Budget 2026: रियल एस्टेट सेक्टर को बजट में मिली उड़ान, REITs से खुलेंगे तरक्की के द्वार

Budget 2026 Real Estate: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कई अहम ऐलान किए हैं। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को 11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ किया है। इस बार छोटे शहरों पर फोकस बढ़ाया गया है।

Jitendra Singh
पब्लिश्ड2 Feb 2026, 11:38 AM IST
Budget 2026: रियल एस्टेट के लिए फंड में इजाफा किया गया है।
Budget 2026: रियल एस्टेट के लिए फंड में इजाफा किया गया है। (HT)

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को यूनियन बजट 2026-27 पेश कर दिया। इस बजट में सरकार की मुख्य हाउसिंग स्कीमों के लिए आवंटन तो बढ़ाया गया है, लेकिन किफायती हाउसिंग इंडस्ट्री की उम्मीदों पर यह खरा नहीं उतरा है। इसकी वजह ये है कि बड़े प्रस्तावों में सेक्टर-स्पेसिफिक कोई नई घोषणा नहीं की गई है। हालांकि बजट में सबसे खास घोषणा REITs (Real Estate Investment Trusts) के जरिए परिसंपत्तियों की रीसाइक्लिंग में तेजी लाने का प्रस्ताव है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए गए इस बजट में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर रिकॉर्ड 12.2 लाख करोड़ के खर्च और शहरी विकास के लिए रणनीतिक योजनाओं ने डेवलपर्स और निवेशकों के बीच जबरदस्त आत्मविश्वास पैदा किया है। बजट का मुख्य फोकस न केवल बड़े महानगरों बल्कि सोनीपत और इंदौर जैसे उभरते टियर-II शहरों को आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्रों में बदलने पर है, जिससे आने वाले समय में प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

निजी निवेश बढ़ाने पर फोकस

इस बार एक बड़ा कदम Infrastructure Risk Guarantee Fund की स्थापना का प्रस्ताव है। इसका मकसद बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को आंशिक गारंटी देना है ताकि बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निर्माण के दौरान जोखिम कम हो और निजी निवेश बढ़े।

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बाजार में आएगी नगदी

इस बजट की सबसे क्रांतिकारी घोषणाओं में से एक सरकारी संपत्तियों (CPSEs) को मॉनेटाइज़ करने के लिए विशेष रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) का गठन है। इसमें डेवलपर्स और सरकारी संस्थाओं को अपनी पुरानी या 'डेड' संपत्तियों को मॉनेटाइज करने की अनुमति मिलेगी। इससे प्राप्त धन को नए प्रोजेक्ट्स में फिर से निवेश किया जा सकेगा। ऐसे में बाजार में कैश फ्लो बढ़ेगा। साथ ही पारदर्शिता आएगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। एसेट रीसाइक्लिंग का यह तंत्र प्रोजेक्ट्स के बीच में फंड की कमी की समस्या को दूर करने में गेम-चेंजर साबित होगा।

छोटे शहरों पर बढ़ा सरकार का फोकस

सरकार का ध्यान अब महानगरों से हटकर टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ा है। इन कस्बों में बुनियादी ढांचे की मजबूती और पेशेवर संस्थानों को दी जाने वाली सहायता से एक 'कॉरपोरेट मित्र' वातावरण तैयार होगा। इन छोटे शहरों में व्यापार सुगम होगा।

जानिए एक्सपर्ट के रिएक्शन

रियल एस्टेट बॉडी नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) के प्रेसिडेंट, प्रवीण जैन का कहना है कि कैपेक्स बढ़ाने से टियर-2 और टियर-3 शहरों में रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी से विकास होगा। डेवलपर्स के लिए प्रस्तावित इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड डेवलपमेंट और कंस्ट्रक्शन चरणों के दौरान प्रोजेक्ट्स के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

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वहीं वीवीआईपी ग्रुप के एमडी विभोर त्यागी ने बजट में इन प्रस्तावों पर खुशी जताई है। विभोर त्यागी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड के प्रस्ताव से बैंकों और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। इसके साथ ही सीपीएसई की रियल एस्टेट संपत्तियों को रीट्स के जरिए तेजी से उपयोग में लाने से पारदर्शिता बढ़ेगी और संपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा। कुल मिलाकर, ये कदम देश में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर के लंबे समय के विकास में मजबूती मिलेगी।

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