नई दिल्ली: जीएसटी (GST) काउंसिल ने बुधवार को भारत के टैक्स सिस्टम में 2017 के बाद से अब तक का सबसे बड़ा बदलाव मंजूर किया। इसमें घर-घर इस्तेमाल होने वाले सामान, दवाइयां, छोटे कार मॉडल और कई अप्लायंसेज़ पर टैक्स घटा दिया गया है। इसका असर टूथपेस्ट और इंश्योरेंस से लेकर ट्रैक्टर और सीमेंट तक पर पड़ेगा।
टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव
काउंसिल ने टैक्स स्लैब को आसान बनाते हुए अब सिर्फ दो दरें – 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत रखी हैं। अभी तक चार दरें थीं – 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू खर्च बढ़ेगा और अमेरिकी टैक्स (टैरिफ) के असर को संतुलित करने में मदद मिलेगी। कुछ महंगे सामान जैसे लग्ज़री कार, तंबाकू और सिगरेट पर अलग से 40% टैक्स स्लैब प्रस्तावित किया गया है।
नई दरें कब से लागू होंगी?
पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, जर्दा, कच्चा तंबाकू और बीड़ी को छोड़कर बाकी सभी उत्पादों पर नए टैक्स रेट 22 सितंबर से लागू होंगे। इसके अलावा बुधवार को हुई बैठक के बाद कोका-कोला और पेप्सी जैसे लोकप्रिय कोल्ड ड्रिंक्स और अन्य गैर-अल्कोहल ड्रिंक्स भी अब महंगे हो जाएंगे। जीएसटी परिषद ने बुधवार को कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पर कर की दर को वर्तमान 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने को मंजूरी दे दी।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में व्यापक सुधारों के तहत जीएसटी परिषद ने फलों से बने पेय या फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय पदार्थों पर भी कर की दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी। इसके साथ ही परिषद ने कैफीन-युक्त पेय पदार्थों पर भी जीएसटी की दर बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी।
अन्य गैर-अल्कोहल पेय पदार्थ भी महंगे हो जाएंगे क्योंकि इन वस्तुओं पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। जीएसटी परिषद ने अतिरिक्त चीनी या अन्य मीठा पदार्थ या स्वाद वाले सभी उत्पादों पर भी कर की दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी है।
हालांकि फलों के गूदे या फलों के रस आधारित पेय (फलों के कार्बोनेटेड पेय या फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय को छोड़कर) पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई है।