Budget 2026: बजट में हुए ये बड़े ऐलान, टैक्सपेयर्स इन 10 बातों का रखें ध्यान

Budget 2026: नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा। इसमें ITR फाइलिंग की डेडलाइन अलग-अलग रखी गई हैं। सरकार का मकसद टैक्स फाइलिंग को आम टैक्सपेयर्स के लिए आसान बनाना है। ओवरसीज टूर पैकेज पर TCS कम किया गया है।

Jitendra Singh
अपडेटेड2 Feb 2026, 08:54 PM IST
Budget 2026: बजट में टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं।
Budget 2026: बजट में टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े बदलाव किए गए हैं।

Budget 2026: रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश कर दिया है। इसमें इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन नए इनकम टैक्स एक्ट और नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग की डेडलाइन जैसे कई बदलाव किए गए हैं। इस बदलाव का असर सभी टैक्सपेयर्स पर पड़ सकता है। बजट में बताया गया है कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। आइये जानते हैं क्या - क्या हुए नए बदलाव

1. इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

पुराने और नए दोनों टैक्स सिस्टम के तहत व्यक्तियों के लिए इनकम टैक्स स्लैब रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही एजुकेशन सेस और सरचार्ज में भी कोई बदलाव प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

2. नया इनकम टैक्स एक्ट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये भी कहा है कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2206 से लागू होगा। इसका मकसद टैक्स सिस्टम को ज्यादा आसान और समझने लायक बनाना है। सरकार जल्द ही इसके नियम और नए रिटर्न फॉर्म भी जारी करेगी ताकि टैक्सपेयर्स को किसी तरह की दिक्कत न हो।

3. ITR फाइलिंग की डेडलाइन अलग-अलग

इंडीविजुअल के लिए इनकम रिटर्न फाइलिंग की टाइमलाइन अब अलग-अलग कर दी गई है। ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वालों के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन बनी रहेगी। नॉन-ऑडिट बिज़नेस इनकम वाले व्यक्ति और ट्रस्ट अब 31 अगस्त तक अपना ITR फाइल कर सकते हैं।

4 . ओवरसीज टूर पैकेज पर TCS कम किया गया

विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए सरकार ने विदेशी टूर पैकेज पर TCS को घटाकर 2% कर दिया है। यह पहले 5% और 20% था। अब कोई न्यूनतम राशि की शर्त नहीं है। इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा बुकिंग पर पहले से कम टैक्स देना पड़ेगा। इसके अलावा, 10 लाख रुपये से ज़्यादा की सेल्फ-फाइनेंस्ड विदेशी शिक्षा और विदेश में मेडिकल इलाज पर TCS भी 5% से घटाकर 2% कर दिया जाएगा।

TCS क्या होता है?

TCS यानी Tax Collected at Source है। इसमें टैक्स काटा नहीं जाता, बल्कि बेचने वाला ग्राहक से टैक्स लेकर सरकार को देता है। जैसे अगर आप विदेश टूर पैकेज खरीदते हैं, स्क्रैप, शराब, कुछ मिनरल्स या बड़े लेन-देन वाले सामान खरीदते हैं, तो विक्रेता आपसे TCS वसूल करता है। यह टैक्स आपकी कुल इनकम का हिस्सा माना जाता है। बाद में इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय आप इस TCS को एडजस्ट कर सकते हैं या जरूरत हो तो रिफंड ले सकते हैं। TCS का मकसद बड़े खर्चों पर नजर रखना और टैक्स सिस्टम को ट्रैक करना है।

5. फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स – डिस्क्लोजर स्कीम

सरकार ने छात्रों, टेक प्रोफेशनल्स और विदेश में रहने वाले नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) जैसे छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक वन-टाइम विदेशी संपत्ति खुलासा योजना की घोषणा की। इसके लिए फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स – डिस्क्लोजर स्कीम (FAST–DS) लॉन्च की है। इस स्कीम में 6 महीने का समय मिलेगा। यह वन-टाइम स्कीम उन लोगों के लिए है जिन्होंने पहले विदेश से होने वाली इनकम और एसेट्स का खुलासा नहीं किया था। इसके साथ ही यह उन लोगों के लिए भी जिन्होंने इनकम तो बताई थी और टैक्स भी दिया था, लेकिन विदेशी एसेट्स का खुलासा नहीं कर पाए थे।

