Cyber Crime: बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ ठगे, जानिए पैसे सुरक्षित रखने के 5 जरूरी टिप्स

Digital Arrest: देश में डिजिटल अरेस्ट स्कैम तेजी से बढ़ रहा है। इसमें जालसाज अधिकारी बनकर पीड़ितों पर दबाव डालते हैं। उन्हें डरा-धमकाकर पैसे ऐंठते हैं। इससे यह साफ होता है कि नुकसान से बचने के लिए जागरूकता, सही पहचान और समय पर रिपोर्ट करने की कितनी सख्त जरूरत है।

Jitendra Singh( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट.कॉम)
अपडेटेड20 Mar 2026, 04:08 PM IST
Digital arrest: पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Digital arrest: पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Digital Arrest: साइबर ठगों ने एक कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर करीब 1.3 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी है। मामला सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाने का है। यूपी के ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर बेहद शातिर तरीके से एक बुजुर्ग कारोबारी को निशाना बनाकर बड़ी ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया। ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर निवासी 72 वर्षीय दिलीप कुमार दास को ठगों ने करीब 20 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर करवा ली। पीड़ित ने 12 मार्च को इस मामले में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सेक्टर- 36 साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस को दी शिकायत में ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर निवासी ने बताया कि इसी साल 6 फरवरी को उनके पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताया और कहा कि पीड़ित के नाम पर एक सिम कार्ड जारी हुआ है, जिसका इस्तेमाल गैरकानूनी कामों में हो रहा है। इसके बाद ठग ने डराते हुए कहा कि मामला गंभीर है और जांच एजेंसियां इसमें लगी हुई हैं।

दो दिन तक बनाया बंधक

वीडियो कॉल पर उन्होंने कोर्ट जैसी सेटिंग दिखाई गई और कहा गया कि सहयोग नहीं करेंगे तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ठगों ने पीड़ित पर दबाव बनाया और कहा कि उसके बैंक खातों की जांच होगी। जांच पूरी होने तक घर से बाहर नहीं जाना है और फोन कॉल चालू रखना है। करीब दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर खाते का सत्यापन के नाम पर पीड़ित से रकम ट्रांसफर कराई गई। पैसे ट्रांसफर करने के बाद भी ठगों ने पीड़ित को भरोसे में रखने के लिए फर्जी दस्तावेज भेजे। उन्हें सुप्रीम कोर्ट और मुंबई पुलिस के नाम से फर्जी लेटर भेजा गया और कहा गया कि उन्हें नोड्यूज सर्टिफिकेट मिल गया है और पैसे जल्द वापस कर दिए जाएंगे। लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी पैसे वापस नहीं मिले तब जाकर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।

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डिजिटल अरेस्ट क्या है?

साइबर ठग भोले-भाले लोगों को डिजिटल अरेस्ट करते हैं। डिजिटल अरेस्ट में विक्टिम को ऑनलाइन मोड पर रहते हुए पूछताछ में शामिल होने को कहा जाता है। इसके बाद सामने वाला शख्स फर्जी जांच के नाम पर अलग-अलग सवाल करते हैं और यहां तक कि बैंक डिटेल्स तक हासिल कर लेते हैं। इस दौरान विक्टिम को फर्जी कोर्ट, जज, वकील और पुलिस आदि भी दिखाए जा सकते हैं।

डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए इन बातों को रखे ध्यान

  1. ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज नहीं होती

एक समझदार नागरिक के तौर पर, हमेशा यह बात ध्यान में रखें कि कानून के तहत ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज नहीं होती। भारतीय संविधान और अन्य कानूनों में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, कानून लागू करने वाली एजेंसियां ​​कभी भी वीडियो कॉल या मैसेजिंग ऐप्स के जरिए जांच या गिरफ्तारी नहीं करती। ऐसे किसी भी दावे को नज़रअंदाज़ किया जाना चाहिए और उसकी रिपोर्ट की जानी चाहिए। यह एक साफ संकेत है कि कुछ गड़बड़ है।

2. भरोसा करने से पहले करें जांच-पड़ताल

आम तौर पर, धोखेबाज अक्सर CBI, NIA, TRAI जैसी सरकारी एजेंसियों के बड़े अधिकारियों के रूप में सामने आते हैं। ऐसे लोगों पर भरोसा करने से पहले, तथ्यों और जानकारियों की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल जरूर कर लें। अगर जरूरत पड़े, तो अपने नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाकर संबंधित अधिकारियों से बात करके पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट कर लें। धोखेबाजों की ऊपरी दिखावट के झांसे में न आएं।

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3. दबाव में आकर कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें

धोखेबाज पीड़ितों को समझदारी से सोचने से रोकने के लिए, उनमें जल्दबाजी और दबाव पैदा करने पर जोर देते हैं। यह बात साफ है कि, भरोसेमंद लोन देने वाली संस्थाएं और कानूनी अधिकारी कभी भी किसी तरह के 'चार्ज' चुकाने के लिए पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहते। ऐसी किसी भी मांग को तुरंत ठुकरा देना चाहिए और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए।

4. जल्द से जल्द रिपोर्ट करें

भले ही आपको यह साफ़ पता हो कि अपराधी आपको निशाना बना रहे हैं, लेकिन इसे नजरअंदाज करने के बजाय, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस स्कैम की रिपोर्ट करने की कोशिश करें: https://cybercrime.gov.in/Default.aspx. इससे धोखेबाज़ों को दूसरों को ठगने से रोका जा सकेगा और अगर कोई पैसा खो गया है, तो उसे वापस पाने की संभावनाएँ भी बढ़ जाएंगी।

5. परिवार के साथ हमेशा जुड़े रहें

इस तरह के घोटालों के दौरान, जालसाज अक्सर पीड़ितों को सबसे अलग-थलग कर देते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि वे किसी अन्य भरोसेमंद अधिकारी, अपने परिवार या दोस्तों से संपर्क न कर सकें। इसलिए, अगर आपको इस तरह के कोई कॉल, मैसेज या ईमेल आते हैं, तो डर या शर्मिंदगी में आकर कोई कदम उठाने से पहले, तुरंत अपने परिवार या दोस्तों को इस बारे में बताएं।

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