
भारत में दिवाली सबसे बड़े शॉपिंग त्योहारों में से एक है। इस समय लोग कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना और अन्य चीजें खरीदने में खूब खर्च करते हैं। इस साल त्योहारी सीजन में एक अतिरिक्त फायदा भी है और वो ये कि सरकार ने 22 सितंबर से वस्तु एवं सेवा कर में कटौती की है। इससे लोगों की खरीदारी बढ़ी है और व्यापारी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई ऑफर और डिस्काउंट दे रहे हैं।
लेकिन जब खर्च बढ़ता है, तो लोग यह भी सोचते हैं कि क्या दिवाली के खर्चों पर कोई टैक्स में राहत मिल सकती है। आम तौर पर त्योहारों में की गई खरीदारी पर आपको टैक्स में कोई छूट नहीं मिलती, लेकिन कुछ मामलों में टैक्स लाभ मिल सकते हैं।
त्योहारी खरीदारी जैसे कपड़े, मिठाइयां, तोहफे या सजावट के सामान को व्यक्तिगत खर्च माना जाता है। इन पर कोई टैक्स छूट नहीं दी जाती। हालांकि, सरकार कुछ गिफ्ट पर टैक्स में राहत देती है। उपहार नकद, चेक या ड्राफ्ट के रूप में हो सकते हैं।
आयकर अधिनियम की धारा 56 के तहत, रिश्तेदारों से मिले उपहार पर टैक्स नहीं लगता। रिश्तेदारों में पति या पत्नी, भाई-बहन, जीवनसाथी के भाई-बहन, माता-पिता के भाई-बहन, औ जैसे माता-पिता, दादा-दादी, बच्चे, पोते-पोतियां शामिल हैं। इनके जीवनसाथी भी इस श्रेणी में आते हैं। लेकिन अगर उपहार किसी गैर-रिश्तेदार से मिलता है, तो उस पर टैक्स लग सकता है।
अगर किसी वित्तीय वर्ष में किसी व्यक्ति को गैर-रिश्तेदारों से बिना किसी कारण (यानी मुफ्त में) 50,000 रुपये से ज़्यादा की राशि मिलती है, तो वह पूरी राशि टैक्स योग्य मानी जाती है।
स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) को किसी वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपये से अधिक का नकद या उपहार मिलता है, तो पूरी राशि पर टैक्स देना पड़ता है।
आयकर विभाग के अनुसार, “जैसे ही उपहार की कुल राशि 50,000 रुपये से अधिक हो जाती है, उस वर्ष मिले सभी उपहारों की कुल राशि टैक्स के दायरे में आ जाती है।”
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