वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी (रविवार) को केंद्रीय बजट 2026 पेश कर सकती हैं। यह उनके लिए एक बड़ा रिकॉर्ड होगा, क्योंकि यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। यह मोदी 3.0 सरकार का दूसरा पूर्ण बजट होगा। इससे पहले पहला पूर्ण बजट 2025 में पेश किया गया था।
पहले केंद्रीय बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता था। लेकिन 2017 में मोदी सरकार ने इसे बदलकर 1 फरवरी कर दिया, ताकि बजट को जल्दी मंजूरी मिले और नई योजनाएं समय पर लागू हो सकें।
बजट 2026 में सरकार के आर्थिक विकास को बनाए रखने के साथ-साथ मध्यम वर्ग को राहत देने पर जोर रहने की उम्मीद है, क्योंकि बढ़ते टैक्स और महंगाई से लोगों का घरेलू बजट दबाव में है।
बजट 2026 के साथ निर्मला सीतारमण पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएंगी, जिन्होंने 10 बार बजट पेश किया था। फरवरी 2024 का अंतरिम बजट भी मिलाकर वह पहले ही 8 बजट पेश कर चुकी हैं। अब वह एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लगातार 9 बजट पेश करने वाली एकमात्र वित्त मंत्री बन जाएंगी।
भारत के बजट का इतिहास
स्वतंत्र भारत का पहला बजट
भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था।
बजट पेश करने का समय
कई दशकों तक बजट फरवरी के आखिरी कार्यदिवस को शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह ब्रिटिश शासन की परंपरा थी, ताकि बजट की जानकारी लंदन के कामकाजी समय में पहुंच सके।
11 बजे की परंपरा
1999 में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट पेश करने का समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया। यह परंपरा आज भी जारी है।
1 फरवरी को बजट क्यों?
2017 में बजट की तारीख 28 फरवरी से बदलकर 1 फरवरी की गई, ताकि संसद से मंजूरी समय पर मिले और 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष की योजनाएं लागू हो सकें। पहले इसमें देरी हो जाती थी।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
डॉ. मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री रहते हुए 1991 से 1995 के बीच लगातार 5 बजट पेश किए। 1991 का बजट भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत के लिए ऐतिहासिक माना जाता है।