DDA Redevelopment: दिल्ली में 50 साल पुराने मकानों का होगा कायाकल्प, मालिकों को मिला दोबारा बनाने का रास्ता

DDA Redevelopment: दिल्ली में दशकों पुराने DDA के दो-मंजिला मकानों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। DDA ने ऐसे मकानों के रीडेवलपमेंट और दोबारा निर्माण के लिए एक समान नीति को मंजूरी दे दी है। इससे कई घर जहां 50 साल पहले बने थे, उनको बड़ी राहत मिलेगी।

Jitendra Singh
अपडेटेड13 Aug 2026, 11:57 AM IST
Add Mint as a preferred source on Google
DDA Redevelopment: दिल्ली के 50 साल पुराने मकानों पर बड़ा फैसला
DDA Redevelopment: दिल्ली के 50 साल पुराने मकानों पर बड़ा फैसला

DDA Redevelopment: दिल्ली में पांच दशक से ज्यादा पुराने DDA मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण का नया फैसला काफी अहम है। DDA ने पुराने दो-मंजिला मकानों के रीडेवलपमेंट के लिए समान नीति को मंजूरी दे दी है। इसका सीधा मतलब है कि पात्र मकानों के मालिक अब मौजूदा नियमों के तहत अपने पुराने घर को गिराकर दोबारा निर्माण करने का रास्ता अपना सकेंगे।

यह फैसला खास तौर पर उन पुरानी DDA हाउसिंग स्कीम के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां मकान कई दशक पहले बनाए गए थे और अब उनकी हालत पुरानी हो चुकी है। नरैना विहार इसका एक उदाहरण है, जहां कई मकान 50 साल से ज्यादा पुराने हैं। इस फ़ैसले से नारायणा विहार जैसी पुरानी DDA हाउसिंग स्कीम में रहने वाले लोगों को फायदा हो सकता है।

अब तक क्या परेशानी थी?

DDA की पुरानी व्यवस्था में खाली रिहायशी प्लॉट के रीडेवलपमेंट के लिए मौजूदा नियम स्पष्ट थे। लेकिन ऐसे व्यक्तिगत प्लॉट, जिन पर पहले से DDA के दो-मंजिला मकान बने हुए थे, उनके पुनर्निर्माण के लिए एक समान स्पष्ट नीति नहीं थी। यही अंतर पुराने मकानों के मालिकों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ था। अब DDA ने पात्र पुराने दो-मंजिला मकानों को रीडेवलपमेंट के मामले में खाली रिहायशी प्लॉट के समान अधिकार देने की नीति को मंजूरी दी है।

यह भी पढ़ें | 10 लाख में दिल्ली में मिल रहा घर, जानिए कैसे 50 हजार में बुक होगा DDA का य फ्लैट

किसे मिलेगा इस फैसले का फायदा?

यह फैसला दिल्ली के हर DDA फ्लैट या हर हाउसिंग सोसाइटी पर लागू नहीं होगा। नई नीति खास तौर पर व्यक्तिगत रिहायशी प्लॉट पर बने पुराने DDA के दो-मंजिला मकानों के लिए है। दिल्ली की कुछ पुरानी हाउसिंग स्कीमों में ऐसे मकान 1962 के मास्टर प्लान के दौर में विकसित किए गए थे और इनमें से कई अब पांच दशक से ज्यादा पुराने हो चुके हैं।

इसलिए किसी भी DDA संपत्ति के मालिक को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि वह इस नीति के तहत अपने मकान को स्वत: रीडेवलप कर सकता है। पात्रता और लागू प्लानिंग नियम देखना जरूरी होगा।

क्या अब मकान तोड़कर नया घर बना सकेंगे?

हां, लेकिन नियमों के तहत।

DDA की मंजूरी के बाद पात्र मालिक अपने पुराने मकान को हटाकर दोबारा निर्माण का रास्ता अपना सकेंगे। लेकिन निर्माण की सीमा प्लॉट के आकार और उस संपत्ति पर लागू मास्टर प्लान नियमों के आधार पर तय होगी।

