Digital Payment: डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए RBI ने बनाया पक्का प्लान, अगले साल लागू होंगे नए नियम

RBI New Rules on Digital Payments: डिजिटल पेमेंट को और ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने नए नियम बना दिए हैं। अब ऑनलाइन पेमेंट के लिए OTP के अलावा फिंगरप्रिंट, पासवर्ड और बायोमेट्रिक ऑप्शन रहेंगे। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

Jitendra Singh
अपडेटेड26 Sep 2025, 06:56 PM IST
RBI New Rules on Digital Payments: SMS OTP का इस्तेमाल पहले की ही तरह जारी रहेगा।
RBI New Rules on Digital Payments: SMS OTP का इस्तेमाल पहले की ही तरह जारी रहेगा।

RBI New Rules on Digital Payments: आजकल डिजिटल पेमेंट तेजी आई है। इससे फ्रॉड का खतरा भी बढ़ा है। इसबीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने डिजिटल पेमेंट्स को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कुछ जरूरी बदलाव किए है। ये बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इसमें ऑनलाइन पेमेंट्स में टू- फैक्टर ऑथेंटिकेशन की तैयारी की जा रही है। SMS OTP के अलावा पासवर्ड, फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक्स जैसे कई नए तरीकों से ट्रांजैक्शन किए जा सकेंगे। RBI इन तरीको से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को और अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना चाहती है, ताकि लोगों को धोखाधड़ी और साइबर क्राइम से बचाया जा सके।

RBI ने सख्त दिशा निर्देश दिए है कि इन ऑनलाइन पेमेंट्स के दौरान इन नियमों का पालन ना करने वाले ग्राहकों को यदि किसी प्रकार का नुकसान होता है, तो ग्राहक को अपने नुकसान की पूरी भरपाई खुद करनी होगी।

जानिए RBI के क्या हैं नए नियम

RBI ने डिजिटल पेमेंट्स के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को और मजबूत करने पर फोकस किया है। पहले ज्यादातर बैंक और पेमेंट ऐप्स सिर्फ SMS OTP पर निर्भर थे, लेकिन अब इसे और मजबूत किया जा रहा है। अब टू-फैक्टर में SMS OTP के अलावा पासवर्ड, पिन, पासफ्रेज, हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर टोकन, फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन या अन्य बायोमेट्रिक तरीके इस्तेमाल किए जा सकेंगे। ये फैक्टर्स तीन कैटेगरी में बांटे गए हैं – ‘यूजर के पास कोई चीज’ (जैसे मोबाइल), ‘यूजर को पता कोई चीज’ (जैसे पासवर्ड), या ‘यूजर की पहचान’ (जैसे बायोमेट्रिक्स) होंगे। हर ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम एक ऑथेंटिकेशन फैक्टर नया और यूनीक होना चाहिए। कहने का मतलब ये हुआ कि पुराने या रीयूजेबल कोड्स से काम नहीं चलेगा। अब हर बार नया फ्रेश वेरिफिकेशन होगा।

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बैंक या पेमेंट प्रोवाइडर्स अब ट्रांजैक्शन की रिस्क का आकलन कर सकेंगे। इसमें लोकेशन, यूजर का व्यवहार, डिवाइस डिटेल्स और पुरानी हिस्ट्री जैसी चीजें देखी जाएंगी। हाई-रिस्क वाले पेमेंट्स पर एक्स्ट्रा जांच होगी।

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नुकसान पर मिलेगा मुआवजा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा है कि अगर इन निर्देशों का पालन न करने की वजह से कस्टमर को कोई आर्थिक नुकसान होता है, तो इश्यूअर को उसका पूरा मुआवजा देना होगा। इसके साथ ही कार्ड जारी करने वालों को 1 अक्टूबर 2026 से ओवरसीज एक्वायरर, नॉन-रिकरिंग और क्रॉस बॉर्डर कार्ड-नॉट-प्रेजेंट (CNP) लेनदेन के लिए भी वैलिडेशन का मैकेनिज्म लागू करना होगा।

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