क्लाइमेट इंश्योरेंस: मौसम से होने वाले नुकसान का कराएं बीमा, मिलेगा पूरा पैसा

Climate insurance: बाढ़, लू या भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं में नुकसान होने पर आर्थिक मदद मिल सकती है। इसके लिए आपको क्लाइमेट इंश्योरेंस लेना होगा।

Jitendra Singh
अपडेटेड29 Dec 2025, 06:37 PM IST
Climate insurance: मौसमी घटनाएं क्लाइमेट इंश्योरेंस के दायरे में आती हैं।
Climate insurance: मौसमी घटनाएं क्लाइमेट इंश्योरेंस के दायरे में आती हैं।

Climate insurance: क्लाइमेट चेंज अब जीवन की वास्तविकता बन चुका है। तेज गर्मी से लेकर बेमौसम बारिश, कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ अब सामान्य बातें हो गई हैं। तेजी से बदलते मौसम का नुकसान हमें आज जीवन में उठाना पड़ रहा है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आप मौसम से होने वाले नुकसान का भी बीमा करा सकते हैं? आज हम आपको ऐसे ही बीमा के बारे में बताने जा रहे हैं। इससे आप अपने कारोबार का भी बीमा करा सकते हैं। इसके लिए आपको क्लाइमेट इंश्योरेंस लेना होगा।

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, EDME इंश्योरेंस ब्रोकर्स की हेड (इंटरनेशनल बिजनेस एंड क्लाइमेट रिस्क) नेहा यादव का कहना है कि अधिकतर छोटे व्यापारी सीमित बचत के साथ काम करते हैं। ऐसे में अगर किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से दुकान या कारखाना कुछ दिनों के लिए भी बंद हो जाए, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार कुछ दिन का नुकसान ही महीनों की कमाई पर भारी पड़ जाता है।

क्या है क्लाइमेट इंश्योरेंस?

क्लाइमेट इंश्योरेंस एक पैरामीट्रिक इंश्योरेंस है, जो पूर्व निर्धारित मौसमी ट्रिगर्स (जैसे अत्यधिक गर्मी, ठंड या भारी बारिश) के आधार पर क्लेम प्रदान करता है। यह बीमा उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो क्लाइमेट रिस्क के लिए खासतौर से संवेदनशील हैं। इसमें डिलीवरी पार्टनर्स, ड्राइवर, डोमेस्टिक हेल्प, कंस्ट्रक्शन वर्कर, रिटेल दुकान मालिक और आम नागरिक आते हैं। कई देशों में यह बीमा पहले से उपलब्ध है। भारत में इसे बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस ने शुरू किया है।

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कैसे काम करता है यह इंश्योरेंस?

क्लाइमेटसेफ इंश्योरेंस में ऐतिहासिक और वर्तमान मौसम डेटा का उपयोग करके पूर्व निर्धारित थ्रेशोल्ड की गणना की जाती है। यदि मौसमी स्थितियां इन सीमाओं को पार कर जाती हैं, तो पॉलिसीधारक को ऑटोमैटिक उनका क्लेम मिल जाता है। इसके लिए क्लेम करने की जरूरत नहीं होती।

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MSME के लिए क्लाइमेट इंश्योरेंस है वरदान

आज के समय में क्लाइमेट इंश्योरेंस के ऐसे समाधान भी मौजूद हैं, जो खास तौर पर छोटे व्यापारियों और MSME के लिए बनाए गए हैं। इनमें से एक पैरामीट्रिक इंश्योरेंस है। यह पारंपरिक बीमा से अलग होता है, क्योंकि इसमें नुकसान का लंबा आकलन करने की जरूरत नहीं पड़ती है। बता दें कि पैरामीट्रिक इंश्योरेंस में पहले से तय मौसम से जुड़े संकेतकों, जैसे तय सीमा से ज्यादा बारिश या तापमान बढ़ने पर, अपने आप भुगतान सक्रिय हो जाता है। इससे बीमा राशि जल्दी मिल जाती है। यह व्यवस्था MSMEs के लिए इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि इसमें पुराने नुकसान के विस्तृत रिकॉर्ड की जरूरत नहीं होती, इसे समझना आसान होता है और आपदा के समय तुरंत पैसा मिल जाता है।

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