
Budget 2026: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में कई बड़े ऐलान किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट के हिस्से के तौर पर डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इसका मकसद भारत के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करना और ज़रूरी मिनरल्स के इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करना है। अब दुर्लभ खनिज के क्षेत्र में भारत भी दुनिया से कदम से कदम मिलाकर चलेगा।
सरकार ने साफ किया है कि 2025-2026 के दौरान इस दिशा में कई बड़े और ठोस कदम उठाए गए हैं, ताकि भारत की मैन्युफैक्चरिंग, ईवी, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस जरूरतों को सुरक्षित किया जा सके। केंद्र सरकार उन राज्यों को समर्थन देगी जहां रेयर अर्थ मेटल मौजूद हैं। नवंबर 2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए स्कीम लॉन्च की गई थी।
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने के लिए सपोर्ट किया जाएगा। वित्त मंत्री के अनुसार, इस स्कीम के तहत रेयर अर्थ मिनरल्स की माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार है। ऐसे में इस कदम से चीन की दादागिरी खत्म होगी।
वहीं इस मामले में ऋषभ जैन, फेलो, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), ने कहा, "रेयर अर्थ कॉरिडोर' (Rare Earth Corridors) की घोषणा राष्ट्रीय नीतियों और नियामकीय सुधारों से हटकर स्थानीय मूल्य संवर्धन (local value add) के जरिए राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन की दिशा में एक अहम बदलाव है। यह 'राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन' (NCMM) और हालिया 'मैग्नेट विनिर्माण योजना' को तटीय राज्यों में जमीन पर उतारकर उन्हें आगे बढ़ाती है। खनिज संपन्न राज्यों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थापित करके, हम अपस्ट्रीम माइनिंग (खनन) और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) के बीच के अंतर को पाट रहे हैं।
रेयर अर्थ मेटल (Rare Earth Metals) 17 रासायनिक तत्वों का एक समूह है, जिसमें आवर्त सारणी (Periodic Table) के 15 लैंथेनाइड्स के साथ-साथ स्कैंडियम और इट्रियम शामिल हैं। हालांकि इनके नाम में ‘रेयर’ यानी दुर्लभ शब्द जुड़ा है, लेकिन असल में ये धरती की परत में काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें दुर्लभ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन्हें शुद्ध रूप में निकालना और अलग करना तकनीकी रूप से बहुत कठिन और खर्चीला होता है।
FM ने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने देश की सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विस्तार किया है। इसी आधार पर, सरकार उपकरण और सामग्री बनाने, फुल-स्टैक इंडियन IP विकसित करने और सप्लाई चेन को मज़बूत करने के लिए ISM 2.0 लॉन्च करेगी। इस बारे में डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), ने कहा, रेयर अर्थ कॉरिडोर (Rare Earth Corridors) और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा भारत को नीतिगत इरादों से आगे ले जाकर राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाता है। यह महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला की एक पुरानी कमी -'प्रसंस्करण' (processing)- को दूर करता है। इस बदलाव को ऑफटेक गारंटी, निरंतर अनुसंधान एवं विकास (R&D) और रणनीतिक साझेदारी के जरिए और अधिक सशक्त बनाया जाना चाहिए।
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