए ITR फाइलिंग को आसान बनाना भी बड़ी मांग है।

होमबायर्स और महिलाओं की उम्मीदें

बढ़ती EMI के बीच होमबायर्स चाहते हैं कि सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन ब्याज पर छूट बढ़े। पहली बार घर खरीदने वालों और महिला होमबायर्स के लिए अतिरिक्त टैक्स फायदे भी चर्चा में हैं। महिला टैक्सपेयर्स के लिए वर्कफोर्स पार्टिसिपेशन बढ़ाने और लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को प्रोत्साहन देने वाली राहत की उम्मीद है।

ज्यादा कमाने वालों को राहत मिलेगी?

50 लाख से ज्यादा कमाने वालों पर अभी सरचार्ज और सेस का बोझ इतना है कि टैक्स लगभग 43% तक पहुंच जाता है। उम्मीद है कि सरकार पीक टैक्स रेट को 30% के करीब कैप कर सकती है ताकि प्रोफेशनल्स पर बोझ कम हो और भारत निवेश के लिए आकर्षक बने।

NRIs से लेकर रिटायरी तक, सबको चाहिए आसान टैक्स

चाहे NRI हों, सीनियर सिटिजन्स या रिटायर्ड टैक्सपेयर, सभी की एक ही मांग है- टैक्स सिस्टम सरल और अनुमान के लायक हो। आसान नियम, कम कन्फ्यूजन और स्थिर नीतियां टैक्स अनुपालन को भी बेहतर बनाएंगी।

सभी टैक्सपेयर्स की एक साझा मांग है कि आईटीआर फाइलिंग को और सरल बनाया जाए। कम नोटिस, तेज रिफंड, प्री-फिल्ड डेटा में सुधार और सरचार्ज व सेस को लेकर राहत इस बार की प्रमुख उम्मीदों में शामिल हैं।

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