2008 में दिल्ली सरकार ने बेटियों की पढ़ाई और भविष्य संवारने के लिए जो ‘लाडली योजना’ शुरू की थी, उसकी रफ्तार अब थमती नजर आ रही है। सूचना के अधिकार (RTI) से पता चला है कि पिछले 15 सालों में इस योजना का लाभ लेने वाली बच्चियों की संख्या लगभग 50% घट चुकी है।
पहले साल एक लाख से ज्यादा बेटियों को मिला फायदा
2008-09 में योजना के 1,26,965 लाभार्थी थे। लेकिन 2024-25 में यह संख्या घटकर सिर्फ 53,001 रह गई, जो पिछले 5 सालों में दूसरी बार सबसे कम रही है। इससे पहले 2019-20 में सिर्फ 30,192 लड़कियों को योजना का लाभ मिला था।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि 2008 से 2025 तक कुल 13,52,564 लड़कियों ने योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।
साल दर साल घटते आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2009-10 में लाडली योजना से 1,39,223 लड़कियों को फायदा मिला था। इसके बाद 2010-11 में यह संख्या घटकर 1,05,737 रह गई और 2011-12 में मामूली बढ़त के साथ 1,06,585 लड़कियों को लाभ मिला। इसके बाद से हर साल लाभार्थियों की संख्या धीरे-धीरे गिरती गई — 2012-13 में 96,800, 2013-14 में 89,243, 2014-15 में 82,669, 2015-16 में 74,846, और 2016-17 में 68,193 बच्चियों को योजना का लाभ मिला।
गिरावट का यह सिलसिला आगे भी जारी रहा, जहां 2017-18 में 67,070, 2018-19 में 60,903, और 2019-20 में सिर्फ 30,192 लाभार्थी रहे, जो अब तक की सबसे कम संख्या थी। हालांकि इसके बाद कुछ सुधार देखने को मिला — 2020-21 में 61,546, 2021-22 में 62,749, 2022-23 में 64,637, और 2023-24 में 62,205 बच्चियों ने योजना का लाभ उठाया, लेकिन ये आंकड़े फिर भी शुरुआती वर्षों की तुलना में काफी कम हैं।
कम हो रहे लाभार्थियों के पीछे क्या हैं वजहें?
महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि लड़कियों का बीच में स्कूल छोड़ देना, पंजीकरण का नवीनीकरण न कराना और योजना की जानकारी का अभाव इसका सबसे बड़ा कारण है।
उन्होंने ये भी कहा कि जो लड़कियां योजना का लाभ नहीं ले पातीं, वो अक्सर फॉर्म भरवाने, दस्तावेज जुटाने और बैंक से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर उलझन में रहती हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि जनवरी तक लगभग 1.86 लाख लाभार्थियों ने योजना के तहत मिलने वाली राशि का दावा ही नहीं किया, और करीब 1.66 लाख लड़कियों ने या तो आवेदन नवीनीकरण नहीं कराया या फिर स्कूल छोड़ दिया।
कितनी रकम मिलती है योजना में?
इस योजना के तहत कुल 35–36 हजार रुपये तक की मदद किश्तों में दी जाती है। यह रकम बेटी के 18 साल के होने पर ब्याज समेत बैंक खाते से निकाली जा सकती है। यह राशि अलग-अलग क्लास (जैसे पहली, छठी, नवमीं, बारहवीं) में दी जाती है।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक मिताली नामचूम से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।
लाडली योजना जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बेटियों को सशक्त बनाना है। लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि अगर जागरूकता और प्रक्रिया की सुगमता पर ध्यान न दिया गया, तो ये उद्देश्य अधूरा ही रह जाएगा।