
टैक्स से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए डेलॉइट (Deloitte) ने एक अहम कदम उठाया है। जल्द ही एक नया AI वाला प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसका नाम ‘टैक्स प्रज्ञा’ है। इससे क्लाइंट्स को टैक्स से जुड़ी रिसर्च और जानकारी बहुत तेजी से मिल सकेगी। कंपनी के एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी है। बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, Deloitte इंडिया के पार्टनर सुमित सिंघानिया ने बताया कि ‘टैक्स प्रज्ञा’ को 9 दिसंबर को लॉन्च किया जाएगा। इसमें डायरेक्ट और इंडायरेक्ट टैक्स से संबंधित दस लाख से ज्यादा कोर्ट केसों की जानकारी और Deloitte के अपने नॉलेज पेपर्स शामिल किए गए हैं। इससे जानकारी मिलना तेज और सटीक हो जाएगा।
मौजूदा समय में टैक्स एनालिस्ट्स को क्लाइंट्स को सलाह देने से पहले अलग-अलग कोर्ट जजमेंट्स पर घंटों रिसर्च करनी पड़ती है। लेकिन ‘टैक्स प्रज्ञा’ से यह काम कुछ ही मिनटों में हो जाएगा। यह जवाब डिलॉइट (Deloitte) के अपने प्राइवेट डेटाबेस से देगा, न कि ओपन सोर्स डेटा से।
PTI से बातचीत करते हुए सिंघानिया ने कहा कि "टैक्स प्रज्ञा एक AI-पावर्ड टैक्स, रिसर्च और इनसाइट प्लेटफॉर्म है। इसमें Deloitte के दो दशक के टैक्स नॉलेज, अनुभव और कोर्ट केसों की समझ भरी गई है। हमारा मकसद है कि यह सिर्फ जानकारी देने वाला न रहे, बल्कि उपयोगी इनसाइट्स दे। यह एक एजेंटिक सॉल्यूशन है, जो रिसर्च को और बेहतर बनाकर फौरन इस्तेमाल कर सकेंगे।
सिंघानिया ने आगे बताया कि ‘टैक्स प्रज्ञा’ बजट में होने वाले ऐलान की लगभग रियल-टाइम जानकारी देगा और इनकम टैक्स कानून में बदलाव को 1 अप्रैल से लागू होने से पहले ही मुहैया करा दिया जाएगा। यह B2B सब्सक्रिप्शन आधारित प्लेटफॉर्म होगा, जो टैक्स कंसल्टेंट्स की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनका काम सिर्फ आसान और तेजी से करेगा।
सिंघानिया ने कहा कि हमारा विज़न है कि टैक्स प्रज्ञा को कुछ इस तरह से डेवलप करना है कि अगले 12-18 महीनों में यह लीगल या टैक्स ओपिनियन लिख सके। इसे टैक्स नोटिस का एक प्रेडिक्टिव एनालिसिस देना चाहिए। टैक्सपेयर को नोटिस पर केस करना चाहिए या नहीं, ऐसी तमाम जानकारी मिल सकेगी।
बता दें कि लॉन्च होते ही पहले चरण में यह 500 डिलॉइट क्लाइंट्स को मिलेगा। इसके बाद जनवरी में दूसरे चरण में सभी 5,000 क्लाइंट्स तक पहुंच जाएगा। अगले साल जून तक इसे पूरे देश में मुहैया करा दिया जाएगा। भविष्य में टैक्स प्रज्ञा का सब्सक्रिप्शन MSME और SME कंपनियां भी ले सकेंगी।
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