Subsidy Explained: बजट में पैसा घटा दिया, क्या अब सब्सिडी खत्म ही हो जाएगी? जानिए क्या बोले अधिकारी

Subsidy Explained: बजट में सब्सिडी के आंकड़े घटे जरूर हैं, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि फूड और फर्टिलाइजर सब्सिडी खत्म नहीं होगी। सुधार धीरे-धीरे होंगे और टेक्नोलॉजी के जरिए सब्सिडी को ज्यादा असरदार बनाया जाएगा।

Priya Shandilya
अपडेटेड6 Feb 2026, 02:40 PM IST
बजट में पैसा घटा दिया, क्या अब सब्सिडी खत्म ही हो जाएगी? जानिए क्या बोले अधिकारी
बजट में पैसा घटा दिया, क्या अब सब्सिडी खत्म ही हो जाएगी? जानिए क्या बोले अधिकारी

Subsidy Explained: हर साल बजट आते ही सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आम लोगों और किसानों को मिलने वाली सब्सिडी पर क्या असर पड़ेगा। इस बार भी जब सब्सिडी का खर्च घटा हुआ दिखा, तो लोगों में चिंता बढ़ गई कि कहीं ये सुविधा धीरे-धीरे खत्म तो नहीं हो जाएगी। लेकिन सरकार ने साफ किया है कि सब्सिडी अचानक बंद नहीं होगी, बल्कि धीरे-धीरे सुधार किए जाएंगे।

सब्सिडी अचानक खत्म नहीं होगी: सरकार

व्यय विभाग के सचिव (Expenditure Secretary) वी. वुअल्नाम ने बताया कि भारत जैसे देश में सब्सिडी आज भी कई अहम जरूरतें पूरी करती है। इसलिए इन्हें अचानक खत्म नहीं किया जा सकता। सरकार का इरादा सुधारों का है, लेकिन यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी, ताकि किसी वर्ग पर अचानक बोझ न पड़े।

क्यों जरूरी है फूड और फर्टिलाइजर सब्सिडी

लाइवमिंट से बातचीत में वी. वुअल्नाम ने कहा कि, फूड सब्सिडी देश के गरीब और कमजोर तबकों के लिए आज भी बेहद जरूरी है। अलग-अलग राज्यों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी। यही वजह है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 81 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है।

इसी तरह, फर्टिलाइजर सब्सिडी किसानों के लिए जरूरी है ताकि उन्हें खेती के लिए खाद आसानी से और सही दाम पर मिलती रहे।

टेक्नोलॉजी से सब्सिडी को बेहतर बनाने की तैयारी

सरकार अब सब्सिडी को खत्म करने की बजाय उसे ज्यादा असरदार बनाने पर जोर दे रही है। खर्च सचिव के मुताबिक, डेटा और टेक्नोलॉजी की मदद से खाद के इस्तेमाल को बेहतर किया जाएगा। कई इलाकों में जरूरत से ज्यादा खाद इस्तेमाल होने से मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, जिसे लेकर सरकार सतर्क है।

AgriStack और राज्यों के पायलट प्रोजेक्ट

सरकार AgriStack जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और हरियाणा व मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट्स के नतीजों से उत्साहित है। इनसे यह समझने में मदद मिली है कि कौन सा किसान कितना और किस तरह का फर्टिलाइजर इस्तेमाल कर रहा है। आगे चलकर इन कोशिशों को इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के डेटा से जोड़कर देशभर में लागू किया जाएगा।

आंकड़ों में कटौती, लेकिन नीति में नहीं

आने वाले वित्त वर्ष में फूड सब्सिडी का अनुमान 2.28 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो मौजूदा साल के मुकाबले थोड़ा कम है। फर्टिलाइजर सब्सिडी भी घटकर 1.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। हालांकि सरकार का कहना है कि बेहतर टारगेटिंग और प्लानिंग से कीमतों पर दबाव नहीं पड़ने दिया जाएगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च जारी रहेगा

सरकार का फोकस सिर्फ सब्सिडी पर नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बना हुआ है। हर साल करीब 10,000 किलोमीटर हाईवे, 3,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार और तेजी से बढ़ता मेट्रो नेटवर्क इसकी मिसाल है। भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बन गया है। शिपबिल्डिंग भी नए फोकस एरिया में शामिल है। बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए केंद्र स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम भी लागू है।

घाटा नहीं, अब कर्ज पर नजर

वित्तीय अनुशासन को लेकर सरकार अब सिर्फ फिस्कल डेफिसिट नहीं, बल्कि कर्ज-से-जीडीपी अनुपात पर भी ध्यान दे रही है। लक्ष्य है कि 2030-31 तक यह अनुपात करीब 50 फीसदी के आसपास रखा जाए।

सरकार ने साफ बताया है कि सब्सिडी अचानक खत्म नहीं होगी। धीरे-धीरे सुधार होंगे ताकि जरूरतमंदों को मदद मिलती रहे और देश की आर्थिक सेहत भी मजबूत बने। यानी सब्सिडी रहेगी, लेकिन ज्यादा समझदारी और तकनीक के साथ।

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