
Credit Card: इन दिनों क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल आम हो गया है। अब मेट्रो सिटी के अलावा आपको टियर टू और थ्री के शहरों में भी क्रेडिट कार्ड का चलन देखने को मिल जाएगा। डिजिटल दौर में क्रेडिट कार्ड हमारी रोज की जरूरतों में शामिल हो गया है। क्रेडिट रिपोर्ट जब आपने कभी खोली होगी तो वहां पर SMA लिखा देखा होगा। इसे देखते ही बहुत से लोग परेशान हो जाते हैं। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है। दरअसल, SMA कोई पेनल्टी नहीं, बल्कि बैंक की तरफ से दिया गया एक ‘अर्ली वार्निंग सिग्नल’ है। जैसे मोबाइल की बैटरी लो होने पर नोटिफिकेशन आता है, वैसे ही जब आपकी EMI या क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर नहीं जाता, तो बैंक अलर्ट हो जाते हैं।
SMA कोई NPA नहीं है, लेकिन वहां पहुंचने से पहले का आखिरी इशारा जरूर है। अगर इसे वक्त रहते संभाल लिया, तो लोन, क्रेडिट कार्ड और कम ब्याज वाले ऑफर आपके हाथ में रह सकते हैं। यही वजह है कि SMA को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, SMA का फुल फॉर्म ‘स्पेशल मेंशन अकाउंट’ है। ये बैंक या NBFC के लिए एक तरीका है कि वो उन अकाउंट्स को पहचानें जहां पेमेंट में थोड़ी-बहुत दिक्कत आ रही है, लेकिन अभी पूरी तरह खराब नहीं हुआ। जैसे, अगर आपका लोन EMI या क्रेडिट कार्ड का मिनिमम अमाउंट 90 दिन तक लेट हो जाता है, तो ये SMA के रूप में क्रेडिट रिपोर्ट में नजर आता है। कुल मिलाकर यह एक तरह का अलर्ट होता है कि ग्राहक समय पर भुगतान नहीं कर रहा है और उसका खाता जोखिम में है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने SMA को तीन हिस्सों में बांटा है। इसमें SMA-0, SMA-1 और SMA-2 शामिल हैं।
SMA–0: EMI 1 से 30 दिन लेट (छोटी सी चूक)
SMA–1: 31 से 60 दिन लेट (मामला गंभीर हो रहा है)
SMA–2: 61 से 90 दिन लेट (बहुत बड़ा खतरा)
NPA: 90 दिन से ज्यादा लेट होने पर अकाउंट NPA बन जाता है।
हर स्टेज पर बैंक यह स्थिति क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों (CICs) को रिपोर्ट करता है। SMA का मुख्य मकसद बैंक को पहले ही चेतावनी देना है ताकि वह समय रहते कार्रवाई कर सके और अकाउंट को NPA बनने से रोक सके।
SMA अकाउंट का क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ता है। जैसे-जैसे अकाउंट SMA–0 से SMA–2 और फिर NPA की ओर बढ़ता है, क्रेडिट स्कोर पर असर भी बढ़ता है। अगर एक से ज्यादा अकाउंट SMA में हैं, तो स्कोर पर असर और भी ज्यादा होता है।
1. समय पर भुगतान: EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं।
2. ऑटो-पेमेंट सेट करें: EMI या बिल का ऑटो-डेबिट तीन से पांच दिन पहले तय करें।
3. क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें: अगर कोई गलत जानकारी है तो बैंक को रिपोर्ट करें।
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