केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना ‘वीबी-जी राम जी’ को लेकर सियासी बहस तेज है। विपक्ष इसे मनरेगा को खत्म करने की कोशिश बता रहा है, वहीं मोदी सरकार इसे ग्रामीण रोजगार और आजीविका का नया मॉडल बता रही है। इसी बीच बजट 2026-27 में सरकार ने इस योजना के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये का बड़ा आवंटन किया है। ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का काम देने का वादा किया गया है। सरकार का कहना है कि यह योजना दो दशक पुरानी मनरेगा की जगह लेगी और रोजगार के साथ आजीविका को भी मजबूती देगी।
मनरेगा फिलहाल बंद नहीं
हालांकि, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने साफ किया है कि मनरेगा फिलहाल बंद नहीं की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जब तक वीबी-जी राम जी पूरी तरह लागू नहीं हो जाती और मनरेगा के तहत चल रहे काम पूरे नहीं हो जाते, तब तक मनरेगा जारी रहेगी। बजट में मनरेगा के लिए अलग से 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। दस्तावेज बताते हैं कि 2025-26 के संशोधित अनुमान में मनरेगा पर कुल खर्च 88,000 करोड़ रुपये रहा था। जबकि शुरुआती आवंटन 86,000 करोड़ रुपये का था।
PM ग्राम सड़क योजना को 19000 करोड़
बजट 2026-27 में ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत कुल 1,94,368.81 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 1,86,995.61 करोड़ रुपये से ज्यादा है। भूमि संसाधन विभाग को 2,654.33 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि पिछले साल संशोधित अनुमान में खर्च इससे काफी कम रहा था। वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के लिए 19,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल के बराबर है, हालांकि वास्तविक खर्च 11,000 करोड़ रुपये ही हुआ था।
आवास योजनाओं में भी बजट बढ़ा
ग्रामीण आजीविका और आवास योजनाओं में भी बजट बढ़ाया गया है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 2026-27 में 19,200 करोड़ रुपये रखे गए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लिए 54,916.70 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। कुल मिलाकर, सरकार का दावा है कि वीबी-जी राम जी के जरिए ग्रामीण रोजगार को नए सिरे से मजबूत किया जाएगा।