
केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 8वें वेतन आयोग की शर्तों में संशोधन करने की मांग की है। इस कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की है। केंद्रीय कर्मचारियों की दलील है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने से लाखों मौजूदा कर्मचारियों और पेंशन भोगियों की पेंशन सुनिश्चिच होगी। कर्मचारी संगठन कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के लिए 20 प्रतिशत अंतरिम राहत की मांग कर रहे हैं।
केंद्र सरकार की तरफ से 8वें वेतन आयोग की शर्तों की घोषणा के बाद केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। जिसमें 8वें वेतन आयोग के सदस्यों से नियम और शर्तों में सुधार की मांग की है। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ज्वाइंट सलाहकार समिति की राष्ट्रीय परिषद ने पीएम मोदी को लिखे एक पत्र में ये मांग की है।
केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने पीएम मोदी, वित्तमंत्री निर्मला सीतारण और NC JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा को लिखे पत्र में उन्होंने कई सुझाव दिए हैं।
- संशोधन सशस्त्र बलों के कर्मियों सहित वर्तमान और सेवानिवृत्त केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के बड़े हित में काम करेंगे।
- मौजूदा पेंशनभोगियों के लिए पेंशन संशोधन को शामिल किया जाए।
- NPS के तहत आने वाले 26 लाख कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को बहाल किया जाए।
- गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की अनफंडेड लागत वाक्यांश को हटाया जाए।
- 8वें वेतन आयोग के 1 जनवरी, 2026 से लागू करने की घोषणा की जाए।
- 8वें वेतन आयोग के गठन में देरी के कारण कर्मचारियों और पेंशन भोगियों को 20 प्रतिशत अंतरिम राहत दिया जाए।
कर्मचारी निकाय ने लिखा है कि
कर्मचारी संगठनों ने पीएम से 8वें वेतन आयोग की ToR में इसी तरह का खंड शामिल करने की अपील की है, ताकि 2026 से पहले रिटायर होने वालों के लिए पेंशन संशोधन पर भी विचार किया जाए।
केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग में जिन बदलावों को लागू करने की मांग की है उनमें कम्यूटेशन की बहाली 15 की जगह 11 साल बाद करना शामिल है। रिटायरमेंट के बाद 5 साल में 5 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन दिए जाने की भी मांग की है ताकि सभी पेंशनभोगियों को इसका लाभ मिल सके।
NC JCM ने 8वें वेतन आयोग से 1 जनवरी, 2004 या उसके बाद भर्ती हुए 26 लाख कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि ये लंबे समय से चली आ रही और न्यायसंगत मांग उनके रिटायरमेंट के बाद की सुरक्षा और सामाजिक गरिमा के लिए चिंता को दर्शाती है। इस मामले को 8वें वेतन आयोग की ToR के दायरे में लाए जाने की मांग की गई है।
NC JCM का कहना है कि 8वें वेतन आयोग की ToR के पैरा (E)(ii) में गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की अनफंडेड लागत को 8वें वेतन आयोग में अनुचित बताया गया है। संगठनों ने इस शब्द को हटाने का प्रस्ताव दिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ऐसा संशोधन सरकार को दी गई पिछली प्रतिबद्ध और समर्पित सेवा के लिए पेंशनभोगियों के समुदाय की गरिमा, उनके अधिकारों और मान्यता की पुष्टि करेगा।
NC JCM ने कहा कि 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी, 2026 से लागू किए जाने की सिफारिश की है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि ToR में 8वें वेतन आयोग के प्रभाव में आने की तारीख गायब है। इससे कर्मचारियों के मन में आशंका पैदा हो रही हैं। वेतन संशोधन, भत्ता संशोधन और पेंशन संशोधन पर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी करने की मांग की गई है। 1 जनवरी 2026 की तारीख को ToR में स्पष्ट रूप से शामिल किए जाने की मांग की गई है।
NC JCM ने कहा कि बढ़ती महंगाई दर के कारण, वे 8वें वेतन आयोग द्वारा अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने तक मूल वेतन और पेंशन में 20 प्रतिशत अंतरिम वृद्धि चाहते हैं। पत्र में कहा गया है के ये उपाय तत्काल राहत देगा और अपने सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रति सरकार की निरंतर सहानुभूति प्रदर्शित करेगा।
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