Income Tax Free: हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सैलरी स्लिप में CTC होता है। अगर यह 12 लाख पार कर जाता है तो माथा ठनकना लाजमी है। ऐसे में अब मान लेते हैं कि टैक्स देना तो तय है। कई बार तो यह सोचकर ही खुशी आधी रह जाती है कि मोटी सैलरी का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाएगा। लेकिन सच इससे थोड़ा अलग है। अगर आपकी सालाना आय ₹14 लाख तक है, तो नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत आप अपनी पूरी सैलरी को टैक्स-फ्री बना सकते हैं।
सरकार के नए टैक्स नियमों, स्टैण्डर्ड डिडक्शन और कुछ कानूनी छूटों ने इस रास्ते को आसान बना दिया है। यह कोई जुगाड़ या नियमों से बचने की चाल नहीं है, बल्कि वही सुविधाएं हैं जो खुद टैक्स सिस्टम में दी गई हैं। बस जरूरत है इन्हें सही तरीके से समझने और इस्तेमाल करने की।
EPF और NPS में निवेश कर बचाएं टैक्स
ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट CA शेफाली मुद्रा का कहना है कि न्यू टैक्स रिजीम में EPF और NPS में एम्प्लॉयर योगदान का सही इस्तेमाल करके पूरी टैक्स जिम्मेदारी जीरो किया जा सकता है। इसके लिए सैलरी स्ट्रक्चर कुछ ऐसा होना चाहिए। अभी के नियमों के अनुसार, एम्प्लॉयर का EPF में योगदान (बेसिक का 12%) और एम्प्लॉयर का NPS में योगदान (बेसिक का 14% निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए, Section 80CCD(2) के तहत डिडक्टेबल) टैक्स‑फ्री है।
इस ट्रिक को काम में लाने के लिए बेसिक सैलरी जरूरी है, क्योंकि EPF और NPS दोनों योगदान बेसिक सैलरी का प्रतिशत होते हैं। अगर CTC में बेसिक सैलरी का एक हिस्सा ठीक से रखा जाए और उसका कुछ हिस्सा EPF और NPS में रूट किया जाए, तो स्टैण्डर्ड डिडक्शन के साथ मिलाकर टैक्सेबल इनकम 12 लाख या उससे नीचे आ सकती है, जिससे पूरी Section 87A छूट मिल जाती है और टैक्स बिल जीरो हो जाता है।
Section 87A से टैक्स जीरो कैसे हो जाता है?
बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, शेफाली का कहना है कि चूंकि टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये से काफी कम है, इसलिए जो भी टैक्स कंप्यूट होता है, उसे Section 87A की छूट पूरी तरह ऑफसेट कर देती है। नतीजा यह होता है कि टैक्स बिल जीरो हो जाता है।
टैक्स बचत के साथ करोड़ों का फंड
यह प्लानिंग न केवल आज आपका टैक्स बचाती है, बल्कि बुढ़ापे के लिए एक बड़ा फंड भी तैयार करती है।
NPS का जादू
अगर 25 साल का युवा ₹10,000 महीना जमा करे (5% सालाना बढ़ोतरी के साथ) और 12% रिटर्न मिले, तो 60 की उम्र तक ₹8.62 करोड़ का फंड बन सकता है।
EPF की ताकत
इसी तरह ₹10,000 महीने के EPF निवेश पर 8.25% ब्याज के साथ लगभग ₹4.05 करोड़ जमा हो सकते हैं। इस फायदे को लेने के लिए आपकी कंपनी का EPFO और NPS दोनों में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। यदि आपकी कंपनी केवल EPF की सुविधा देती है, तो भी आप लगभग ₹13.56 लाख तक की सैलरी को टैक्स-फ्री रख सकते हैं।