निर्माण के दौरान मुख्य रूप से इन नियमों का पालन करना होगा

FAR यानी फ्लोर एरिया रेशियो, ग्राउंड कवरेज, बिल्डिंग की अधिकतम ऊंचाई, स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी और यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज। यानी DDA की मंजूरी को बिना किसी सीमा के निर्माण की अनुमति समझना गलत होगा।मालिकों को अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है। रीडेवलपमेंट के दौरान कुछ मामलों में कन्वर्जन चार्ज, स्क्रूटिनी फीस और बेटरमेंट लेवी जैसे शुल्क लागू हो सकते हैं। इसलिए मकान को दोबारा बनाने से पहले संबंधित संपत्ति पर लागू शुल्क और अनुमति की पूरी प्रक्रिया समझना जरूरी होगा।

यह भी पढ़ें | दिल्ली में घर खरीदने का शानदार मौका, पार्किंग चार्ज खत्म

प्रॉपर्टी मार्केट पर क्या असर पड़ेगा?

बिजनेस और रियल एस्टेट के नजरिए से देखें तो यह फैसला पुराने DDA हाउसिंग पॉकेट्स के लिए महत्वपूर्ण है। पुराने और कमजोर मकानों को दोबारा विकसित करने का रास्ता साफ होने से मौजूदा रिहायशी संपत्तियों की उपयोगिता बढ़ सकती है। जहां पहले पुराने मकान को दोबारा बनाने के लिए स्पष्ट नीति का अभाव था, वहां अब नियामकीय ढांचा मिलने से मालिकों के लिए रीडेवलपमेंट की योजना बनाना आसान हो सकता है। हालांकि किसी संपत्ति की कीमत पर इसका वास्तविक असर इलाके, प्लॉट साइज, निर्माण की अनुमति और स्थानीय रियल एस्टेट डिमांड जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

नरैना विहार समेत कई इलाकों को फायदा

DDA ने नारायणा विहार (Naraina Vihar) को ऐसे पुराने DDA हाउसिंग इलाकों के उदाहरण के तौर पर बताया है। लेकिन नई नीति सिर्फ इसी इलाके तक सीमित नहीं रहेगी। दिल्ली की दूसरी ऐसी DDA हाउसिंग स्कीम भी इसके दायरे में आ सकती हैं, जहां इसी तरह के पुराने दो-मंजिला मकान व्यक्तिगत प्लॉट पर बने हैं। यानी इसका असर सिर्फ एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है।

DDA ने मास्टर प्लान दिल्ली-2047 को भी दी मंजूरी

इसी बैठक में DDA ने मास्टर प्लान दिल्ली-2047 को भी मंजूरी दी है। यह प्लान दिल्ली में आने वाले वर्षों के हाउसिंग, मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, पर्यावरण, अर्बन रीजेनरेशन और हेरिटेज कंजर्वेशन से जुड़े विकास की दिशा तय करेगा। हालांकि DDA की मंजूरी के बाद भी यह अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है। इसे आगे केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के पास अंतिम मंजूरी और नोटिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा।

बिल्डिंग अप्रूवल की प्रक्रिया भी आसान करने की तैयारी

DDA ने यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज, 2016 में बदलाव को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य बिल्डिंग प्लान की मंजूरी में लगने वाले समय और प्रक्रियागत बोझ को कम करना है। प्रस्तावित बदलाव में चार एजेंसियों से पहले से एनओसी लेने की जरूरत को बिल्डिंग परमिट प्रक्रिया से अलग करने की बात है। इनमें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्टरीज, दिल्ली जल बोर्ड और वन विभाग शामिल हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि दूसरी सभी कानूनी और वैधानिक जिम्मेदारियां खत्म हो जाएंगी।

यह भी पढ़ें | दिल्ली में घर खरीदने का सुनहरा मौका, आज से रजिस्ट्रेशन शुरू

रिठाला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर को भी मंजूरी

DDA ने नरेला सब-सिटी के जोन पी-I में 19.63 हेक्टेयर जमीन के लैंड यूज में बदलाव को भी मंजूरी दी है। इस जमीन का इस्तेमाल रिठाला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के लिए मेट्रो डिपो विकसित करने में किया जाएगा। भूमि का इस्तेमाल रिक्रिएशनल और पब्लिक एंड सेमी-पब्लिक से बदलकर ट्रांसपोर्टेशन किया जाएगा।

Get Latest real-time updates

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

होममनीDDA Redevelopment: दिल्ली में 50 साल पुराने मकानों का होगा कायाकल्प, मालिकों को मिला दोबारा बनाने का रास्ता
More