Tax Saving on House Rent: देश में बड़ी संख्या में लोग नौकरी या बिजनेस के सिलसिले में अपने घर से दूर किराये पर रहते हैं। जब टैक्स बचाने की बात आती है, तो आमतौर पर यही माना जाता है कि मकान किराए पर टैक्स छूट केवल उन्हीं लोगों को मिल सकती है जिनकी सैलरी में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) शामिल होता है। इस वजह से कई सेल्फ एंप्याड लोग और ऐसे वेतनभोगी कर्मचारी इस सुविधा का फायदा नहीं उठा पाते हैं। लेकिन इनकम टैक्स का एक नियम ऐसा भी है जो बिना HRA वाले किराएदारों को भी हर साल हजारों रुपये का टैक्स बचाने का मौका देता है।
धारा 134 की विशेष व्यवस्था
इनकम टैक्स अधिनियम के तहत धारा 134 की विशेष व्यवस्था है। यह धारा खासतौर पर उनलोगों के लिए बनाई गई है, जो किराए के मकान में तो रहते हैं, लेकिन उन्हें एंप्लायर की तरफ से कोई HRA नहीं मिलता है। इस नियम का फायदा देश के नौकरीपेशा लोगों के साथ-साथ सेल्फ एंप्लायड या बिजनेस करने वाले लोग भी उठा सकते हैं।
इन शर्तों को पूरा करने पर ही मिलेगा टैक्स छूट का लाभ
इस टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए सरकार ने कुछ बेहद जरूरी और स्पष्ट शर्तें तय की हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य है। सबसे पहली शर्त यह है कि वित्तीय वर्ष के दौरान आपको अपने नियोक्ता से किसी भी तरह का HRA न मिला हो। दूसरी आपके पास, आपके जीवनसाथी, आपके नाबालिग बच्चे या आपके हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के नाम पर उस शहर में कोई आवासीय संपत्ति नहीं होनी चाहिए।
साल भर में कितनी होगी आपकी बचत
धारा 134 के तहत मिलने वाली छूट की एक अधिकतम सीमा तय की गई है। इसके तहत मिलने वाली कटौती की गणना तीन पैमानों के आधार पर की जाती है, और इनमें से जो भी राशि सबसे कम होती है, वही टैक्स छूट के लिए मान्य होती है।
पहली स्थिति: आपकी तरफ से चुकाया गया कुल किराया, जिसमें से आपकी कुल आय का 10 प्रतिशत घटा दिया जाता है।
दूसरी स्थिति: हर महीने 5,000 रुपये की निश्चित सीमा, जो सालाना आधार पर अधिकतम 60,000 रुपये होती है।
तीसरी स्थिति: टैक्सपेयर्स की कुल एनुअल इनकम का 25 प्रतिशत हिस्सा।
इन तीनों विकल्पों की गणना करने के बाद जो राशि सबसे कम निकलकर आएगी, उसे आप अपने टैक्स रिटर्न में डिडक्शन के रूप में क्लेम कर सकते हैं।
क्लेम से पहले जरूर रख लें ये दस्तावेज
टैक्स विभाग के नियमों के मुताबिक, इस छूट को पाने के लिए आयकर नियमों के तहत फॉर्म 31 में एक निर्धारित घोषणा पत्र दाखिल करना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही टैक्सपेयर्स को मकान मालिक से मिली किराए की रसीदें, एक वैध रेंट एग्रीमेंट और बैंक ट्रांसफर के डिजिटल सर्टिफिकेट जरूर होने चाहिए। अगर आपका सालाना किराया 1 लाख से ज्यादा है, तो इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय मकान मालिक का पैन (PAN) नंबर भी देना अनिवार्य हो जाता है।