Cabinet meeting: सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए देश में हवाई कनेक्टिविटी, इमिग्रेशन सिस्टम और पर्यावरण से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की बैठक में करीब ₹30,640 करोड़ के मेगा पैकेज पर सहमति बनी है। इसका सीधा असर आम लोगों की यात्रा, कारोबार और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ने वाला है।
उड़ान 2.0: छोटे शहरों को मिलेगी बड़ी उड़ान
सरकार ने रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) यानी 'उड़ान' को एक नया और आधुनिक रूप दिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो छोटे शहरों या पहाड़ी इलाकों में रहते हैं।
- 100 नए एयरपोर्ट: सरकार 'चैलेंज मोड' के तहत 100 नए एयरपोर्ट बनाएगी। हर एयरपोर्ट पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए 12,159 करोड़ रुपये का अलग से बजट रखा गया है।
- 200 मॉडर्न हेलीपैड्स: हिमालयी राज्यों, नॉर्थ-ईस्ट और द्वीपों के लिए 200 नए हेलीपैड्स बनाए जाएंगे। इसके लिए 3,661 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, ताकि दुर्गम इलाकों में भी आप मिनटों में पहुंच सकें।
- मेड-इन-इंडिया विमान: स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 400 करोड़ रुपये सिर्फ भारतीय विमानों को खरीदने के लिए रखे गए हैं।
एयरलाइंस को भी मिलेगा सपोर्ट
सरकार ने सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि एयरलाइंस को भी मदद देने का फैसला किया है। उड़ान योजना के तहत एयरलाइंस को 80 से 90 प्रतिशत तक आर्थिक सहायता दी जाएगी, जो धीरे-धीरे कम होती जाएगी। इसके लिए ₹10,043 करोड़ का प्रावधान किया गया है। साथ ही, नए एयरपोर्ट और हेलीपैड के रखरखाव के लिए भी अलग से फंड रखा गया है, ताकि शुरूआती सालों में संचालन में दिक्कत न आए।
इमिग्रेशन सिस्टम होगा हाईटेक
अगर आप विदेश यात्रा करते हैं, तो एयरपोर्ट पर लंबी लाइनों और कागजी कार्यवाही से जल्द ही छुटकारा मिलने वाला है। सरकार ने IVFRT (Immigration, Visa, Foreigners Registration and Tracking) स्कीम को 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। इसके लिए ₹1,800 करोड़ का बजट रखा गया है।
- इमिग्रेशन चेक पोस्ट पर अब AI/ML टूल्स, आइरिस स्कैनिंग (आंखों की स्कैनिंग) और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल होगा।
- अब आपको लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। स्मार्ट कैमरे और सेल्फ-सर्विस कियोस्क से पैसेंजर्स का क्लीयरेंस बहुत तेजी से होगा। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि देश की सुरक्षा भी मजबूत होगी।
पर्यावरण को लेकर भी बड़ा लक्ष्य
भारत ने दुनिया के सामने अपनी नई जलवायु प्रतिबद्धताएं (NDC) रखी हैं। 2031 से 2035 के बीच भारत का लक्ष्य है कि:
- कम प्रदूषण: 2005 के मुकाबले जीडीपी की 'एमिशन इंटेंसिटी' को 47% तक कम किया जाएगा।
- क्लीन एनर्जी: हमारी कुल बिजली क्षमता का 60% हिस्सा सोलर, विंड या अन्य नॉन-फॉसिल सोर्सेज से आएगा।
- हरियाली: पेड़ों और जंगलों के जरिए 3.5 से 4 बिलियन टन कार्बन सोखने का लक्ष्य रखा गया है।
देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
इन फैसलों का असर सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन बढ़ेगा, व्यापार को गति मिलेगी और नए रोजगार के अवसर बनेंगे। साथ ही, आसान और तेज इमिग्रेशन प्रक्रिया से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, जिससे होटल, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर को भी फायदा मिलेगा।
सरकार का यह पूरा प्लान देश को इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी के मामले में आगे ले जाने की कोशिश है। अगर ये योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले समय में आम लोगों की यात्रा आसान होगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।