
Digital Arrest Scam: इंटरनेट और स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी जितनी आसान बनाई है, उतनी ही सहूलियत साइबर ठगों को भी दे दी है। साल 2025 डिजिटल क्रांति के लिए जितना बड़ा रहा, साइबर फ्रॉड के लिहाज से उतना ही खतरनाक साबित हुआ। अब ठग पुराने तरीकों को छोड़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 'वॉयस क्लोनिंग' जैसे हाई-टेक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आज के दौर में अगर आपके पास आपके बच्चे या किसी रिश्तेदार की आवाज में फोन आए और सामने वाला खुद को पुलिस बताकर आपको डराने लगे, तो चौंकिए मत, हो सकता है यह आपको 'डिजिटल अरेस्ट' करने की एक साजिश हो।
साल 2025 में 'डिजिटल अरेस्ट' सबसे डरावना स्कैम बनकर उभरा है। इसमें ठग पुलिस या सरकारी अफसर बनकर वीडियो कॉल करते हैं। वे आपको डराते हैं कि आपके नाम पर कोई गैरकानूनी पार्सल पकड़ा गया है या आपके किसी करीबी ने कोई जुर्म किया है।
भारत में डिजिटल पेमेंट जितनी तेजी से बढ़ा, उतनी ही तेजी से ठगी का कारोबार भी फैला। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि 2024-25 में शिकायतों में 42% का उछाल आया और कुल 22.7 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। इस दौरान भारतीयों ने करीब 22,845 करोड़ रुपये गंवाए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अकाउंट टेकओवर और ऐप फ्रॉड को जोड़ दें, तो यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये सालाना के पार पहुंच जाता है।
SURE (AI-पावर्ड प्लेटफॉर्म) के को-फाउंडर प्रवीण तिवारी कहते हैं कि 2025 वह साल रहा जब फ्रॉड सिर्फ बातों से नहीं बल्कि AI की मदद से होने लगा। अब ठग सोशल मीडिया से आपके परिवार की महज कुछ सेकंड की ऑडियो क्लिप चुराते हैं और AI के जरिए बिल्कुल वैसी ही आवाज निकाल लेते हैं। इसी तकनीक का इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट' में होता है।
Vartis Platforms के को-फाउंडर दीपेश कार्की के मुताबिक, ये स्कैम अब पहले से कहीं ज्यादा जटिल हो गए हैं, जहां अपराधी सीधे आपके बैंक खाते पर कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं।
ठगी का यह जाल सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। Cashfree Payments के को-फाउंडर रीजू दत्ता बताते हैं कि अब ठग 'हाइपर-ऑटोमेटेड' हमलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें बॉट्स (Bots) के जरिए डिलीवरी अलर्ट भेजे जाते हैं या छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन करके सेंडर की पहचान जांची जाती है। वहीं, NPST की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सविता वशिष्ठ ने चेतावनी दी है कि यूपीआई (UPI) नेटवर्क में मर्चेंट लेवल पर होने वाली चूक पूरे इकोसिस्टम को खतरे में डाल सकती है।
बुजुर्ग: गृह मंत्रालय (MHA) के डेटा के अनुसार, सीनियर सिटीजन्स ने डरा-धमकाकर की गई ठगी में 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खोए हैं।
युवा: युवाओं को 'पार्ट-टाइम जॉब' और 'इन्वेस्टमेंट' के नाम पर निशाना बनाया गया।
ग्रामीण इलाके: यहां फिशिंग और यूपीआई के जरिए पैसे उड़ाने के मामले सबसे ज्यादा देखे गए।
साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए सरकार अप्रैल 2026 तक डिवाइस-सिम बाइंडिंग जैसे कड़े नियम ला रही है। आरबीआई (RBI) ने भी बैंकों को 'जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर' और AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम अपनाने का निर्देश दिया है, ताकि किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन को होने से पहले ही रोका जा सके।
डिजिटल इंडिया जितना आगे बढ़ेगा, डिजिटल ठगी भी उतनी ही चालाक होती जाएगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर कॉल, हर ऐप और हर ट्रांजैक्शन से डरकर बैठ जाना है। असली जरूरत है समझदारी, थोड़ी सावधानी और जल्दी प्रतिक्रिया की। 2025 ने यह साफ कर दिया कि ठग अब सिर्फ तकनीक नहीं, आपकी भावनाओं पर हमला कर रहे हैं। 2026 का सबसे बड़ा सबक यही है कि पैनिक नहीं, वेरिफिकेशन की आदत डालिए। कई बार सिर्फ एक कॉल काट देना ही आपकी पूरी बचत बचा सकता है।
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