
Property Documents: प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लोग अपने जीवनभर की कमाई दांव पर लगा देते हैं। कड़ी मेहनत करने के बाद अपने सपने का घर बना पाना संभव हो पाता है। घर खरीदना एक बहुत ही पेचीदा काम होता है। एक छोटी-सी भी गलती आपके जीवन भर की कमाई डूबा सकती है। प्रॉपर्टी खरीदते हुए उसकी वैधता की सही जांच करना बहुत ही जरूरी हो जाता है। लिहाजा कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले हर तरह से जांच पड़ताल करना जरूरी है। आपकी एक छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है। कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं। इसके बाद फिर मजबूरी में कोर्ट-कचेहरी के चक्कर लगाना पड़ता है।
हर व्यक्ति को प्रॉपर्टी खरीदते हुए अपने लेवल पर कुछ पेपर्स जरूर चेक करने चाहिए। Taxbuddy ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है। जिसमें बताया गया है कि प्रॉपर्टी खरीदने से पहले कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स चेक करना चाहिए। आइए जानें, प्रॉपर्टी खरीदते हुए, कौन-से 7 पेपर जरूर चेक करने चाहिए?
केवल प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री आपके नाम होने से वह आपकी नहीं होगी। रजिस्ट्री से केवल मालिकाना हक ट्रांसफर होता है। ऐसे में प्रॉपर्टी लेते हुए टाइटल डीड और चेन डीड जरूर चेक करें। इससे पता लगेगा कि प्रॉपर्टी बेचने वाला शख्स उसका असली मालिक है या नहीं। चेन डीड से पता लगता है कि आपसे पहले वह प्रॉपर्टी किस-किस के पास रही है। बिना टाइटल डीड और चेन डीड के प्रॉपर्टी का सौदा ना करें।
आप जिस जमीन को खरीद रहे हैं, उसका रिकॉर्ड खंगालें। खेती की जमीन ले रहे हैं तो इसके डॉक्यूमेंट्स की जानकारी राज्य सरकार के राजस्व विभाग से मिल जाएगी। जमीन का खसरा नंबर पता करें। खसरा नंबर से आपको जमीन से जुड़ी सभी जानकारियां मिल जाएंगी। यदि आप घर बनाने के लिए जमीन खरीद रहे हैं तो पहले पता करें कि जहां जमीन खरीद रहे हैं वहां रेसिडेंशियल परमीशन है या नहीं। अगर प्रॉपर्टी कमर्शियल या इंडस्ट्रियल है तो वहां जमीन न खरीदें क्योंकि वहां आप घर नहीं बना सकेंगे।
किसी टाउनशिप में प्रॉपर्टी ले रहे हैं तो लैंड यूज चेक करें। देखें कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की परमीशन है या नहीं। लोकल अथॉरिटी जैसे नगर निगम से नक्शा पास है या नहीं। सबसे महत्वपूर्ण यह चेक करना कि जिस कॉलोनी में आप जमीन खरीद रहे हैं वो वैध है या नहीं। कई लोगों को लगता है कि सरकार ने रजिस्ट्री कर दी तो प्रॉपर्टी वैध ही होगी लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा नहीं होता। रजिस्ट्री करते समय सरकार सिर्फ रेवेन्यू की एंगल से जांच परख करती है। कोई प्रॉपर्टी वैध है या नहीं, यह जांचने की जिम्मेदारी प्रॉपर्टी खरीदने वाले व्यक्ति की ही होती है।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले अखबार में जाहिर सूचना जरूर देना चाहिए। अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन जाहिर सूचना देने से आपका पक्ष मजबूत होता है। ऐसे में प्रॉपर्टी को लेकर भविष्य में कभी कोई विवाद होता है तो आप कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रख सकते हैं। इसी तरह एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन करवाना भी जरूरी है। आज कल यह रजिस्ट्री के साथ ही कर दिया जाता है। बहुत से लोग एग्रीमेंट नहीं करवाते। ऐसा न करने पर कानूनी तौर पर आप कमजोर हो जाते हैं।
कोई भी प्रॉपर्टी लेते समय भार-मुक्त सर्टिफिकेट यानी Encumbrance Certificate की जांच जरूर कर लें। इससे आपको पता चलेगा कि प्रॉपर्टी पर किसी तरह का केस तो नहीं है। साथ ही इससे प्रॉपर्टी पर लिए गए कर्ज की भी जानकारी मिल सकती है।
ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) स्थानीय प्राधिकरण जारी करता है। इससे आपको जानकारी मिलेगी कि प्रॉपर्टी निर्माण नियम, कानून और अप्रूव्ड प्लान के हिसाब से ही किया गया है। ओसी के बिना किसी भी बिल्डिंग में रहना गैर कानूनी माना जाता है। इसके बिना बिजली और पानी का कनेक्शन भी नहीं मिलता।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले आपको प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें भी चेक कर लेनी चाहिए। इससे आपको पता लग जाएगा कि पुराने मालिक ने टैक्स चुकाया है या कुछ बकाया भी है।