Explained: गांव में चाहते हैं रोजगार तो आपके लिए हैं ये 8 बिजनेस आइडियाज, अनुमानित लागत से कमाई तक डीटेल में जानें

Circular Economy Business India: नौकरियां जा रही हैं या गांव में परिवार को आपकी दरकार है या फिर यूं ही घर लौटने का मन है तो आपके मन में सहज सवाल यही होगा कि आखिर वहां करूंगा क्या? भारत सरकार के बजट में इसका जवाब छिपा है। आइए जानते हैं कि आप गावों में किस प्रकार के बिजनेस कर सकते हैं।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड17 Feb 2026, 06:02 PM IST
ग्रामीण इलाकों में करें कौन-कौन से बिजनेस? (सांकेतिक तस्वीर)
ग्रामीण इलाकों में करें कौन-कौन से बिजनेस? (सांकेतिक तस्वीर)

एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी) के कारण आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) समेत विभिन्न क्षेत्रों में नौकरियां घट रही (AI Layoffs) हैं। दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत में भी कई कंपनियों में छंटनियां चल रही हैं। एआई के इस तात्कालिक दुष्प्रभाव का अनुमान लगाते हुए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट (Budget 2026) में कई ऐसे प्रावधान (Government Subsidy) किए हैं जिनसे व्यक्तिगत या समूह स्तर पर कारोबार खड़ा करने का मजबूत आधार तैयार हो सके।

सर्कुलर इकॉनमी से जुड़े बिजनेस आइडियाज पर करें गौर

केंद्रीय बजट में सर्कुलर इकॉनमी की परिकल्पना करते हुए विभिन्न मदों में हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'कचरे से कंचन' बनाने के विचार को इस बार के बजट में वित्तीय समर्थन दिया है। इससे आज की पीढ़ी के लिए न केवल अपने लिए कारोबार खड़ा करने बल्कि कई अन्य को रोजगार मुहैया कराने के अनेक अवसरों के द्वार खुल गए हैं।

सर्कुलर इकॉनमी के लिए किए गए बजटीय प्रावधान क्रांतिकारी: एस रवि

एस. रवि, पूर्व चेयरमैन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) एवं संस्थापक रवि राजन एंड कंपनी ने बजट में सर्कुलर इकॉनमी के लिए किए गए प्रावधानों को क्रांतिकारी कदम बताया है। उन्होंने मिंट हिंदी से कहा, 'केंद्रीय बजट 2026-27 ग्रामीण उद्यमिता के लिए एक परिवर्तनकारी अवसर प्रदान करता है, जिसके तहत चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और अपशिष्ट-से-धन (waste-to-wealth) परिवर्तन के लिए हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस बदलाव का मुख्य आधार CGTMSE योजना का विस्तार है, जो अब 10 करोड़ रुपये तक के संपार्श्विक-मुक्त (collateral-free) ऋण प्रदान करती है, जिससे व्यवसाय ऋण के लिए भूमि या सोने जैसी संपत्ति की आवश्यकता समाप्त हो गई है।'

गांव लौटना है तो रोजगार की चिंता को कहें बाय

इस आलेख में हम उन बिजनेस आइडियाज (High ROI Rural Ideas) पर विस्तार से नजर डालेंगे जो गांवों के लिए उपयुक्त हैं। यह गाइड उन संभावित उद्यमियों के लिए हैं जो ग्रामीण भारत में व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। ये सभी आइडियाज सरकारी योजनाओं से जुड़े व्यावहारिक और मध्य आय वर्ग के लिए उपयुक्त हैं। इन व्यवसायों की फंडिंग तथा सरकारी सहायता के विकल्पों, चुनौतियों एवं लाभ के अवसरों जैसे प्रमुख तथ्यों पर भी हमने गौर किया है। हमने यहां कुल आठ व्यवसायों को लागत आधारित चार श्रेणियों में विभक्त किया है।

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गांवों में शुरू करें ये बिजनेस (AI Generated Graphic)
(Claude ai)

Business under 10 Lakh Capital: 10 लाख रुपये तक की लागत से खड़ा करें ये बिजनेस

1. बायगैस संयंत्र (Biogas setup steps)

