
Comprehensive comparison of labour codes: भारत में श्रम सुधारों पर लंबे समय से विमर्श चल रहा था और अब चार नई श्रम संहिताएं लागू हो गई हैं। ये चार श्रम संहिताओं ने दशकों पुराने, खंडित और जटिल श्रम कानूनों की जगह ली हैं। ये संहिताएं अधिक स्पष्ट, आधुनिक और श्रमिक अनुकूल हैं। पहले के श्रम कानूनों की संरचना न केवल व्यवसायों के लिए अनुपालन बोझ पैदा करती थीं, बल्कि करोड़ों श्रमिकों विशेषकर असंगठित, संविदा, गिग और प्लेटफॉर्म एंप्लॉयीज को सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर रखती थीं।
आइए जानते हैं कि सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल स्थितियां संहिता लागू होने के बाद श्रम क्षेत्र में किस प्रकार की परिवर्तनकारी बदलाव संभव हैं।
| क्रम संख्या | पहले (पुरानी व्यवस्था) | अब (नई श्रम संहिताओं में) |
|---|---|---|
| औपचारिक रोजगार | अपॉइंटमेंट लेटर जारी करना अनिवार्य नहीं था। | सभी श्रमिकों को अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा। यह लिखित प्रमाण पारदर्शिता, नौकरी सुरक्षा और औपचारिक रोजगार सुनिश्चित करेगा। |
| सामाजिक सुरक्षा कवरेज | सामाजिक सुरक्षा बहुत सीमित थी और बड़े हिस्से के श्रमिक इससे बाहर थे। | सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स समेत सभी श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे। |
| न्यूनतम वेतन | न्यूनतम वेतन केवल शेड्यूल्ड इंडस्ट्री/रोजगार पर लागू था और लाखों श्रमिल इससे वंचित रह जाते थे। | वेतन संहिता, 2019 के तहत सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन का कानूनी अधिकार होगा। फ्लोर वेज की अवधारणा लागू होगी, जिससे राज्यों के बीच वेतन असमानता कम होगी और जीवन स्तर में सुधार होगा। |
| स्वास्थ्य जांच | एंप्लॉयर की कानूनी जिम्मेदारी होगी कि वो अपने श्रमिकों का साल में एक बार स्वास्थ्य जांच जरूर करवाएं। | एंप्लॉयर को सभी श्रमिकों को मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच उपलब्ध करानी होगी। इससे समय पर स्वास्थ्य जांच और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। |
| समय पर वेतन भुगतान | समय पर वेतन देने का कोई कठोर कानूनी प्रावधान नहीं था। | नियोक्ता के लिए समय पर वेतन देना अनिवार्य होगा। इससे वित्तीय स्थिरता, कम तनाव और श्रमिक मनोबल में सुधार होगा। |
| महिला श्रमिकों की भागीदारी | नाइट शिफ्ट और कई क्षेत्रों में महिलाओं के कार्य पर प्रतिबंध थे। | महिलाओं को सभी तरह के कामों और नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी, लेकिन उनकी सहमति और सुरक्षा उपाय के बिना नहीं। इससे उन्हें अधिक कमाई वाले रोजगार के मौके मिलेंगे। |
| ESIC कवरेज | ESIC सीमित क्षेत्रों और चुनिंदा उद्योगों पर लागू था; 10 से कम कर्मचारियों वाली इकाइयाँ बाहर थीं, और खतरनाक प्रक्रियाओं वाले उद्योगों में भी कवरेज समान नहीं था। | ESIC लाभ पूरे देश में लागू होंगे। 10 से कम कर्मचारियों वाली इकाइयों के लिए यह स्वैच्छिक होगा। खतरनाक प्रक्रियाओं वाली इकाइयों में एक कर्मचारी भी हो, तब भी ESIC का लाभ देना होगा। |
| कंप्लायंस में आसानी | विभिन्न श्रम कानूनों के तहत कई रजिस्ट्रेशन, कई लाइसेंस और कई रिटर्न भरने पड़ते थे। | अब सिंगल रजिस्ट्रेशन,पूरे देश में सिंगल लाइसेंस और सिंगल रिटर्न की व्यवस्था होगी। इससे कंप्लायंस का बोझ बहुत कम हो जाएगा। |
यह तुलना श्रम क्षेत्र में चार बड़े क्षेत्रों में व्यापक बदलाव का संकेत देती हैं...
पहली बार सभी श्रमिकों- स्थायी, संविदा, गिग और प्लेटफॉर्म- को अनिवार्य रूप से नियुक्ति पत्र मिलेगा। इससे न केवल रोजगार की शर्तें स्पष्ट होंगी, बल्कि भविष्य में विवाद या शोषण की स्थिति में श्रमिकों को कानूनी आधार भी मिलेगा।
नई व्यवस्था के बाद सामाजिक सुरक्षा ढांचा व्यापक रूप से फैलेगा। अब तक अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लाखों श्रमिक- जैसे डिलीवरी पार्टनर, ऐप बेस्ड एंप्लॉयी, ठेका श्रमिक पहली बार औपचारिक सुरक्षा कवरेज के भीतर आएंगे।
न्यूनतम वेतन अब सभी क्षेत्रों में समान रूप से लागू होगा। 'फ्लोर वेज' की अवधारणा राज्यों में वेतन असमानता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पहली बार वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जा रहा है, जिससे कार्यस्थल स्वास्थ्य संस्कृति (Workplace Health Culture) मजबूत होगी।
पहले जहां कई उद्योगों में महिलाओं की नाइट शिफ्ट पर प्रतिबंध था, अब शर्तों के साथ इसकी अनुमति होगी। इससे महिलाओं के लिए ज्यादा वेतन वाले क्षेत्रों में अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपायों का पालन एंप्लॉयर की जिम्मेदारी होगी।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि नियोक्ताओं को अब एक ही रजिस्ट्रेशन, एक ही लाइसेंस और एक ही रिटर्न भरना होगा। इससे छोटे, मध्यम और बड़े सभी प्रकार के व्यवसायों को राहत मिलेगी और प्रशासनिक बोझ कम होगा।
श्रमिकों के अधिकार अधिक मजबूत होंगे, रोजगार अधिक औपचारिक होंगे, महिलाओं की श्रम-बाजार भागीदारी बढ़ेगी, उद्योगों के लिए अनुपालन आसान होगा, और देश में कार्यस्थल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा ढांचा काफी व्यापक हो जाएगा। इस तरह, सुधारों का मुख्य उद्देश्य श्रमिक कल्याण और व्यवसाय सुगमता दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ाना है।
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