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इस स्कीम में आने वाले लोगों को दो कैटेगरी में बांटा गया है। एक वो जिन्होंने संपत्ति की कभी घोषणा इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं की। दूसरी कैटेगरी में वो लोग आएंगे, जिन्होंने आय पर टैक्स चुकाया, लेकिन शेड्यूल एफए में कुछ संपत्तियां नहीं बताईं। पहली कैटेगरी में संपत्ति की सीमा 1 करोड़ रुपये तक होगी। वहीं दूसरी सीमा 5 करोड़ रुपये तक होगी। पहली कैटेगरी में आने वालों को 60 फीसदी भुगतान (30 फीसदी टैक्स, 30 फीसदी जुर्माना) देना होगा। वहीं दूसरी कैटेगरी में एकमुश्त 1 करोड़ जुर्माना चुकाना होगा। दोनों ही कैटेगरी में जेल की सजा या मुकदमे से पूरी छूट मिलेगी। इस उपाय का मकसद वॉलंटरी कंप्लायंस का मौका देकर फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी और रेगुलेटरी कंप्लायंस को बेहतर बनाना है।

6. विदेशी छोटी संपत्तियों के खुलासे पर छूट

बजट में उन लोगों को राहत देने का फैसला लिया गया है, जो विदेश में मौजूद अपनी छोटी-मोटी संपत्ति की जानकारी टैक्स रिटर्न में भूलवश नहीं दे पाए थे। अगर किसी व्यक्ति की गैर-अचल विदेशी संपत्ति की कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है और वह उसका खुलासा नहीं करता है तो उस पर अब कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में सजा से छूट मिलेगी। यह नया नियम 1 अक्टूबर 2024 से लागू होगा. जिससे सीमित विदेशी एसेट्स रखने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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7. NRI के लिए प्रॉपर्टी बेचने का झंझट खत्म

पहले एनआरआई को प्रॉपर्टी बेचते समय TDS काटने और जमा करने के लिए एक खास नंबर TAN (Temporary Accounting Number) लेना पड़ता था। यह प्रक्रिया थोड़ी पेचीदा थी। अब सरकार ने इसे सरल बना दिया है। बजट 2026 के प्रस्ताव के अनुसार, अब प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीय खरीदार ही TDS काटेंगे और उसे अपने PAN वाले चालान के जरिए जमा कर देंगे। इससे एनआरआई को TAN लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनका काम आसान हो जाएगा।

8. छोटे टैक्सपेयर्स के लिए निल या कम TDS सर्टिफिकेट

अब मैनपावर सप्लाई को ठेकेदार (Contractor) की कैटेगरी में रखा गया है। इसका मतलब हुआ कि TDS सिर्फ 1% या 2% लगेगा। इसे प्रोफेशनल फीस मानकर ज्यादा TDS नहीं काटा जाएगा। छोटे टैक्सपेयर्स को Assessing Officer के पास आवेदन नहीं करना होगा। ऑनलाइन, ऑटोमेटेड सिस्टम से Low या Nil TDS सर्टिफिकेट मिल सकेगा। यानी कम डॉक्युमेंट, कम भागदौड़ होगी।

जानिए TDS क्या होता है?

TDS का फुल फॉर्म Tax Deducted at Source है। इसका मतलब है कि जब आपको कोई तय तरह की इनकम मिलती है, जैसे सैलरी, ब्याज, किराया, प्रोफेशनल फीस या कमीशन, तो पैसा देने वाला व्यक्ति या कंपनी पहले ही कुछ टैक्स काट लेती है। बाकी पैसा आपको देती है, जो टैक्स काटा जाता है, वह सरकार के पास जमा कर दिया जाता है। बाद में यही TDS आपकी इनकम टैक्स रिटर्न में एडजस्ट हो जाता है। अगर ज्यादा टैक्स कट गया हो, तो रिफंड मिल सकता है। TDS का मकसद टैक्स की समय पर वसूली और टैक्स चोरी को रोकना है।

9 . ऐसे एक्सपर्ट को टैक्स में छूट

ग्लोबल टैलेंट को आकर्षित करने के मकसद से, भारत आने वाले विशेषज्ञों को पांच साल तक की अवधि के लिए विदेशी आय पर छूट दी गई है। टैक्स छूट पाने के लिए, व्यक्ति पिछले पांच सालों से नॉन-रेज़िडेंट होना चाहिए, सरकार द्वारा नोटिफाइड स्कीम के तहत सर्विस देनी चाहिए और बताई गई दूसरी शर्तों को भी पूरा करना चाहिए।

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10. PROIs को PIS के तहत निवेश की अनुमति

सरकार ने पर्सन्स रेजिडेंट आउटसाइड इंडिया (PROIs) को पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम (PIS) के तहत भारतीय लिस्टेड कंपनियों के इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की अनुमति देने का फैसला किया है। इसमें इंडिविजुअल लिमिट 5% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है और PROIs के लिए कुल कैप 10% से बढ़ाकर 24% कर दी गई है। इसके साथ ही, व्यक्ति द्वारा इंटर-स्टेट अवॉर्ड्स पर इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील करने की शर्त को खत्म किया जाएगा।

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