भारत के लगभग 6 लाख गांवों में पशुधन और कृषि अवशेषों की भरमार है। बजट 2026-27 में बायोगैस कार्यक्रम के लिए 45 करोड़ रुपये और बायोमास कलेक्शन के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जिससे यह क्षेत्र नए व्यवसाय के लिहाज से बहुत आकर्षक हो गया है। स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण के लिए 7,192 करोड़ रुपये के बजट आवंटन से गांवों में कचरा प्रबंधन को बड़ा बूस्ट मिलेगा।

बायोगैस प्लांट के बाजार पर एक नजर (Biogas Plant Market Outlook)

स्थानीय मांग- रसोई गैस की कीमतें बढ़ने से ग्रामीण परिवारों में सस्ते विकल्प की तलाश है।

कच्चा माल- गोबर, कृषि अवशेष, खाद्य कचरा। ये सब मुफ्त या बहुत कम लागत पर उपलब्ध हैं।

सरकारी समर्थन- बायोगैस ब्लेंडेड सीएनजी पर उत्पाद शुल्क नहीं लगता है।

लागत (Biogas Plant setup cost) - 6 से 10 लाख रुपये

बाजार- गांव के घर, स्कूल

बायोगैस प्लांट बिजनेस मॉडल

  • प्रति दिन 50 से 100 घरों को बायोगैस की आपूर्ति
  • 8 से 15 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर की दर से बिक्री
  • खाद की अतिरिक्त बिक्री से प्रति माह 2 से 5 हजार की अतिरिक्त आमदनी
  • सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल
  • कच्चा माल किसानों, पशुपलाकों से लेंगे
  • गैस ग्रामीणों को बेचेंगे
  • खाद किसानों को बेचेंगे

बायोगैस प्लांट के लिए फंडिंग कैसे जुटाएं? (Biogas Plant Loan Process)

8-10% ब्याज पर 3-5 लाख रुपये मुद्रा लोन उपलब्ध।

एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) से 3% की ब्याज छूट के साथ 2 लाख रुपये

स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण अनुदान के तहत ग्राम पंचायत से सब्सिडी मिल सकती है

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) से 10 से 15 हजार रुपये प्रति क्यूबिक मीटर बायोगैस पर सब्सिडी

भारत में बायोगैस का बढ़ता बाजार

देश में बायोगैस बाजार के वर्ष 2030 तक 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचने का अनुमान है। प्रति दिन 10 क्यूबिक मीटर बायोगैस उत्पादन की क्षमता वाला संयंत्र लगभग 50 घरों को सप्लाई कर सकता है। इससे हर महीने 25 हजार से 40 हजार रुपये तक का रेवेन्यू मिल सकता है। 15 से 30 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो सकती है। यानी आपके निवेश पर हर महीने 20 से 40 पर्सेंट का सालाना रिटर्न मिलेगा।

बायोगैस प्लांट से कमाई के अनुमान

इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बहुत कम है क्योंकि यह उभार के दौर में ही है और इस रोजगार में हर वर्ष 12 से 15 पर्सेंट की वृद्धि की संभावना है।

डेढ़ से दो साल में रोजगार जम जाने का अनुमान रख सकते हैं।

3-4 वर्ष में 5 प्लांट तक के विस्तार और बायो सीएनजी तक अपग्रेड करने की पूरी संभावना होती है।

बायोगैस प्लांट लगाने के लिए जरूरी बातें (Biogas Plant Registration Process)

रजिस्ट्रेशन- गोवर्धन पोर्टल, जीएसटी, एमएसएमई उद्यम रजिस्ट्रेशन, ग्राम पंचायत से एनओसी सर्टिफिकेट, एमएनआरई रजिस्ट्रेशन

जरूरी स्किल- बायोगैस तकनीक की मौलिक समझ, 3 से 7 दिन की सरकारी ट्रेनिंग

2. ई-कचरा संग्रह और प्रारंभिक प्रसंस्करण केंद्र

भारत में प्रति वर्ष 30 लाख टन से ज्यादा ई-कचरा जमा होता है जिसमें से केवल 20 पर्सेंट की वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग हो पाती है। बजट में नैशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीसीएम) के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गाय है। वहीं, ईपीआर (एक्सटेंडेड प्रॉड्युसर रिस्पॉन्सिबिलिटी) ढांचे से ई-कचरा क्षेत्र में बड़े अवसर खुले हैं। एमसआई- स्पाइस (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज- स्कीम फॉर प्रमोशन एंड इन्वेस्टमेंट इन सर्कुलर इकॉनमी) योजना विशेष रूप से इस प्रकार के स्टार्टअप के लिए ही बनाई गई है।

