Gold, silver rates today: ग्लोबल मार्केट में आज यानी 23 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशक हाल की तेज़ी के बाद प्रॉफ़िट बुक करते नजर आए। अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखने को मिली। कॉमेक्स पर अप्रैल फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट 24 फरवरी को 116 डॉलर प्रति औंस की गिरावट आई है। यह दिन के निचले स्तर 5,109 डॉलर पर आ गया। इधर चंदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। कॉमेक्स पर मार्च चांदी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट 2 डॉलर प्रति औंस गिरकर दिन के सबसे निचले स्तर 84.50 डॉलर पर आ गई।
अगर चांदी लाल निशान पर बंद होती है, तो इसमें 4 दिन से जारी बढ़त का सिलसिला खत्म हो जाएगा। पिछले 4 दिन में चांदी में 18 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली। नवंबर महीने से अब तक 9.51 फीसदी की बढ़त हुई है। महीने के सबसे निचले स्तर से, चांदी की कीमतों में 35 फीसदी की रिकवरी हुई है।
टैरिफ की अनिश्चिचतता से डॉलर में मजबूती
मज़बूत US डॉलर ने बुलियन पर दबाव डाला, जबकि निवेशक टैरिफ की अनिश्चितता और वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव पर नज़र रखे हुए है। ऐसे में निवेशकों का रुझान गोल्ड की ओर फिर से बढ़ सकता है। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कई देशों को हाल ही में हुई ट्रेड डील्स से पीछे हटने के खिलाफ चेतावनी दी है। इसके साथ ही कहा है कि वह अलग-अलग ट्रेड कानूनों के तहत उन पर बहुत ज़्यादा ड्यूटी लगा सकते हैं।
इधर ग्लोबल लॉजिस्टिक्स की बड़ी कंपनी FedEx ने US सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के इमरजेंसी टैरिफ को रद्द करने के बाद पूरा रिफंड मांगने के लिए केस किया है। इस बीच, ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने रविवार को कहा कि ईरान और अमेरिका गुरुवार को जिनेवा में तीसरे दौर की न्यूक्लियर बातचीत करेंगे।
MCX में सोना-चांदी लुढ़के
घरेलू बाज़ार में, MCX पर अप्रैल का सोने का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट ₹3,313 प्रति 10 ग्राम गिरकर दिन के सबसे निचले स्तर ₹1,58,285 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि मार्च का चांदी का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट ₹11,834 प्रति किलोग्राम गिरकर ₹2,53,499 पर आ गया, जिससे पिछले ट्रेड में देखी गई ₹12,389 की ज़्यादातर तेज़ी खत्म हो गई। पूरे एक महीने के भाव पर नजर दौड़ाएं तो फरवरी में अब तक चांदी 12.17% गिरावट आई है। वहीं गोल्ड हरे निशान में बना हुआ है, और इसी दौरान 6.18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
सोने -चांदी में यह गिरावट तब आई जब डॉलर मज़बूत हुआ, जिससे दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए ग्रीनबैक वाली कमोडिटीज़ महंगी हो गई और डिमांड कम हो गई। US करेंसी में इस उछाल ने लगातार ट्रेड और जियोपॉलिटिकल रिस्क से बुलियन को मिल रहे सपोर्ट को कम कर दिया। मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदें भी फोकस में रहीं। फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने कहा कि अगर आने वाले लेबर मार्केट डेटा से हालात बेहतर होने का पता चलता है तो वह मार्च की मीटिंग में इंटरेस्ट रेट को स्थिर रखने के लिए तैयार रहेंगे।
(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)