EMI और SIP के बीच झूलते आम आदमी, जानिए क्या होगा वित्तीय भविष्य

EMI or SIP: SIP आपके धैर्य की परीक्षा लेती है, वहीं EMI आपकी आय की परीक्षा लेती है। दोनों आपकी वित्तीय हालत को मजबूत या कमजोर कर सकते हैं। दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान है। आइये जानते हैं अगर आप EMI भर रहे हैं और SIP भी कर रहे हैं तो आपका वित्तीय भविष्य क्या होगा?

Jitendra Singh
अपडेटेड25 Aug 2025, 05:59 PM IST
EMI or SIP: बहुत से लोग SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं।
EMI or SIP: बहुत से लोग SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। (Livemint)

EMI or SIP: नौकरी कर रहे लोगों के अकाउंट में जब महीने के आखिरी में सैलरी आती है तो वो उसके खर्च का हिसाब करना शुरू कर देते हैं। जिन लोगों की EMI चल रही होती है, उन्हें अपनी सैलरी से EMI भी भरना है। EMI तभी भरते हैं, जब कुछ सामान खरीद चुके हैं। वहीं अगर निवेश करने की सोच रहे हैं तो SIP कर सकते हैं। SIP एक वह निवेश है, जहां भविष्य के लिए फंड तैयार होगा, लेकिन क्या सामान खरीदा जाएगा, यह तय नहीं रहता है।

अगर आपको यह दोनों काम करना पड़ जाए तो फिर आपका वित्तीय भविष्य क्या होगा, आइये इस पर एक नजर डालते हैं। फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, अगर आपने होम लोन लिया है तो कमाई का एक बड़ा हिस्सा EMI में ही चला जाएगा। वहीं जब आप SIP के जरिए निवेश करते हैं तो धीरे-धीरे छोटी रकम निवेश करके भविष्य के लिए कुछ पैसे बचा सकते हैं। हालांकि यह दोनों एक दूसरे के उल्टा हैं।

EMI और SIP की तुलना

EMI से आपको प्रोडक्ट तो मिल गया, लेकिन कई सालों तक बंधे रहना पड़ता है। वहीं SIP आपको धीमा लगता होगा, लेकिन एक दिन जब आप बैंक बैलेंस देखेंगे तो यह दोगुना या तीन गुना नजर आ सकता है। पूरे भारत में यह खींचतान बढ़ती जा रही है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि आज हर भारतीय पर कीब 4.8 लाख रुपये का कर्ज है। दो साल पहले यह 3.9 लाख रुपये था। वहीं, SIP भी रिकॉर्ड स्तर पर है। सिर्फ जुलाई 2025 में, भारतीयों ने SIP में लगभग 26,700 करोड़ रुपये का निवेश किया। मौजूदा समय में 8.5 करोड़ से ज्यादा एक्टिव अकाउंट हैं। EMI से कर्ज बढ़ता है। वहीं SIP से दौलत में इजाफा होता है।

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EMI के कई पहलू हैं

अगर आप होम लोन लेते हैं तो घर की इतनी ज्यादा कीमत होती है, जिसे एक बार में नहीं चुका सकते हैं। लिहाजा इसके लिए लोन लेना पड़ता है, फिर किस्तों (EMI) के जरिए रकम चुकाते रहते हैं। घरों के दाम बढ़ते रहते हैं। मौजूदा समय में आप थोड़ा-थोड़ा पैसा दे रहे हैं। एक बार किस्त चुकाने के बाद जब देखेंगे कि घर के दाम बहुत ज्यादा बढ़ चुके हैं। इससे आपको स्थिरता और सुरक्षा महसूस हो सकती है। जब आपका खुद का घर रहता है तो इतना सुकून मिलता है कि सिर ढकने के लिए छत है। भले ही आपको 20-25-30 साल तक EMI भरना पड़े।

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SIP के पहलू

रिपोर्ट में बताया गया है कि सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) अपने साथ दो पहलू लेकर आता है। शुरुआत में यह धीमा और दिखाई नहीं देता है। अगर आप हर महीने 5,000 रुपये निवेश करते हैं तो कई साल तक इसका असर नजर नहीं आएगा। मार्केट ऊपर-नीचे होता रहता है। कभी-कभी ऐसा लगेगा कि SIP में पैसा घट रहा है। ऐसे समय में कई निवेशक इसे रोकने का मन बनाते हैं। SIP की कमजोरी यही है कि यह धैर्य और अनुशासन मांगती है, जबकि खर्च और लालच हर जगह बढ़ते रहते हैं। लेकिन SIP की ताकत समय में है।

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वही 5,000 रुपये प्रति माह अगर 20 साल तक इक्विटी फंड में रह जाए, तो यह 40 लाख रुपये या उससे ज्यादा बन सकता है। 15,000 रुपये प्रति माह की SIP दो दशक में करोड़ के पार जा सकती है। यही कंपाउंडिंग की शक्ति है। SIP में निवेश करना आप बंद कर सकते हैं। राशि कम ज्यादा भी कर सकते हैं। इसमें आप EMI की तरह बंधे नहीं रहते हैं कि निवेश करना जरूरी है।

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