लागत (E-waste Plant Setup Cost) - 5 से 8 लाख रुपये।

बढ़ती मांग- 4जी से 5जी में स्थानांतरण, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का बढ़ता उपयोग।

ईपीआर अनुपालन- सैमसंग, एलजी, श्याओमी जैसी बड़ी कंपनियां ईपीआर नियमों के तहत कलेक्शन के लिए पेमेंट करती हैं।

पेमेंट- प्रति किलो 20 से 80 रुपये तक का पेमेंट कलेक्शन सेंटरों को मिलता है।

ई-वेस्ट प्लांट बिजनेस मॉडल

  • आसपास के 5 से 10 गांवों और कस्बों से ई-कचरी संग्रह।
  • प्रारंभिक छंटाई और वर्गीकरण
  • डीपीआईआईटी रजिस्टर्ड रीसाइक्लिंग फैसिलिटी को माल की बिक्री।
  • ईपीआर क्रेडिट से इनकम।
  • बड़ी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां
  • स्थानीय मरम्मत की दुकानें
  • सी-मेट जैसी रजिस्टर्ड रीसाइक्लिंग यूनिट्स
  • स्क्रैप डीलर्स

ई-वेस्ट प्लांट फंडिंग (E-waste plant Funding Sources)

1 से 2 लाख रुपये मुद्रा लोन

सीजीटीएमसएसई से 10 करोड़ रुपये तक बिना गारंटी का लोन

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड (एसआईएसएफएस)- डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के लिए 20 से 50 लाख रुपये तक का लोन

एसएमई ग्रोथ फंड के तहत 500 करोड़ रुपये के फंड से इक्विटी इन्वेस्टमेंट

प्रिज्म स्कीम से नवाचार आधारित स्टार्टअप के लिए अनुदान

रजिस्ट्रेशन और जरूरी जानकारी (E-waste plant registration)

रजिस्ट्रेशन- डीपीआईआईटी स्टार्टअप इंडिया, जीएसटी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ई-वेस्ट कलेक्शन का ऑथराइजेशन, एमएसएमई उद्यम

मार्केटिंग- ईपीआर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें, स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक दुकानों से साझेदारी करें

डेढ़ से दो वर्ष में बिजनेस खड़ा हो जाने का अनुमान है। फिर निवेश पर 30 से 40 पर्सेंट के अनुमानित रिटर्न से हर महीने 20 से 30 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो सकता है।

बजट में स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) के लिए ₹7,192 करोड़ के आवंटन से मजबूती मिली है, जो पंचायत अपशिष्ट अनुबंधों को सुगम बनाता है, और कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के माध्यम से ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 3% ब्याज छूट प्रदान की जाती है।- एस. रवि, पूर्व चेयरमैन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) एवं संस्थापक रवि राजन एंड कंपनी

20 लाख रुपये तक की पूंजी के बिजनेस

इस श्रेणी में अधिक तकनीकी और ज्यादा लाभ वाले व्यवसाय आते हैं। सीजीटीएमएसई लोन और एसएमई ग्रोथ फंड से व्यवसाय की फंडिंग आसान हो जाती है।

3. बायोमास ब्रिकेट और पेलेट निर्माण

पराली जलाने की समस्या भारत में एख बड़ा पर्यावरण संकट है। सरकार ने बायोमास संग्रह के लिए 100 करोड़ रुपये और पीएम जीवन योजना के लिए 196.94 करोड़ रुपये करोड़ आवंटित किए हैं। ब्रिकेट बनाना पराली को मूल्यवान ईंधन में बदलने का सबसे व्यावहारिक तरीका है।

बायोमास ब्रिकेट एवं पेलेट निर्माण के बिजनेस मॉडल

लागत (Biomas Plant Cost) - 12 से 18 लाख रुपये

कच्चा माल- पराली, गन्ने की खोई, मक्के के डंठल किसानों से मुफ्त या 500 से 800 रुपये प्रति टन की दर से खरीदें।

