
एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) भारत सरकार की ओर से समर्थित रिटायरमेंट सेविंग्स स्कीम है। यह नौकरीपेशा लोगों के लिए लंबे समय तक बचत करने का एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर 15,000 रुपये या उससे कम होता है, वे EPF खाते के लिए पात्र होते हैं। वहीं, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA 15,000 रुपये से अधिक है, तो वह चाहें तो वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) में भी निवेश कर सकते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए केंद्र सरकार ने EPF और VPF पर 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दी है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 15 जुलाई तक सभी खातों में ब्याज की राशि जमा भी कर दी गई थी। लगातार तीसरे साल EPF पर 8.25% ब्याज दिया गया है।
अगर आपके EPF खाते में किसी तरह की समस्या है, जैसे क्लेम अटका हुआ है, KYC अपडेट नहीं हुआ है या बैलेंस गलत दिख रहा है, तो आप EPFO में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आइए जानते हैं इसका पूरा तरीका।
EPFO ने शिकायतों के समाधान के लिए EPFO ग्रिवेंस मैनेजमेंट सिस्टम (EPFiGMS) नाम का ऑनलाइन पोर्टल बनाया है। इस पोर्टल का इस्तेमाल EPF सदस्य, पेंशनधारक और नियोक्ता (Employer) सभी कर सकते हैं।
अगर आपको ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने में परेशानी हो रही है या किसी अन्य मदद की जरूरत है, तो EPFO से कई तरीकों से संपर्क किया जा सकता है।
EPF नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा देने वाली सबसे भरोसेमंद योजनाओं में से एक है। वित्त वर्ष 2025-26 में भी इस पर 8.25% ब्याज दिया जा रहा है, जो लगातार तीसरा साल है।
इसके अलावा EPF में निवेश पर टैक्स से जुड़े कई फायदे भी मिलते हैं।
इन्हीं कारणों से EPF को रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित बचत और टैक्स बचाने का एक बेहतर विकल्प माना जाता है।
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