
बजट 2026-27 में सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सिर्फ पारंपरिक खेती के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पशुपालन, मत्स्य पालन और उच्च मूल्य वाले कृषि क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाते हुए कई नई पहलों का ऐलान किया है। संसद में बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण आय में विविधता लाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए खेती के बाहर भी रोजगार और कमाई के नए रास्ते खुल सकें। वित्त मंत्री के मुताबिक, पशुपालन अकेले ग्रामीण कृषि आय में करीब 16 पर्सेंट का योगदान देता है, जिसमें गरीब और सीमांत किसानों की बड़ी हिस्सेदारी है।
पशुपालन सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। बजट में 20 हजार से ज्यादा पशु-चिकित्सा पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ऋण-सम्बद्ध पूंजी सब्सिडी योजना का प्रस्ताव रखा गया है। इस योजना के तहत पशु चिकित्सा कॉलेज, अस्पताल, निजी क्लीनिक, डायग्नोस्टिक लैब और प्रजनन सुविधाओं की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा पशुपालन उद्यमिता के लिए भी नई ऋण-सम्बद्ध सब्सिडी योजना लाई जाएगी, जिससे डेयरी, पशुधन और पॉल्ट्री से जुड़ी एकीकृत मूल्य शृंखला का निर्माण और आधुनिकीकरण किया जा सके। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और किसानों की आय स्थिर होगी।
मत्स्य पालन के मोर्चे पर भी बजट में बड़ा ऐलान किया गया है। सरकार 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का समेकित विकास करेगी और तटीय क्षेत्रों में मूल्य शृंखला को मजबूत किया जाएगा। इसका मकसद स्टार्टअप्स, महिलाओं की अगुवाई वाले स्वयं सहायता समूहों और मछली पालक किसान संगठनों को सीधे बाजार से जोड़ना है। इससे मछुआरों को बेहतर दाम मिलेंगे और प्रोसेसिंग व मार्केटिंग से जुड़े नए रोजगार भी पैदा होंगे। तटीय किसानों के लिए नारियल संवर्धन योजना भी लाई जा रही है, जिसके तहत पुराने और गैर-उत्पादक नारियल के पेड़ों की जगह नई उन्नत किस्में लगाई जाएंगी। वित्त मंत्री ने बताया कि करीब एक करोड़ किसान और तीन करोड़ लोग नारियल से अपनी आजीविका चलाते हैं।
बजट में काजू, कोको और चंदन जैसे उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों पर भी खास ध्यान दिया गया है। सरकार भारतीय काजू और कोको कार्यक्रम के जरिए उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ 2030 तक इन्हें वैश्विक प्रीमियम ब्रांड बनाने की योजना पर काम करेगी। वहीं चंदन की खेती और उसके उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर भारत की पारंपरिक चंदन अर्थव्यवस्था को फिर से जीवित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में पुराने बागानों के पुनरुद्धार और अखरोट, बादाम व चिलगोजा जैसी उच्च-घनत्व खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजना लाई गई है, जिसमें युवाओं की भागीदारी और मूल्य संवर्धन पर खास जोर दिया जाएगा। कुल मिलाकर बजट 2026-27 गांवों में खेती के साथ-साथ नए रोजगार और आय के अवसर तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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