उत्पादन- ब्रिकेट/पेलेट मशीन से 200 से 500 किलो प्रति घंटा उत्पादन

बाजार- बाजार- ईंट भट्ठे, चाय बागान, स्थानीय उद्योग, थर्मल पावर प्लांट।

इनकम- 4,500 से 6,500 रुपये प्रति टन बिक्री। कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त इनकम।

सरकारी नीति- बायोमास आधारित बिजली उत्पादन के लिए प्राथमिकता।

ई-वेस्ट प्लांट की फंडिंग (E-waste plant funding sources)

  • मुद्रा लोन से 10 लाख रुपये तक।
  • पीएम जीवन स्कीम से लिग्नोसेल्यूलोसिक आधारित प्रॉजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता।
  • सीजीटीएमएसई से 10 करोड़ रुपये तक बिना गारंटी के लोन।
  • सीएलसीएसएस (क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी) से 15 पर्सेंट सब्सिडी के साथ 1 करोड़ रुपये तक लोन।
  • बायोमास आधारित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एमएनआरई सब्सिडी

रजिस्ट्रेशन एवं जरूरी बातें (E-waste plant registration)

रजिस्ट्रेशन- जीएसटी, एमएसएमई उद्यम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी, यदि ग्रिड से जुड़ना हो तो एमएनआरई रजिस्ट्रेशन

दो से ढाई वर्ष में बिजनेस खड़ा हो जाने का अनुमान है। फिर 20 से 30 पर्सेंट के अनुमानित रिटर्न के साथ हर महीने 30 से 55 हजार रुपये की शुद्ध बचत संभव है।

4. रीफर्बिश्ड इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर और रीसेल सेंटर

एक अनुमान के अनुसार, प्री-ओन्ड मार्केट में 30 पर्सेंट की सालाना वृद्धि हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नए स्मार्टफोन 15 से 25 हजार रुपये में बिकते हैं जबकि रीफर्बिश्ड फोन 5 से 10 हजार रुपये में उपलब्ध हो सकते हैं। एमएसई स्पाइस स्कीम इस प्रकार के सर्कुलर बिजनेस को प्राथमिकता देती है।

रीफर्बिश्ड इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस मॉडल

  • लागत- 10 से 18 लाख रुपये
  • शहरी क्षेत्रों से पुराने उपकरण खरीदें।
  • टेक्नीशियन से मरम्मत और टेस्टिंग करवाएं।
  • 1 से 6 महीने की वारंटी के साथ बेचें।
  • ईएमआई सुविधा से बिक्री बढ़ाएं।
  • खरीद और बिक्री के बीच 40 से 60 पर्सेंट का अंतर।
  • ग्रामीण भारत में वर्ष 2025 से 2030 तक स्मार्टफोन की मांग तीन गुना बढ़ने का अनुमान है। युवा, छात्र, किसान, स्थानीय सरकारी संस्थाएं और छोटे व्यापारी सभी ग्राहक हैं।

रीफर्बिश्ड इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर और रीसेल सेंटर के लिए फंडिंग

  • सीजीटीएमएसई से 10 करोड़ रुपये तक का गारंटी फ्री लोन।
  • एमएसई स्पाइस से रैंप कार्यक्रम के तहत सर्कुलर बिजनेस के लिए वित्तीय सहायता।
  • स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के मार्फत 900 करोड़ के फंड से निवेश संभव।
  • आईटीआरईडीएस प्लैटफॉर्म से बिलों के बदले सीजीटीएमएसई गारंटी के साथ तुरंत नकदी उपलब्ध।
  • 15 से 20 महीने में बिजनेस खड़ा हो सकता है। फिर 35 से 45 पर्सेंट के अनुमानित रिटर्न से प्रति माह 40 से 70 हजार रुपये का शुद्ध लाभ होना संभव है।

30 लाख रुपये तक की पूंजी के बिजनेस

इस स्तर पर अधिक औपचारिक व्यावसायिक ढांचा, उद्योग स्तरीय मशीनरी और विस्तृत बाजार तक पहुंच की जरूरत है। एसएमई ग्रोथ फंड और एमएसई गिफ्ट इन व्यवसायों के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

