
Digital Savings Account: डिजिटल सेविंग अकाउंट सामान्य सेविंग अकाउंट की तरह ही बैंक में पैसा रखने और रोजमर्रा के लेनदेन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। फर्क इतना है कि इसे खोलने की प्रक्रिया काफी हद तक ऑनलाइन होती है। कई बैंक मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए अकाउंट खोलने की सुविधा देते हैं। ग्राहक को सामान्य तौर पर पैन, आधार और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी देनी होती है और फिर वीडियो KYC पूरी करनी पड़ सकती है। KYC पूरा होने के बाद अकाउंट एक्टिव किया जाता है।
यानी डिजिटल सेविंग अकाउंट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बैंकिंग आपके मोबाइल तक आ जाती है। अकाउंट खोलने की प्रक्रिया बैंक के हिसाब से अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर इसमें कुछ प्रमुख चरण होते हैं। सबसे पहले ग्राहक को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद पैन और आधार जैसी जानकारी से पहचान की पुष्टि की जाती है। कई बैंकों में इसके बाद वीडियो KYC होती है। KYC पूरी होने के बाद ग्राहक को अकाउंट में शुरुआती रकम जमा करनी पड़ सकती है और फिर अकाउंट इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में ब्रांच जाने की जरूरत नहीं पड़ सकती है।
डिजिटल सेविंग अकाउंट का सबसे बड़ा फायदा यही है कि ग्राहक को अकाउंट खोलने के लिए हर बार बैंक ब्रांच जाने की जरूरत नहीं होती। ऑनलाइन आवेदन और वीडियो KYC के जरिए प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
फॉर्म भरने, दस्तावेज जमा करने और ब्रांच में इंतजार करने की जरूरत कम हो जाती है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के जरिए बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाती है।
अकाउंट का बैलेंस देखना, पैसे ट्रांसफर करना, बिल भरना, UPI से भुगतान करना या कार्ड को मैनेज करना जैसे कई काम मोबाइल ऐप और इंटरनेट बैंकिंग से किए जा सकते हैं।
डिजिटल सेविंग अकाउंट को UPI और दूसरे ऑनलाइन पेमेंट माध्यमों से जोड़ा जा सकता है। इससे रोजमर्रा के भुगतान और पैसे भेजने का काम आसान हो जाता है।
अकाउंट खोलने और बैंकिंग से जुड़े कई काम ऑनलाइन होने के कारण कागजी प्रक्रिया कम हो सकती है। स्टेटमेंट और दूसरी जानकारी भी डिजिटल माध्यम से मिल सकती है।
डिजिटल सेविंग अकाउंट को सिर्फ सुविधा देखकर नहीं चुनना चाहिए। इसके कुछ ऐसे पहलू हैं जिन पर अकाउंट खोलने से पहले ध्यान देना जरूरी है।
सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि डिजिटल अकाउंट का मतलब हमेशा जीरो बैलेंस अकाउंट होता है। ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ डिजिटल सेविंग अकाउंट में औसत मासिक या तिमाही बैलेंस बनाए रखने की शर्त हो सकती है। बैलेंस कम होने पर बैंक के नियमों के अनुसार चार्ज लग सकता है। इसलिए अकाउंट खोलने से पहले Minimum Balance Requirement जरूर चेक करें।
कुछ अकाउंट में डेबिट कार्ड की फीस, वार्षिक शुल्क या कार्ड बदलने पर चार्ज लग सकता है। इसलिए सिर्फ अकाउंट खोलने की फीस देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पूरे Schedule of Charges को देखना जरूरी है।
डिजिटल बैंकिंग बढ़ने के साथ ऑनलाइन फ्रॉड का जोखिम भी महत्वपूर्ण हो जाता है। OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग डिटेल किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा करना नुकसानदायक हो सकता है। ग्राहक को केवल बैंक के आधिकारिक ऐप और वेबसाइट का इस्तेमाल करना चाहिए और संदिग्ध लिंक से बचना चाहिए।
जिन लोगों को बैंक ब्रांच में जाकर काम करना पसंद है या जिन्हें डिजिटल बैंकिंग की ज्यादा जानकारी नहीं है, उनके लिए डिजिटल अकाउंट हमेशा सबसे सुविधाजनक विकल्प नहीं हो सकता। इसके अलावा कुछ विशेष बैंकिंग सेवाओं के लिए ब्रांच जाने की जरूरत पड़ सकती है।
अगर आप ज्यादा समय ब्रांच में नहीं बिताना चाहते, मोबाइल से बैंकिंग करना पसंद करते हैं और UPI व ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का नियमित इस्तेमाल करते हैं तो डिजिटल सेविंग अकाउंट आपके लिए सुविधाजनक हो सकता है। खासकर ऐसे लोगों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है जिन्हें तेजी से अकाउंट खोलना और रोजमर्रा की बैंकिंग मोबाइल से मैनेज करना पसंद है। लेकिन अगर आपको बार-बार कैश जमा करना, चेक से जुड़े काम या ब्रांच में जाकर बैंकिंग सेवाएं लेना पसंद है तो सामान्य सेविंग अकाउंट भी बेहतर विकल्प हो सकता है।
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