
Compassionate Appointment law India: जब किसी परिवार का सहारा देने वाला सदस्य नौकरी करते हुए दुनिया छोड़ देता है, तो घर अचानक आर्थिक संकट में घिर जाता है। ऐसे हालात में सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान बनाया है, ताकि परिवार को तुरंत सहारा मिल सके। लेकिन सवाल ये है कि अगर कर्मचारी की मृत्यु के समय उसका बेटा नाबालिग हो और कई साल बाद बालिग होकर वो नौकरी की मांग करता है, तो क्या उसे पिता की जगह अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल सकती है? यही सवाल हाल ही में अदालत के सामने आया और इस पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया। आइए कोर्ट का फैसला जानते हैं।
याचिकाकर्ता सैयद शाहीनूर जमां के पिता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में सहायक प्रधानाध्यापक थे। सितंबर 2010 में सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उस समय जमां केवल आठ वर्ष के थे। वयस्क होने के बाद, जून 2025 में उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि वयस्क होने पर मृतक के उत्तराधिकारी द्वारा रिक्तियों को भरे जाने के लिए आरक्षण की कोई गुंजाइश नहीं है।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन करने का कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष कहा कि उन्होंने वयस्क होने पर अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए स्कूल अधिकारियों से अनुरोध किया था, लेकिन इसे मुर्शिदाबाद के जिला विद्यालय निरीक्षक के कार्यालय में लंबित रखा गया है। अदालत से ये अनुरोध किया गया कि मुर्शिदाबाद के जिला विद्यालय निरीक्षक को याचिकाकर्ता जमां के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया जाए।
अदालत ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति से संबंधित कानून में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिस आवेदक को कर्मचारी की मृत्यु की तिथि पर आवेदन करने का कोई अधिकार नहीं है, उसे वयस्क होने पर भी ऐसा करने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि वयस्क होने पर मृतक के उत्तराधिकारी द्वारा भरी जाने वाली रिक्तियों को आरक्षित करने की कोई गुंजाइश नहीं है।
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