5. जैविक खाद उत्पादन इकाई (How to setup Vermi compost plant)

स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण के 7,192 करोड़ रुपये के आवंटन और वेस्ट टु वेल्थ के सरकारी एजेंडे से जैविक खाद (वर्मी कंपोस्ट) उत्पादन उद्योग को बड़ा बल मिल गया है। रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती कीमतों ने किसानों को जैविक विकल्पों की ओर मोड़ दिया है। प्रधानमंत्री प्राकृतिक खेती अभियान इस वर्मी कंपोस्ट की मांग को बढ़ावा मिल रहा है।

बिजनेस मॉडल (Vermi compost plant business model)

लागत- 20 से 28 लाख रुपये अनुमानित

कच्चा माल- पंचायत और नगर पालिका का ठोस कचरा, कृषि अवशेष, गोबर।

उत्पादन- 60 से 90 दिनों में वर्मी कंपोस्ट तैयार करें।

बिक्री- 8 से 15 रुपये प्रति किलो की दर से वर्मी कंपोस्ट और 3 से 6 किलो की दर से साधारण खाद बेचें।

बाजार- वर्ष 2030 तक 75 हजार करोड़ रुपये मूल्य का वर्मी कंपोस्ट मार्केट तैयार होने का अनुमान।

ग्राहक- स्थानीय किसान, जैविक सब्जी उत्पादक, नर्सरी एवं बगावानी, ऐमजॉन-फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म।

विस्तार की संभावना- 3 से 5 वर्ष में बायो-पेस्टिसाइड और मिट्टी परीक्षण सेवाओं तक विस्तार करें।

वर्मी कंपोस्ट प्लांट के लिए फंडिंग (Vermi compost plant funding sources)

  • कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) से 2 कोरड़ रुपये तक का लोन 3 पर्सेंट ब्याज छूट के साथ। सीजीटीएमएसई गारंटी भी।
  • नाबार्ड ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रम से अनुदान और सस्ते लोन।
  • एसएमई ग्रोथ फंड के मार्फत 500 करोड़ रुपये से इक्विटी सहायता।
  • स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण पीपीपी कॉन्ट्रैक्ट से ग्राम पंचायत से कचरा प्रबंधन का ठेका लेकर राजस्व।

रजिस्ट्रेशन एवं जरूरी जानकारी (Vermi compost plant registration)

रजिस्ट्रेशन- जीएसटी, बायोफर्टिलाइजर के लिए एफएसएसएआई सर्टिफिकेशन, एफसीओ रजिस्ट्रेशन, पीजीएस-इंडिया जैविक प्रमाणन।

वर्मी कंपोस्ट प्लांट से कमाई का अनुमान (Expected ROI from vermi compost plant)

20 से 28 महीने में बिजनेस खड़ा हो सकता है। फिर 22 से 32 पर्सेंट के अुमानित रिटर्न से 45 से 80 हजार रुपये प्रति माह की शुद्ध बचत हो सकती है।

6. सस्टेनेबल पैकेजिंग प्लांट

भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। पराली, गन्ने की खोई और केले के तने से बने इको-फ्रेंडली प्रॉडेक्ट्स प्रीमियम कीमतों पर बिकते हैं। सरकार ने 2024 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाया है। इस कारण एचयूएल, आईटीसी, मैरिको जैसे एफएमसीजी कंपनियां इको-फ्रेंडली पैकेजिंग पर स्विच कर रही हैं। दूसरी तरफ, यूरोप और अमेरिका में इको-पैकेजिंग की मांग 25 पर्सेंट की वार्षिक दर से बढ़ रही है।

बिजनेस मॉडल (Sustainable packaging plant business model)

  • लागत- 22 से 28 लाख रुपये अनुमानित
  • कृषि अवशेषों और कागज अपशिष्ट से पल्प बनाएं। उन्होंने मोल्डेड पल्प ट्रे, थैले, कंटेनर का रूप दें।
  • एफएमसीजी कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स और किराना बाजार को सप्लाई करें।
  • फूड इंडस्ट्री, दवा कंपनियां, सुपर मार्केट और रिटेल चेन में भारी खपत है।

