
अपने बच्चों का वित्तीय भविष्य सुरक्षित करना हर माता-पिता की सबसे जरूरी जिम्मेदारियों में से एक है। बच्चों की शिक्षा, शादी और अन्य जरूरी खर्चों के लिए भविष्य में अच्छी-खासी रकम की जरूरत होती है। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने निवेश को अलग-अलग योजनाओं में बांटें, ताकि सही समय पर ज़रूरी धनराशि उपलब्ध हो सके।
भारत में कई ऐसी निवेश योजनाएं हैं जो बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बनाई गई हैं। ऐसे में अगर आप अपने बच्चे के लिए किसी योजना में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो बाल दिवस के मौके पर आप इसे शुरू कर सकते हैं। आइए, इन योजनाओं को आसान भाषा में समझें।
यह योजना सरकार द्वारा खासतौर पर बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई है। माता-पिता या अभिभावक 10 साल से कम उम्र की बेटी के नाम पर खाता खोल सकते हैं। यह खाता 21 साल बाद या लड़की की शादी (18 साल की उम्र के बाद) पर मैच्योर होता है। साल 2025 में इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज मिलता है, जो हर साल कंपाउंड होता है। इसमें हर साल कम से कम ₹250 और अधिकतम ₹1.5 लाख तक जमा किया जा सकता है। इस योजना के तहत आयकर धारा 80C में टैक्स छूट भी मिलती है।
पीपीएफ एक लंबी अवधि की सरकारी निवेश योजना है, जो सुरक्षित और भरोसेमंद मानी जाती है। वर्तमान में इस पर 7.1% ब्याज मिलता है, जिसे हर तिमाही में सरकार बदल सकती है। इससे मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। निवेश की गई राशि पर धारा 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है। इस योजना की लॉक-इन अवधि 15 साल होती है, इसलिए यह बच्चों की उच्च शिक्षा जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए उपयुक्त है।
एनएससी एक सुरक्षित और निश्चित आय देने वाली योजना है। इसकी अवधि 5 साल होती है और यह भी समय-समय पर तय की गई ब्याज दर पर ब्याज देती है। इस पर मिलने वाला ब्याज हर साल रीइन्वेस्ट होता है और धारा 80C के अंतर्गत टैक्स छूट के योग्य होता है। यह योजना बच्चों की शिक्षा के लिए सुरक्षित पूंजी बनाने का एक अच्छा विकल्प है।
यूएलआईपी एक ऐसी योजना है जिसमें बीमा और निवेश दोनों का लाभ मिलता है। इसमें जमा किए गए प्रीमियम का एक हिस्सा बीमा के लिए और बाकी हिस्सा शेयर बाजार (equity) या बॉन्ड (debt) में निवेश किया जाता है। इसकी लॉक-इन अवधि 5 साल होती है। रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है, इसलिए इसमें कुछ जोखिम भी शामिल है। इस योजना पर भी धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। निवेश करने से पहले इसके शुल्क और जोखिम को समझना जरूरी है।
एसआईपी के जरिए आप हर महीने एक तय राशि किसी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। यह तरीका नियमित निवेश की आदत डालता है और कंपाउंडिंग के जरिए समय के साथ संपत्ति बढ़ाता है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस बैंकबाज़ार डॉट कॉम के सीईओ अधिल शेठ्टी के अनुसार, “इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, जो बच्चों की शिक्षा जैसे लक्ष्यों के लिए उपयुक्त हैं। हालांकि एसआईपी पर सामान्यतः टैक्स छूट नहीं होती, लेकिन ELSS फंड्स (Equity Linked Savings Scheme) में निवेश करने पर टैक्स छूट मिलती है।”
एफडी पारंपरिक और सुरक्षित निवेश विकल्प हैं, जो तय अवधि के बाद निश्चित ब्याज के साथ रकम लौटाते हैं। हालांकि, इन पर ब्याज दरें कुछ अन्य योजनाओं से कम हो सकती हैं, लेकिन ये जोखिम-मुक्त और भरोसेमंद होती हैं। कई बैंक बच्चों के लिए विशेष एफडी योजनाएँ भी प्रदान करते हैं, जिनका उपयोग शिक्षा खर्च के लिए किया जा सकता है।
निवेश करने से पहले हर विकल्प के जोखिम, रिटर्न और लॉक-इन अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। अगर आप अपने निवेश को अलग-अलग योजनाओं में बाँटते हैं, तो इससे जोखिम कम होता है और रिटर्न बढ़ाने के अवसर भी मिलते हैं। इस तरह आप अपने बच्चों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित वित्तीय भविष्य बना सकते हैं।
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.