केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने गांव और ग्रामीण रोजगार पर फोकस किया गया है। इस बार बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए रोजगार योजनाओं पर बड़ा खर्च किया गया है। जहां मनरेगा को 30,000 करोड़ रुपये मिले हैं, वहीं इसकी जगह लेने वाली नई योजना G-RAM G के लिए सरकार ने 95,692 करोड़ रुपये का भारी बजट रखा है। इसका मतलब साफ है कि सरकार मनरेगा से अचानक बाहर नहीं निकलेगी, बल्कि धीरे-धीरे नई योजना की ओर शिफ्ट करेगी। आइए जानते हैं पूरी खबर को विस्तार से।
दोनों योजनाएं साथ-साथ चलेंगी
बजट में यह भी साफ किया गया है कि फिलहाल दोनों योजनाएं साथ-साथ चलेंगी। यानी मनरेगा भी जारी रहेगी और नई G-RAM G योजना भी। दोनों को मिलाकर ग्रामीण रोजगार पर सरकार का कुल खर्च 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। यह कुल बजटीय खर्च का करीब 2.4 पर्सेंट है। बीते चार सालों में ग्रामीण विकास से जुड़ा खर्च लगातार घटता जा रहा था, लेकिन इस बजट में तस्वीर बदली हुई दिखती है। ग्रामीण विकास का हिस्सा कुल बजट में बढ़कर 5.1 पर्सेंट हो गया है। यह पिछले साल 4.3 पर्सेंट था।
रोजगार योजनाओं में ज्यादा फंडिंग
असल में, कोरोना के बाद जैसे-जैसे हालात सामान्य हुए, सरकार ने ग्रामीण कल्याण योजनाओं पर खर्च कम करना शुरू कर दिया था। रोजगार की मांग भी पहले के मुकाबले थोड़ी स्थिर हो गई थी। लेकिन अब सरकार को लगता है कि गांवों में फिर से रोजगार और आय पर ध्यान देने की जरूरत है। इसी वजह से रोजगार योजनाओं में बदलाव और ज्यादा फंडिंग देखने को मिल रही है। हालांकि, खेती को लेकर तस्वीर ज्यादा नहीं बदली है। कृषि पर खर्च पिछले कुछ सालों से लगभग एक जैसा ही है और इस बार भी यह कुल बजट का करीब 3 पर्सेंट ही है।
सब्सिडी पर खर्च में लगातार कटौती
दूसरी तरफ सब्सिडी पर खर्च में लगातार कटौती हो रही है। 2022-23 में सब्सिडी का हिस्सा जहां 12.7 पर्सेंट था, वह अब घटकर 7.8 पर्सेंट रह गया है। इसकी वजह खाद और उर्वरक की कम जरूरत और ऊर्जा कीमतों का स्थिर रहना बताई जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य को थोड़ा ज्यादा पैसा जरूर मिला है, लेकिन कुल बजट में इनका हिस्सा अभी भी सीमित है। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 यह बताता है कि सरकार अब सीधी सब्सिडी देने के बजाय काम, रोजगार और आय के जरिए लोगों को सहारा देने की नीति पर आगे बढ़ रही है।