
Provident Fund Account: नौकरी बदलते समय अक्सर कंपनियां कर्मचारी के लिए नया प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ खाता खोल देती हैं। कई वर्षों तक अलग अलग कंपनियों में काम करने के बाद स्थिति यह बन जाती है कि किसी व्यक्ति के कई पीएफ खाते हो जाते हैं। ऐसे में सभी खातों की जानकारी रखना और उनमें जमा रकम को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है। कई बार पुराने अकाउंट इनएक्टिव भी हो जाते हैं, जिन पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगने की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में इन सभी अकाउंट को ऑनलाइन मर्ज कर सकते हैं।
ये अकाउंट अपने आप मर्ज नहीं होते हैं, और कर्मचारियों को Employees Provident Fund Organisation (EPFO) से पुराने अकाउंट का बैलेंस मौजूदा एक्टिव अकाउंट में ट्रांसफर करने का अनुरोध करना पड़ता है। अपने PF अकाउंट को एक जगह इकट्ठा करने से यह पक्का होता है कि आपकी रिटायरमेंट की सारी बचत एक ही जगह पर रहे। इससे निष्क्रिय अकाउंट, पैसे निकालने में देरी, या योगदान को ट्रैक करने में मुश्किल का सामाना नहीं करना पड़ेगा।
EPF एक सरकारी सेविंग स्कीम है जिसका मकसद सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देना है। EPFO द्वारा नियंत्रित इस योजना के तहत, कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों ही कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 फीसदी हिस्सा EPF में योगदान करते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF की ब्याज दर 8.25 फीसदी प्रति वर्ष है, जो 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच किए गए सभी योगदानों पर लागू होती है। इसकी गणना हर महीने EPF अकाउंट के क्लोजिंग बैलेंस पर की जाती है, लेकिन इसे वित्त वर्ष के आखिर में सालाना जमा किया जाता है। इस पर मिलने वाला ब्याज आम तौर पर टैक्स-फ्री होता है।
पीएफ प्रबंधन को आसान बनाने के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन की व्यवस्था की गई है। यह 12 अंकों का एक विशेष नंबर होता है जिसे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन जारी करता है। यह नंबर कर्मचारी के पूरे कार्यकाल के दौरान वही रहता है। किसी भी कर्मचारी के अलग अलग नियोक्ताओं के तहत बने सभी पीएफ खाते इसी यूएएन से जोड़े जा सकते हैं।
जब कर्मचारी नई कंपनी में जॉइन करता है तो उसे अपना यूएएन नए नियोक्ता को देना चाहिए, ताकि नया पीएफ खाता उसी यूएएन से लिंक हो सके। सभी खातों को एक ही यूएएन से जोड़ने का फायदा यह है कि कर्मचारी आसानी से अपना बैलेंस देख सकता है, योगदान की जानकारी ट्रैक कर सकता है और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन ट्रांसफर की प्रक्रिया भी शुरू कर सकता है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मानें तो अलग-अलग PF अकाउंट को एक में मर्ज करने से कई फायदे मिलते हैं। इससे फंड का रिकॉर्ड साफ रहता है, ब्याज की गणना सही तरीके से होती है और भविष्य में पैसा निकालना या ट्रांसफर करना भी आसान हो जाता है।
ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह जरूरी है कि आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिव हो। इसके साथ ही आपका UAN आधार, पैन और बैंक खाते से लिंक होना चाहिए। अगर केवाईसी (KYC) पूरी नहीं है तो ट्रांसफर या मर्ज की प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
एम्प्लॉई के पास ईमेल के ज़रिए भी EPF खातों को मर्ज करने का विकल्प होता है। यह सिर्फ उन लोगों पर लागू होता है जिनके पास दो UAN होते हैं। ऐसे में, आप EPFO से पिछले UAN को डीएक्टिवेट करने का अनुरोध कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, बस uanepf@epfindia.gov.in पर एक ईमेल भेजें और अपना मौजूदा और पिछला UAN, साथ ही दूसरी जरूरी जानकारी दें। एक बार जब EPFO रिक्वेस्ट को वेरिफाई और स्वीकार कर लेता है, तो पिछला UAN ब्लॉक कर दिया जाएगा, जबकि मौजूदा UAN एक्टिव रहेगा। ऐसा होने के बाद, एम्प्लॉई को मौजूदा UAN में पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए EPFO पोर्टल पर एक नया क्लेम सबमिट करना होगा।
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