Budget 2026: सरकार के पास कहां से आता है 1 रुपया और कहां होता है खर्च? वित्त मंत्री ने दिया हिसाब

Budget 2026: हर साल जब बजट आता है, तो लोगों के मन में एक सवाल आता है कि सरकार के पास पैसा कहां से आता है। अब इसी सवाल का जवाब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दे दिया। आइए जानते हैं।  

Shivam Shukla
अपडेटेड1 Feb 2026, 03:54 PM IST
budget 2026
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Budget 2026: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया। इस बजट का कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड़ रुपये है। अब सवाल उठता है कि सरकार के पास इतना पैसा सरकार के पास कहां से आता है। आइए इसका जवाब जानते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट दस्तावेजों के अनुसार, सरकार की आमदनी का सबसे बड़ा हिस्सा उधार और अन्य देनदारियों से आता है। वहीं, खर्च के मोर्चे पर टैक्सों में राज्यों की हिस्सेदारी और कर्ज पर ब्याज भुगतान सबसे बड़ी मदें बनी हुई हैं।

सरकार के पास पैसा कहां से आता है?

बजट आंकड़ों के एनालिसिस से पता चलता है कि सरकार को मिलने वाले हर एक रुपये में उधार का योगदान सबसे ज्यादा है। सबको प्रति रुपया 24 पैसे का उधार का योगदान है। 'उधार और अन्य देनदारियों' के बाद प्रत्यक्ष करों का प्रमुख स्थान है। इसमें इनकम टैक्स से 21 पैसे और निगम कर से 18 पैसे मिलते हैं।

अप्रत्यक्ष करों में माल एवं सेवा कर (GST) और अन्य टैक्सों से 15 पैसे मिलते हैं। इसके अलावा, नॉन- टैक्स रेवेन्यू से 10 पैसे, केंद्रीय उत्पाद शुल्क से 6 पैसे, कस्टम ड्यूटी से 4 पैसे और गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों से दो पैसे सरकारी खजाने में आते हैं।

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सरकार पैसा कहां खर्च करती है?

अब फिर सवाल उठता है कि सरकार के पास ये रुपया आता है, लेकिन जाता कहां है? दरअसल, खर्च के मामले में हर एक रुपये में सबसे बड़ी योगदान यानी 22 पैसे टैक्सों और शुल्कों में राज्यों के हिस्से के रूप में आवंटित की जाती है। इसके बाद ब्याज भुगतान का स्थान आता है, जिस पर सरकार को 20 पैसे खर्च करने पड़ते हैं। केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए 17 पैसे और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए आठ पैसे का प्रावधान किया गया है। रक्षा क्षेत्र पर खर्च का हिस्सा 11 पैसे है।

वित्त आयोग और अन्य ट्रांसफर्स के लिए 7 पैसे और अन्य खर्चों की मद में भी 7 पैसे निर्धारित किए गए हैं। प्रमुख सब्सिडी पर सरकारी खर्च 6 पैसे रहता है, जबकि पेंशन के लिए दो पैसे खर्च किए जाते हैं। इन आंकड़ों से यह साफ है कि सरकार के पास मौजूदा कुल संसाधनों का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा केवल राज्यों को उनके टैक्सों के भुगतान और पिछले ऋणों पर ब्याज चुकाने में जाता है।

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