Life Insurance: तीन साल प्रीमियम भर दिया तो क्या लाइफ इंश्योरेंस के क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती है कोई कंपनी?

Life Insurance: तीन साल तक प्रीमियम भरने के बाद क्या आपका लाइफ इंश्योरेंस क्लेम पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है? बीमा कानून की धारा 45 कुछ ऐसा कहती है जो हर पॉलिसीधारक को जानना चाहिए। जानें लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के पहले तीन साल में क्या होता है, और बाद में क्या बदलता है।

Priya Shandilya
अपडेटेड29 Aug 2025, 05:23 PM IST
तीन साल प्रीमियम भरने के बाद क्या इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट नहीं हो सकता? जानिए कानून क्या कहता है
तीन साल प्रीमियम भरने के बाद क्या इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट नहीं हो सकता? जानिए कानून क्या कहता है(iStock)

Life Insurance Claim: लाइफ इंश्योरेंस सिर्फ पैसे जमा करने का तरीका नहीं है, बल्कि ये आपके और आपके परिवार की वित्तीय सुरक्षा का एक मजबूत साधन है। लेकिन जब बात आती है क्लेम की, तो लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं। एक आम सवाल ये होता है कि अगर हमने तीन साल तक लगातार प्रीमियम भर दिया है, तो क्या बीमा कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है? खासकर टर्म इंश्योरेंस जैसे प्लान में, जहां बीमा राशि बड़ी होती है, यह सवाल और भी अहम हो जाता है।

क्या कहता है बीमा कानून?

इसका जवाब मिलता है बीमा कानून (संशोधन) अधिनियम 2015 की धारा 45 में। इसके अनुसार, अगर कोई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी तीन साल तक लगातार चालू रही है, तो उसके बाद बीमा कंपनी उस पॉलिसी को किसी भी वजह से चुनौती नहीं दे सकती।

पॉलिसीबाजार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीमा कानून 1938 में हुए संशोधन के बाद यह प्रावधान लागू हुआ। कोई भी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को तीन साल पूरे होने के बाद चुनौती नहीं दी जा सकती।

तीन साल की गिनती कब से होती है?

यह अवधि पॉलिसी शुरू होने, जोखिम शुरू होने, दोबारा चालू होने (reinstatement) या किसी rider के जुड़ने की तारीख से गिनी जाती है, जो भी सबसे बाद में हुआ हो। इस तीन साल की अवधि को Contestability Period कहा जाता है। इस दौरान अगर बीमा कंपनी को लगे कि पॉलिसी लेते समय कोई जरूरी जानकारी छुपाई गई थी या गलत दी गई थी, तो वह क्लेम की जांच कर सकती है और जरूरत पड़ने पर उसे रिजेक्ट भी कर सकती है।

सेक्शन 45 की खास बातें

तीन साल पूरे होने के बाद बीमा कंपनी किसी भी आधार पर चाहे वो गलत जानकारी हो या कोई बात छुपाई गई हो, पॉलिसी को चुनौती नहीं दे सकती। पहले तीन साल में कंपनी को यह अधिकार होता है कि वह पॉलिसीधारक की दी गई जानकारी की जांच करे और अगर कोई गड़बड़ी मिले, तो क्लेम को रिजेक्ट कर सकती है। लेकिन तीन साल बाद क्लेम को नकारना तभी संभव है जब कंपनी यह साबित कर दे कि जानबूझकर धोखाधड़ी की गई थी, जो कानूनन काफी मुश्किल होता है।

पहले तीन साल में क्या हो सकता है?

धारा 45 के अनुसार, पहले तीन साल के भीतर अगर बीमा कंपनी को लगता है कि पॉलिसीधारक ने कोई जरूरी जानकारी छुपाई है या गलत जानकारी दी है, तो वह क्लेम को रिजेक्ट कर सकती है। इस दौरान धोखाधड़ी या तथ्य छुपाने के आधार पर क्लेम रोका जा सकता है।

अगर क्लेम रिजेक्ट हो गया तो क्या प्रीमियम वापस मिलेगा?

पहले तीन साल में अगर क्लेम रिजेक्ट हुआ और धोखाधड़ी नहीं पाई गई, तो कंपनी प्रीमियम वापस कर सकती है। लेकिन धोखाधड़ी साबित होने पर प्रीमियम भी जब्त हो सकता है।

इसलिए बीमा पॉलिसी लेना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसकी शर्तों को समझना। तीन साल तक लगातार प्रीमियम भरने के बाद आपका क्लेम सुरक्षित माना जाता है। लेकिन पहले तीन साल में पूरी जानकारी सही देना बेहद जरूरी है। सही जानकारी और समय पर भुगतान से आप अपने परिवार को वित्तीय सुरक्षा दे सकते हैं।

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