सस्टेनेबल पैकेजिंग प्लांट फंडिंग (Sustainable packaging plant funding sources)

  • एमएसई गिफ्ट माध्यम से हरित निवेश के लिए विशेष सहायता मिलती है।
  • सीएलसीएसएस में लोन पर 15 पर्सेंट तक सब्सिडी मिलती है।
  • सीजीटीएमएसई में 10 करोड़ रुपये तक का गारंटी फ्री लोन मिलता है।
  • सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड से पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए कम ब्याज दर पर धन जुटाए जा सकते हैं।
  • दो से तीन वर्षों में बिजनेस खड़ा हो जाने का अनुमान है। फिर 20 से 28 पर्सेंट के अनुमानित निवेश रिटर्न रेट से प्रति माह 50 से 90 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ हो सकता है।

50 लाख रुपये तक की पूंजी के बिजनेस

ये बड़े स्तर के व्यवसाय हैं जो ज्यादा पूंजी के साथ ज्यादा और स्थिर इनकम की गारंटी देते हैं। नैशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम), पीएम जीवन और डीप टेक फंड ऑफ फंड्स से प्राप्त फंडिंग से व्यवसाय शुरू किया जा सकते हैं।

7. एथेनॉल/बायो एथेनॉल प्रोसेसिंग यूनिट

पीएम जीवन योजना के 196.94 करोड़ रुपये और एथेनॉल उत्पादन क्षमता वृद्धि के 600 करोड़ रुपये के बजट आवंटन से यह क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। पेट्रोल में 20 पर्सेंट एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य वाली ई20 पॉलिसी से पेट्रोलियम कंपनियों को बड़ी मात्रा में एथेनॉल चाहिए। सरकार बायोमास कलेक्शन के लिए 100 करोड़ रुपये की अलग से सहायता दे रही है।

बायो एथेनॉल प्लांट बिजनेस मॉडल (Bio ethanol plant business model)

  • लागत- 35 से 48 लाख रुपये अनुमानित।
  • किसानों से पराली, मक्के के डंठल, गन्ने की खोई खरीदें।
  • प्री-ट्रीटमेंट के बाद हाइड्रोलिसि और फिर फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से एथेनॉल बनाएं।
  • आईओसीए, बीपीएसीएल, एचपीसीएल को 65 से 70 रुपये प्रति लीटर की दर से एथेनॉल बेचें। उनके अलावा, राज्य सरकार की ऊर्जा एजेंसियां और अल्कोहल आधारित स्थानीय उद्योगों को बिक्री संभव है।
  • बायो स्लज को खाद के रूप में बेच दें।

बायो एथेनॉल प्लांट के लिए फंडिंग (Bio ethanol plant funding sources)

  • पीएम जीवन योजना से सीधी वित्तीय सहायता मिलती है। डीपीआर के साथ एमओपीएनजी पोर्टल पर आवेदन करें।
  • कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) से 3 पर्सेंट की ब्याज छूट के साथ 2 करोड़ तक का लोन, सीजीटीएमएसई गारंटी के साथ मिलता है।
  • बायोमास कलेक्शन में सहायता के लिए 100 करोड़ रुपये का फंड है।
  • नाबार्ड एग्री इन्फ्रा और एग्री इंडस्ट्री के लिए रियायती ऋण देता है।
  • उच्च तकनीक के लिए 20 हजार करोड़ रुपये के डीप टेक फंड ऑफ फंड्स से धन जुटा सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन और जरूरी जानकारी (Bio ethanol plant registration)

रजिस्ट्रेशन- जीएसटी, एमएसएमई उद्यम, एक्साइज लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी, फूड ग्रेड एथेनॉल के लिए एफएसएसएआई से ऑथराइजेशन, एमओपीएनजी से डिस्टिलरी लाइसेंस।

सेंटर फॉर हाई टेक्नॉलजी (सीएचटी) तकनीकी सहायता और डीपीआर में मदद करती है।

30 से 42 महीने में आपका बिजनेस खड़ा हो सकता है। इसके बाद 18 से 25 पर्सेंट के इन्वेस्टमेंट रिटर्न रेट से प्रति माह 80 हजार रुपये से 1.5 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ हो सकता है।

