Digital Payments: आज के समय में लगभग हर कोई ऑनलाइन पेमेंट करना पसंद करता है। ऑनलाइन पेमेंट ने कई काम आसान कर दिए हैं, क्योंकि अब न तो बार-बार एटीएम जाकर कैश निकालने की झंझट होता है और न ही चेंज रखने की परेशानी। देश में ज्यादातर लोग पेमेंट के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। राज्यसभा में भाजपा के वरिष्ठ सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने इसकी सुरक्षा और इससे जुड़े कानूनी पेच को लेकर एक बेहद गंभीर सवाल उठाया है।
उन्होंने सरकार का ध्यान उस खतरे की ओर आकर्षित किया है जहां कोई भी व्यक्ति किसी निर्दोष नागरिक के खाते में बिना उसकी सहमति के पैसे भेजकर उसे कानूनी पचड़े में फंसा सकता है। सदन में डॉ. अग्रवाल ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी से पूछा कि क्या सरकार इस जोखिम से वाकिफ है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UPI के विस्तार के बाद विदेशी धरती से भेजा गया ‘अवैध धन’ किसी भी भारतीय को अनजाने में अपराधी बना सकता है।
डॉ. अग्रवाल ने सदन में पूछे कई सवाल
डॉ. अग्रवाल ने पूछा कि अगर पैसे भेजने वाला व्यक्ति किसी गैरकानूनी या आपराधिक गतिविधि में शामिल हो तो क्या पैसे प्राप्त करने वाला निर्दोष व्यक्ति भी उन अपराधों में हिस्सेदार माना जाएगा? इसके बाद उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में UPI को 8 विदेशी देशों भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)से जोड़ा है।
ऐसे में अगर इनमें से किसी देश जैसे मॉरीशस से कोई व्यक्ति किसी भारतीय के खाते में पैसे ट्रांसफर कर दे और बाद में वह खाता किसी जांच या मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंस जाए, तो क्या सिर्फ पैसे आने की वजह से उस भारतीय नागरिक को भी भ्रष्टाचार या अपराध में शामिल मान लिया जाएगा? क्या सरकार UPI सिस्टम में ऐसा कोई प्रावधान लाने पर विचार कर रही है, जिससे बिना सहमति के आए पैसे की स्थिति में प्राप्तकर्ता को कानूनी परेशानी से बचाया जा सके?
वित्त राज्य मंत्री ने दिया यह जवाब
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि माननीय सदस्य की ओर से उठाया गया यह सवाल बेहद अहम है। उन्होंने स्वीकार किया कि बिना अनुमति के किसी के खाते में पैसे ट्रांसफर होने की संभावना मौजूद हो सकती है और यह जांच का विषय है। मंत्री ने आगे कहा कि माननीय सदस्य ने जो बात रखी है और जो सुझाव दिया है, उसे हमने नोट कर लिया है। इस मुद्दे पर सरकार निश्चित रूप से कार्रवाई करेगी।
यह सवाल ऐसे समय में उठा है, जब UPI भारत में सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट माध्यम बन चुका है। अब इसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार के साथ सुरक्षा, गोपनीयता और कानूनी जिम्मेदारी से जुड़े सवाल और भी गंभीर हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में स्पष्ट कानूनी दिशानिर्देश और सुरक्षा उपायों की जरूरत है ताकि आम नागरिक अनजाने में कानूनी पचड़े में न फंसे।
UPI यूजर्स इन बातों का रखें ध्यान
1. अपने UPI आईडी को सार्वजनिक रूप से साझा करने से बचें।
2. खाते में अचानक आए किसी भी अज्ञात पैसे की सूचना तुरंत बैंक और साइबर सेल को देना चाहिए।
3. उस पैसे का उपयोग न करें, क्योंकि वह किसी बड़ी जांच का हिस्सा हो सकता है।