
Digital Gold: डिजिटल गोल्ड हाल के सालों में निवेश का आसान और काफी पॉपुलर तरीका बन गया है। कई मोबाइल ऐप या बहुत से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कुछ ही मिनटों में सोना खरीदा या बेचा जा सकता है। इसलिए बहुत से लोग इसे सेफ इन्वेस्टमेंट मान लेते हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ी भूल यही होती है कि लोग नियम और रिस्क को समझे बिना पैसा लगा देते हैं। कुछ समय पहले सेबी ने निवेशकों को डिजिटल गोल्ड से दूर रहने की सलाह दी थी. ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे पेटीएम, गूगल पे, फोन पे पर बिकता है। इन्हें न तो इन्हें सिक्योरिटी माना जाता है, न ही कमोडिटी डेरिवेटिव। यानी, अगर प्लेटफॉर्म डिफॉल्ट करे तो सेबी कोई प्रोटेक्शन नहीं दे पाएगी।
कुछ ही महीनों पहले तक डिजिटल गोल्ड में खूब पैसा लोग लगा रहे थे। मोबाइल ऐप खोलिए, UPI से एक क्लिक में पेमेंट कीजिए और सोना आपके डिजिटल वॉलेट में जमा हो जाएगा। इधर SEBI ने जैसे ही यह चेतावनी दी कि डिजिटल गोल्ड भारत में किसी भी संस्था द्वारा रेगुलेटेड नहीं है तो लोगों ने डिजिटल गोल्ड से किनारा करना शुरू कर दिया है।
डिजिटल गोल्ड में अगर आप निवेश कर रहे हैं तो पहले आपको रिस्क फैक्टर के बारे में भी जरूर जान लेना चाहिए। जिस भी प्लेटफॉर्म या ऐप के जरिए आप डिजिटल गोल्ड खरीद रहे हैं, उस प्लेटफॉर्म के बारे में सभी जानकारी रखें। यानी प्लेटफॉर्म की शर्तों और नियमों के बारे में जरूर जान लें। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता भी जांच कर लें। जल्दबाजी के चक्कर में किसी भी फर्जी प्लेटफॉर्म से डिजिटल गोल्ड न खरीदें। इसके लिए हमेशा SEBI या RBI अप्रूव्ड वेबसाइट से डिजिटल गोल्ड खरीदें।
डिजिटल गोल्ड कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वॉलेट ऐप्स पर मौजूद है। लेकिन सभी भरोसेमंद नहीं होते। कुछ प्लेटफॉर्म सिर्फ बिचौलिये की भूमिका निभाते हैं। जिनके पास खुद सोने का स्टॉक नहीं होता। ऐसे में अगर कंपनी का सर्वर बंद हुआ या प्लेटफॉर्म किसी विवाद में फंसा तो फिर आपका निवेश फंस सकता है।
डिजिटल गोल्ड सोने का डिजिटल रूप है। इसे आप ऐप्स के जरिए खरीद सकते हैं और कंपनी वॉल्ट में उतना ही फिजिकल गोल्ड रखती है। SIP की तरह इंस्टॉलमेंट में भी खरीद सकते हैं। भारत में ये 2012 में ऑगमॉन्ट ने इसे शुरू किया था। कंपनी ने देखा कि लोग सोना तो पसंद करते हैं, लेकिन छोटे अमाउंट में खरीदना मुश्किल है तो उन्होंने 1 रुपए से फ्रैक्शनल खरीदारी लॉन्च की।
थर्ड-पार्टी वॉल्ट में सोना रखा जाता है और डिलीवरी ऑप्शन भी है। ऑगमेंट के बाद MMTC-PAMP आया, जो गवर्नमेंट की MMTC और स्विस MKS PAMP का जॉइंट वेंचर है। ये भारत का सबसे बड़ा गोल्ड रिफाइनर और कस्टोडियन है। पोटीएम, फोनपे, मोतीलाल ओसवाल जैसी कंपनियों के साथ इसने पार्टनरशिप की, जिससे ये पॉपुलर हो गया।
SEBI इसे सिक्योरिटी या कमोडिटी डेरिवेटिव नहीं मानता। वहीं RBI भी इसे बैंकिंग या डिपॉजिट प्रोडक्ट नहीं मानता। इसलिए इसे रेगुलेट करना मुश्किल है। ये बिजनेस अभी प्लेटफॉर्म के ट्रस्ट पर चल रहा है। 2021 में डिजिटल गोल्ड का मार्केट 5,000 करोड़ का था, जो 13,800 करोड़ रुपये का हो चुका है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने जोखिम प्रोफाइल का मूल्यांकन करें और योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। बाजार की स्थितियां और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।)
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