8. माइक्रो बायो-सीएनजी/कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट

सरकार ने बायोगैस ब्लेंडेड सीएनजी पर उत्पाद शुल्क छूट देकर इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किया है। बजट में सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) के लिए पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 20 करोड़ रुपये अलग से और बायो-पावर के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। नैशनल क्रिटिकल मिनेरल मिशन (एनसीएमएम) का डीप टेक फंड ऑफ फंड्स भी इस क्षेत्र को सपोर्ट करता है। सैटट योजना (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवार्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन स्कीम) के तहत 5,000 सीबीजी प्लांट का लक्ष्य है।

बायो सीएनजी प्लांट बिजनेस मॉडल (Bio CNG Plant business model)

  • लागत- 40 से 50 लाख रुपये अनुमानित।
  • गोबर और कृषि अवशेष से बायोगैस बनाएं।
  • कंप्रेसन यूनिट से कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार करें।
  • गेल, आईजीएल, एमजीएल जैसी कंपनियों को 46 से 54 रुपये प्रति किलो की दर से सीबीजी बेचें।
  • कार्बन क्रेडिट- प्रत्येक टन कार्बन डाई ऑक्साइड बचाने पर कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त इनकम कमाएं।
  • बायो मैन्यर को अलग से बेचें।

बायो सीएनजी प्लांट के लिए फंडिंग (Bio CNG Plant funding sources)

  • सैटट स्कीम आईओसीएल, एचपीसीएल, बीपीसीएल की माध्यम से ऑफटेक लेटर ऑफ इंटेंट प्राप्त करें।
  • सीजीटीएमएसई से गारंटी फ्री 10 करोड़ तक का लोन।
  • डीपटेक फंड ऑफ फंड्स के 200 करोड़ रुपये के कॉर्पस से धन जुटाएं।
  • सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड से कम ब्याज पर फंडिंग जुटाएं।
  • बायो एनर्जी प्रोग्राम के तहत 46 करोड़ रुपये के फंड से अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) मद में सहायता पाएं।

रजिस्ट्रेशन एवं जरूरी जानकारी (Bio CNG plant registration)

रजिस्ट्रेशन- गोवर्धन पोर्टल, जीएसटी, पेसो (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन) लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी, एमएसएमसी उद्यम और एमईएनआरई रजिस्ट्रेशन।

EOI अप्लीकेशन- सैटट पोर्टल पर ऑफटेक के लिए ईओआई (एक्सप्रेसन ऑफ इंट्रेस्ट) दाखिल करें।

बाजार में बनी खाई पाट देंगी सरकार की ये पहलें: एक्सपर्ट

एस. रवि कहते हैं, 'तकनीकी उद्यमों के लिए, पीएम जी-वन योजना बायो एथेनॉल परियोजनाओं के लिए 196.94 करोड़ की वित्तीय सहायता देती है, जबकि नैशनल क्रिटिकल मिनेरल मिशन (NCMM) ने ई-कचरा और खनिज पुनर्चक्रण के लिए 500 करोड़ निर्धारित किए हैं। ये पहल उस बाजार की खाई को पाटने के लिए डिजाइन की गई हैं, जहां वर्तमान में केवल 22% ई-कचरे का औपचारिक रूप से पुनर्चक्रण होता है और 2030 तक 20% एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य अनिवार्य है। सरकारी अनुबंधों में निहित नकदी प्रवाह के जोखिमों को कम करने के लिए उद्यमी चालान छूट (invoice discounting) के लिए TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) का उपयोग कर सकते हैं।'

Disclaimer: यह बिजनेस गाइड बनाने में Claude ai की मदद ली गई है। खासकर सारे अनुमान एआई से ही सजेस्टेड हैं। एआई से तैयार पीडीएफ फाइल नीचे दी गई है।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। कोई व्यवसाय शुरू करने से पहले क्षेत्र के विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें। मिंट हिंदी आपके किसी भी निवेश या व्यावसायिक कदम के परिणामों के लिए बिल्कुल भी उत्तरदायी नहीं है।

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बिजनेस न्यूज़मनीExplained: गांव में चाहते हैं रोजगार तो आपके लिए हैं ये 8 बिजनेस आइडियाज, अनुमानित लागत से कमाई तक डीटेल में जानें
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